जेनेवा | अपडेटेड: 29 मार्च, 2026
पाकिस्तान की राजनीति में भूचाल तब आ गया जब पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के दोनों बेटों, कासिम और सुलेमान खान ने जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के 61वें सत्र के दौरान अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की अपील की।
करीब 1,000 दिनों से जेल में बंद अपने पिता की स्थिति पर बोलते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि इमरान खान को “डेथ सेल” (फांसी की कालकोठरी) में रखा जा रहा है, जहाँ उन्हें बुनियादी चिकित्सा सुविधाओं और परिवार से मिलने की अनुमति से वंचित किया गया है। सुलेमान खान ने UN वर्किंग ग्रुप की रिपोर्ट का हवाला देते हुए इस हिरासत को “मनमाना” और “अवैध” करार दिया।
इमरान खान की सेहत पर बड़ा खुलासा
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इमरान खान की सेहत को लेकर चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। उनके वकीलों और बेटों ने दावा किया है कि जेल में उचित इलाज न मिलने के कारण इमरान खान की दाहिनी आँख की रोशनी लगभग 85% तक खत्म हो गई है। हाल ही में 23 मार्च 2026 को उन्हें इस्लामाबाद के PIMS अस्पताल ले जाया गया था, जहाँ उनकी आँखों का तीसरा ऑपरेशन (Anti-VEGF इंजेक्शन) किया गया।
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GSP+ ट्रेड स्टेटस: सरकार और विपक्ष में ‘आर-पार’
इस विवाद का सबसे संवेदनशील पहलू पाकिस्तान का GSP+ (Generalised Scheme of Preferences Plus) दर्जा है। यह यूरोपीय संघ (EU) द्वारा दी गई एक विशेष व्यापारिक छूट है, जिससे पाकिस्तान के निर्यात (खासकर टेक्सटाइल) को यूरोपीय बाजारों में कम टैरिफ का लाभ मिलता है।
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सरकार का आरोप: सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार और अन्य मंत्रियों ने इसे एक “सुनियोजित साजिश” बताया है। सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश की छवि बिगाड़कर PTI पाकिस्तान के व्यापारिक हितों को चोट पहुँचा रही है, जिससे लाखों नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं।
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PTI का स्पष्टीकरण: कासिम खान ने सोशल मीडिया और लाइव प्रसारण के जरिए स्पष्ट किया कि उन्होंने कहीं भी GSP+ दर्जा खत्म करने की मांग नहीं की। उन्होंने केवल यह याद दिलाया कि इस दर्जे को बनाए रखने के लिए पाकिस्तान ने जिन 27 अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संधियों पर हस्ताक्षर किए हैं, उनका पालन करना सरकार की जिम्मेदारी है।
राजनीतिक और कूटनीतिक प्रभाव
पाकिस्तान के व्यापारिक समुदाय (FPCCI) ने भी इन बयानों पर चिंता जताई है, इसे “देश की रग (Jugular Vein)” पर हमला बताया है। वहीं, PTI अध्यक्ष बैरिस्टर गोहर अली खान ने सरकार के दावों को “दुर्भावनापूर्ण प्रोपेगेंडा” करार देते हुए कहा कि बच्चों का अपने पिता के लिए आवाज उठाना उनका संवैधानिक अधिकार है।
हाइलाइट्स:
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जिनेवा में UNHRC के 61वें सत्र में इमरान खान के बेटों ने पाकिस्तान सरकार को घेरा।
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कासिम और सुलेमान खान का दावा: 1,000 दिनों से कैद इमरान खान की आँखों की रोशनी 85% तक कम हुई।
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शहबाज शरीफ सरकार ने बयानों को बताया “आर्थिक आतंकवाद”, GSP+ दर्जा खतरे में पड़ने की जताई आशंका।
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PTI का पलटवार: “बेटों का दर्द राजनीतिक नहीं, मानवीय है; GSP+ को लेकर फैलाया जा रहा झूठ।”
निष्कर्ष: यह मुद्दा अब केवल इमरान खान की रिहाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पाकिस्तान की वैश्विक साख और आर्थिक स्थिरता का सवाल बन गया है। यदि यूरोपीय संघ मानवाधिकारों के आधार पर अपनी समीक्षा सख्त करता है, तो पहले से ही आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए यह एक बड़ा झटका साबित हो सकता है।
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