वॉशिंगटन | 29 मार्च, 2026
ईरान के साथ जारी भीषण युद्ध के बीच मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में अमेरिका की सैन्य घेराबंदी अब तक के सबसे खतरनाक स्तर पर पहुँच गई है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने पुष्टि की है कि आधुनिक एम्फीबियस असॉल्ट शिप USS त्रिपोली (LHA-7) अपने साथ 3,500 घातक मरीन सैनिकों और नौसैनिकों की टुकड़ी लेकर युद्ध क्षेत्र में पहुँच गया है।
पेंटागन की इस हलचल को ईरान के खिलाफ एक बड़े ‘जमीनी अभियान’ (Ground Operation) की प्रस्तावना के रूप में देखा जा रहा है।
USS त्रिपोली: समुद्र में तैरता ‘किले’ जैसा एयरबेस
USS त्रिपोली की तैनाती ने ईरान की रातों की नींद उड़ा दी है। यह केवल एक जहाज नहीं है, बल्कि एक अत्याधुनिक एम्फीबियस प्लेटफॉर्म है जो निम्नलिखित क्षमताओं से लैस है:
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F-35B स्टील्थ फाइटर्स: यह जहाज रडार को चकमा देने वाले विमानों को संचालित कर सकता है।
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ओस्प्रे (Ospreys): सैनिकों को तेजी से दुश्मन की सीमा के अंदर उतारने वाले वर्टिकल टेक-ऑफ विमान।
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31st मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट: इसमें शामिल मरीन सैनिक तटीय हमलों और शहरी युद्ध (Urban Warfare) में विशेषज्ञ माने जाते हैं।
ग्राउंड ऑपरेशन का ‘ब्लूप्रिंट’: पूरी जंग नहीं, ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ पर जोर
अमेरिकी अधिकारियों और वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, पेंटागन ने हफ्तों तक चलने वाले एक सीमित जमीनी अभियान का खाका तैयार किया है।
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रणनीति: इसमें पूरे ईरान पर कब्जा करने के बजाय ‘छापेमारी और विनाश’ (Raid and Destroy) की रणनीति अपनाई जाएगी।
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मुख्य लक्ष्य: रणनीतिक द्वीप (जैसे खार्ग द्वीप, जहाँ से ईरान 90% तेल निर्यात करता है), मिसाइल लॉन्च पैड और परमाणु ठिकाने।
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ट्रंप का फैसला: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अभी तक इस जमीनी हमले को अंतिम मंजूरी नहीं दी है, लेकिन वे “मैक्सिमम प्रेशर” रणनीति के तहत सभी विकल्प खुले रखना चाहते हैं।
10,000 अतिरिक्त सैनिकों की तैयारी: युद्ध का नया चरण?
पेंटागन इस समय 10,000 अतिरिक्त सैनिकों को मिडिल ईस्ट भेजने पर विचार कर रहा है। यदि यह तैनाती होती है, तो क्षेत्र में अमेरिकी सैनिकों की कुल संख्या में भारी इजाफा होगा।
| बल/इकाई | क्षमता | उद्देश्य |
| USS त्रिपोली (3,500 मरीन) | एम्फीबियस अटैक | समुद्र से जमीन पर हमला और द्वीप कब्जाना। |
| 82nd एयरबोर्न डिवीजन | त्वरित तैनाती | पैराशूट के जरिए दुश्मन के पीछे उतरना। |
| USS बॉक्सर और सैन डिएगो | नौसैनिक बैकअप | रसद और अतिरिक्त हवाई सुरक्षा। |
ईरान की चेतावनी: “ताबूत में वापस जाएंगे अमेरिकी”
अमेरिका के इस सैन्य जमावड़े पर ईरान ने भी कड़ा रुख अपनाया है। ईरानी मीडिया (तेहरान टाइम्स) ने ‘वेलकम टू हेल’ जैसी सुर्खियों के साथ चेतावनी दी है कि यदि अमेरिकी सैनिक ईरानी धरती पर कदम रखते हैं, तो वे केवल ताबूतों में ही वापस लौटेंगे।
निष्कर्ष: कूटनीति बनाम बारूद
एक तरफ राष्ट्रपति ट्रंप ईरान को 15-सूत्रीय शांति योजना का प्रस्ताव दे रहे हैं और 10 दिनों का अल्टीमेटम (6 अप्रैल 2026 तक) बढ़ा रहे हैं, तो दूसरी तरफ सेना की यह तैनाती संकेत दे रही है कि अमेरिका किसी भी समझौते के विफल होने पर “अंतिम प्रहार” के लिए तैयार है।
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