नई दिल्ली । सोमवार, 13 जुलाई 2026
वर्ष 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान देश को झकझोर देने वाले इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) अधिकारी अंकित शर्मा हत्याकांड में एक ऐतिहासिक मोड़ आया है। दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन सहित 5 आरोपियों को दोषी करार दिया है। इस मामले में कुल 11 लोगों को आरोपी बनाया गया था, जिनमें से कोर्ट ने पर्याप्त सबूतों के अभाव में 6 आरोपियों को बरी कर दिया है। 6 साल के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार शहीद अंकित शर्मा के परिवार को न्याय की पहली सीढ़ी मिल गई है।
क्या हुआ था 25 फरवरी 2020 की उस काली शाम को?
नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और एनआरसी (NRC) के विरोध तथा समर्थन को लेकर फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली सांप्रदायिक हिंसा की आग में सुलग रही थी। चांद बाग, खजूरी खास और मुस्तफाबाद जैसे इलाके सबसे बुरी तरह प्रभावित थे।
इसी खौफनाक माहौल के बीच, 26 वर्षीय आईबी अधिकारी अंकित शर्मा 25 फरवरी की शाम को अपने दफ्तर से घर लौटे थे। गली के बाहर बढ़ते तनाव को देखकर, वे स्थानीय लोगों को समझाने और हिंसक भीड़ को शांत कराने के उद्देश्य से घर से बाहर निकले। चांद बाग पुलिया के पास अचानक ताहिर हुसैन के घर और पास की मस्जिद के समीप सक्रिय एक उग्र भीड़ ने उन्हें घेर लिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, भीड़ उन्हें बेरहमी से घसीटते हुए ताहिर हुसैन के घर के पास ले गई, जहां धारदार हथियारों से उन पर ताबड़तोड़ वार किए गए। हत्या के बाद सबूत मिटाने के लिए शव को पास के खजूरी खास नाले में फेंक दिया गया।
नाले से लाश मिलने पर कांप उठी थी रूह
अंकित के पिता रविंदर कुमार (जो स्वयं पुलिस विभाग में रहे हैं) ने 26 फरवरी 2020 को दयालपुर थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। खोजबीन के दौरान स्थानीय लड़कों की सूचना पर पुलिस ने गोताखोरों की मदद से खजूरी खास नाले से अंकित का क्षत-विक्षत शव बरामद किया।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जो सच सामने आया, उसने क्रूरता की सारी हदें पार कर दी थीं:
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51 गहरे घाव: अंकित शर्मा के शरीर पर चाकू और अन्य धारदार हथियारों से किए गए 51 गहरे चोटों के निशान थे।
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अत्यधिक रक्तस्राव: डॉक्टरों के अनुसार, उनके फेफड़ों और मस्तिष्क पर इतने घातक वार थे कि अत्यधिक खून बहने के कारण मौके पर ही उनकी मौत हो गई थी।
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पहचान मिटाने का प्रयास: साक्ष्य नष्ट करने के इरादे से शव को नाले के दलदल में धकेल दिया गया था।
कड़कड़डूमा कोर्ट का फैसला: कौन दोषी, कौन बरी?
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (ASJ) प्रवीन सिंह की अदालत ने इस मामले में कड़ा फैसला सुनाते हुए ताहिर हुसैन समेत पांच लोगों को हत्या और दंगा भड़काने का दोषी पाया। कोर्ट ने आरोपियों को भारतीय दंड संहिता (IPC) की गंभीर धाराओं के तहत दोषी ठहराया है।
इन धाराओं में ठहराया गया दोषी:
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धारा 302: हत्या के लिए
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धारा 365: गुप्त रूप से बंधक बनाने या अपहरण करने के उद्देश्य से
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धारा 147 और 148: दंगा करने और घातक हथियारों से लैस होने के लिए
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धारा 153A: धर्म, जाति आदि के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना
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धारा 188: लोक सेवक द्वारा विधिवत प्रख्यापित आदेश की अवज्ञा करना
दोषियों और बरी हुए लोगों की सूची:
| दोषी करार दिए गए आरोपी (5) | बरी किए गए आरोपी (6) |
| 1. ताहिर हुसैन (पूर्व आप पार्षद) | 1. हसीन उर्फ मुल्लाजी |
| 2. नाजिम | 2. समीर खान |
| 3. कासिम | 3. फिरोज |
| 4. अनस | 4. गुलफाम |
| 5. जावेद | 5. शोएब आलम और मुंतजिर |
अदालत का मुख्य अवलोकन: अदालत ने ताहिर हुसैन को इस पूरे जघन्य हत्याकांड का मुख्य सूत्रधार माना। हालांकि, अदालत ने कुछ तकनीकी आधारों पर धारा 120B (आपराधिक साजिश) के आरोपों से उन्हें मुक्त किया, लेकिन हत्या (302) और अपहरण (365) जैसे सीधे और गंभीर अपराधों में पूरी तरह दोषी पाया।
दिल्ली पुलिस की जांच और चार्जशीट का आधार
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच द्वारा दाखिल चार्जशीट के अनुसार, ताहिर हुसैन का घर दंगाइयों का मुख्य ठिकाना बना हुआ था। जांच के दौरान उनके घर की छत से भारी मात्रा में पत्थर, बड़े गुलेल और तेजाब की बोतलें बरामद हुई थीं। ताहिर हुसैन पर न केवल भीड़ को उकसाने का, बल्कि दंगाइयों को संसाधन उपलब्ध कराने का भी आरोप सिद्ध हुआ है। मार्च 2023 में अदालत ने इन सभी के खिलाफ औपचारिक आरोप तय किए थे, जिस पर 2026 में आकर यह अंतिम फैसला आया है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1. अंकित शर्मा कौन थे और उनकी हत्या कब हुई थी?
उत्तर: अंकित शर्मा इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) में एक सुरक्षा अधिकारी के रूप में तैनात थे। 25 फरवरी 2020 को उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़के सांप्रदायिक दंगों के दौरान हिंसक भीड़ ने उनकी बेरहमी से हत्या कर दी थी।
Q2. कड़कड़डूमा कोर्ट ने ताहिर हुसैन को किन धाराओं में दोषी पाया है?
उत्तर: कोर्ट ने ताहिर हुसैन को आईपीसी की धारा 302 (हत्या), 365 (अपहरण), 147-148 (दंगा), 153A (शत्रुता बढ़ाना) और 188 के तहत दोषी ठहराया है।
Q3. इस केस में कितने लोगों को सजा हुई और कितने बरी हुए?
उत्तर: इस मामले में कुल 11 आरोपियों में से मुख्य आरोपी ताहिर हुसैन समेत 5 लोगों को दोषी ठहराया गया है, जबकि 6 अन्य आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया है।
Q4. अंकित शर्मा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में क्या खुलासे हुए थे?
उत्तर: पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, अंकित शर्मा के शरीर पर धारदार हथियारों से किए गए 51 गहरे घाव थे। उनके मस्तिष्क और फेफड़ों पर गंभीर वार के कारण अत्यधिक खून बहने से उनकी मृत्यु हुई थी।
डिस्क्लेमर (Disclaimer): यह लेख कड़कड़डूमा कोर्ट, दिल्ली द्वारा दिए गए हालिया फैसले और दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच द्वारा प्रस्तुत आधिकारिक चार्जशीट के तथ्यों पर आधारित है।
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