ओटावा | शनिवार, 4 अप्रैल 2026
कनाडा में खालिस्तानी समर्थक संगठन ‘सिख फॉर जस्टिस’ (SFJ) द्वारा हिंदू मंदिरों के बाहर प्रदर्शन की घोषणा के बाद तनाव चरम पर है। कल यानी 5 अप्रैल को प्रस्तावित इन रैलियों को देखते हुए कनाडाई प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। नवंबर 2024 में हिंदू सभा मंदिर पर हुए हिंसक हमले की कड़वी यादों के बीच, इस बार प्रशासन कोई जोखिम नहीं लेना चाहता।
ब्रांपटन में ‘सुरक्षा घेरा’ और सरे में कानूनी जंग
ब्रांपटन के त्रिवेणी मंदिर और सरे के लक्ष्मी नारायण मंदिर को विशेष रूप से निशाना बनाया गया है। ताज़ा रिपोर्टों के अनुसार:
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100 मीटर का प्रतिबंध: ब्रांपटन सिटी काउंसिल द्वारा पास किए गए नए उपनियम (Bylaw) के तहत त्रिवेणी मंदिर के आसपास 100 मीटर का सुरक्षा घेरा लागू कर दिया गया है। पील रीजनल पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इस दायरे में किसी भी प्रदर्शनकारी को घुसने नहीं दिया जाएगा।
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सरे में कोर्ट का दरवाजा: सरे के लक्ष्मी नारायण मंदिर प्रशासन ने स्थानीय प्रशासन से इसी तरह के सुरक्षा घेरे की मांग की है। चूंकि सरे में ब्रांपटन जैसा कोई स्थायी उपनियम नहीं है, इसलिए मंदिर प्रबंधन कोर्ट के जरिए प्रदर्शनकारियों को मंदिर से दूर रखने के आदेश प्राप्त करने की कोशिश कर रहा है।
हिंदू संगठनों का ‘Hands Off Our Temples’ अभियान
हिंदू कनाडियन फाउंडेशन (HCF) और कोहना (CoHNA) जैसे संगठनों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस मुद्दे को उठाया है। हिंदू संगठनों की प्रमुख मांगें और आपत्तियां निम्नलिखित हैं:
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आतंकवादी घोषित करने की मांग: HCF ने कनाडाई सरकार से मांग की है कि मंदिरों को निशाना बनाने वाले खालिस्तानी चरमपंथियों को आधिकारिक तौर पर ‘आतंकवादी’ घोषित किया जाए।
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धार्मिक स्वतंत्रता बनाम उत्पीड़न: हिंदू समुदाय का तर्क है कि पूजा स्थलों के बाहर लाउडस्पीकर और उकसावे वाले बैनरों के साथ प्रदर्शन करना ‘अभिव्यक्ति की आजादी’ नहीं बल्कि सीधा धार्मिक उत्पीड़न और डराने-धमकाने की रणनीति है।
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मनोवैज्ञानिक दबाव: श्रद्धालुओं, विशेषकर बुजुर्गों ने चिंता व्यक्त की है कि इस तरह के प्रदर्शनों से मंदिरों का आध्यात्मिक वातावरण दूषित होता है और डर का माहौल पैदा होता है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार: matribhumisamachar.com/category/international
कनाडाई प्रशासन और पुलिस की तैयारी
पील और सरे पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने मंदिर प्रबंधन के साथ कई दौर की बैठकें की हैं। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि:
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प्रदर्शन के दौरान भारी पुलिस बल तैनात रहेगा।
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किसी भी प्रकार की हिंसा या मंदिर परिसर में घुसपैठ करने पर तत्काल गिरफ्तारियां की जाएंगी।
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खुफिया विभाग (CSIS) की 2024 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए पुलिस इन प्रदर्शनों को ‘हाई-रिस्क’ श्रेणी में रख रही है।
पृष्ठभूमि: नवंबर 2024 की हिंसा का साया
यह विवाद तब और अधिक गंभीर हो गया है जब 3 नवंबर 2024 को ब्रांपटन के हिंदू सभा मंदिर में खालिस्तानी समर्थकों ने घुसकर श्रद्धालुओं के साथ मारपीट की थी। उस घटना के बाद से ही कनाडाई हिंदू समुदाय अपनी सुरक्षा को लेकर मुखर है और प्रशासन पर सख्त कार्रवाई का दबाव बना रहा है।
की-पॉइंट्स:
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तारीख: 5 अप्रैल 2026 को प्रस्तावित है रैली।
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स्थान: त्रिवेणी मंदिर (ब्रांपटन) और लक्ष्मी नारायण मंदिर (सरे)।
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नियम: 100 मीटर का बफर ज़ोन उल्लंघन पर होगी सख्त कार्रवाई।
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सुरक्षा: पील रीजनल पुलिस और सरे पुलिस ने संभाली कमान।
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