
प्रयागराज। शुक्रवार, 12 जून 2026
संस्कार, स्वावलंबन और राष्ट्रनिष्ठा के त्रिवेणी संगम के साथ राष्ट्र सेविका समिति द्वारा आयोजित प्रांतीय प्रशिक्षण वर्ग का आज भव्य और अनुशासित वातावरण में समापन हो गया। इस विशेष प्रशिक्षण शिविर में प्रयागराज और आसपास के क्षेत्रों से आईं 101 शिक्षार्थी बहनों ने राष्ट्र सेवा और समाज के उत्थान में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का सामूहिक संकल्प लिया। पूरे वर्ग के दौरान सेविकाओं को शारीरिक आत्मनिर्भरता, बौद्धिक चेतना और संगठनात्मक कौशल का गहन प्रशिक्षण दिया गया, ताकि वे समाज को एक नई और सकारात्मक दिशा दे सकें।
संस्कारवान मातृशक्ति ही राष्ट्र की रीढ़: मुख्य वक्ता शशि जी
समापन सत्र को संबोधित करते हुए कार्यक्रम की मुख्य वक्ता शशि ने देश के वर्तमान परिदृश्य और संगठन के आगामी लक्ष्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और राष्ट्र सेविका समिति वर्तमान में पंच-परिवर्तन अभियान (सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी जीवन शैली और नागरिक कर्तव्य) को लेकर समाज के बीच जा रहे हैं। इसमें महिलाओं की भूमिका सबसे केंद्रीय है।
“एक जागरूक, सक्षम और संस्कारवान मातृशक्ति ही परिवार से लेकर राष्ट्र तक को नई दिशा प्रदान कर सकती है। इस वर्ग का उद्देश्य केवल शारीरिक रूप से मजबूत बनाना नहीं है, बल्कि बहनों के भीतर छिपे आत्मविश्वास, सेवा भावना और समाज के प्रति उनके उत्तरदायित्वों को जगाना है।”
— शशि, मुख्य वक्ता
विशिष्ट अतिथियों ने सराहा सेविकाओं का शौर्य
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित एलडीसी पब्लिक स्कूल की निदेशक पूजा गुप्ता ने सेविकाओं के अनुशासन की मुक्त कंठ से सराहना की। उन्होंने कहा कि आज के आधुनिक युग में जब बेटियां हर क्षेत्र में नेतृत्व कर रही हैं, तब ऐसे प्रशिक्षण वर्ग उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से और अधिक सशक्त बनाते हैं।
वहीं, कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही प्रख्यात स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. सविता अग्रवाल ने संगठन के इस प्रयास की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि महिलाओं का स्वास्थ्य और उनकी आत्मरक्षा क्षमता दोनों ही समाज की उन्नति के लिए आवश्यक हैं। समिति का यह कार्य वास्तव में सराहनीय है।
शारीरिक प्रदर्शन और दंड प्रात्यक्षिक से किया अचंभित
समापन के अवसर पर मैदान का नजारा देखने लायक था। प्रशिक्षण ले रही बहनों ने पिछले कई दिनों की अपनी कड़ी मेहनत को मैदान पर जीवंत कर दिया। कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण कुछ इस प्रकार रहे:
-
घोष (बैंड) वादन: सेविकाओं ने घोष की मधुर और वीर रस से भरी धुनों पर अत्यंत सटीक कदमताल (मार्च पास्ट) किया।
-
योग और प्राणायाम: मानसिक एकाग्रता और शारीरिक सुदृढ़ता के लिए किए गए योगासनों ने सबको प्रभावित किया।
-
दंड एवं यष्टि प्रात्यक्षिक: आत्मरक्षा के लिए लाठी (दंड) चलाने के विभिन्न कौशलों का प्रदर्शन कर बहनों ने यह साबित किया कि वे विपरीत परिस्थितियों में अपनी और समाज की रक्षा करने में पूरी तरह सक्षम हैं।
इसके पश्चात, वर्ग अधिकारी गीता तिवारी ने मंच से पूरे शिक्षा वर्ग का ‘वृत्त’ (विस्तृत रिपोर्ट) प्रस्तुत किया, जिसमें उन्होंने वर्ग के दैनिक दिनचर्या और शिक्षार्थियों के अनुभव साझा किए।
संगठन की वरिष्ठ पदाधिकारियों की रही गरिमामयी उपस्थिति
इस प्रशिक्षण वर्ग को सफ़लतापूर्वक संपन्न कराने में मुख्य शिक्षिका मोमी डे का विशेष योगदान रहा, जिन्होंने दिन-रात बहनों के कौशल को तराशने का काम किया। कार्यक्रम के दौरान संगठन की मजबूती और मातृशक्ति के दायित्वों पर विमर्श करते हुए कई वरिष्ठ पदाधिकारी भी उपस्थित रहीं।
समापन के इस गौरवपूर्ण क्षण पर विभाग कार्यवाहिका प्रिया, प्रांत कार्यवाहिका माया पांडे, प्रांत संपर्क प्रमुख देवयानी और प्रांत बौद्धिक प्रमुख वंदना सहित कुल 101 बहनों की सक्रिय उपस्थिति रही। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रशिक्षार्थियों ने देश की सांस्कृतिक धरोहर को अक्षुण्ण रखने और पीड़ित-वंचित समाज की सेवा करने की प्रतिज्ञा के साथ वर्ग का समापन किया।
Matribhumisamachar


