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पश्चिम एशिया संकट: पीएम मोदी की CCS बैठक, 90 लाख भारतीयों की सुरक्षा और तेल संकट पर बड़ा फैसला

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पीएम मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की बैठक।

नई दिल्ली. पश्चिम एशिया (Middle East) में भड़की भीषण आग और ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत की अपुष्ट खबरों के बाद पूरी दुनिया में हड़कंप मच गया है। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए संयुक्त हमलों ने तीसरे विश्व युद्ध जैसी स्थिति पैदा कर दी है। इसी गंभीर संकट के बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (1 मार्च 2026) रात को कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की एक उच्च स्तरीय और आपात बैठक की अध्यक्षता की।

करीब 3 घंटे तक चली इस मैराथन बैठक में भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और विदेशों में फंसे लाखों भारतीयों को सुरक्षित निकालने की रणनीति पर गहन मंथन हुआ।

CCS की बैठक के 5 बड़े एजेंडे: भारत पर क्या होगा असर?

बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और NSA अजीत डोभाल जैसे दिग्गज शामिल हुए। बैठक के मुख्य बिंदु निम्नलिखित रहे:

1. 90 लाख भारतीयों की सुरक्षा: सबसे बड़ी चुनौती

खाड़ी देशों (Gulf Countries) में लगभग 90 लाख भारतीय रहते हैं। ईरान, इजरायल और यूएई (UAE) जैसे देशों में युद्ध के बादल मंडराने से उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। विशेष रूप से दुबई जैसे व्यस्त एयरपोर्ट्स पर उड़ानों के रद्द होने से हजारों यात्री फंसे हुए हैं, जिनकी पल-पल की रिपोर्ट विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने पीएम मोदी को दी।

2. ‘ऑपरेशन रेस्क्यू’ के लिए ब्लू-प्रिंट तैयार

सूत्रों के अनुसार, सरकार ने जरूरत पड़ने पर भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने (Evacuation) के लिए एक व्यापक रणनीति तैयार कर ली है।

  • वायुसेना और नौसेना: एयरस्पेस बंद होने की स्थिति में वैकल्पिक समुद्री रास्तों और विशेष उड़ानों के इस्तेमाल पर विचार किया गया।

  • इमरजेंसी कंट्रोल रूम: छात्रों और कामगारों के लिए खाड़ी देशों में स्थित भारतीय दूतावासों को 24×7 अलर्ट पर रखा गया है।

3. कच्चे तेल की कीमतें और ऊर्जा सुरक्षा (Oil Security)

भारत अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से पूरा करता है।

  • कीमतों में उछाल: युद्ध की स्थिति में कच्चे तेल (Crude Oil) के दाम $100 प्रति बैरल को पार कर सकते हैं।

  • आपूर्ति श्रृंखला: पीएम मोदी ने निर्देश दिया है कि भारत के सामरिक तेल भंडार (Strategic Petroleum Reserves) और वैकल्पिक आपूर्ति रास्तों की समीक्षा की जाए ताकि देश में ईंधन की किल्लत न हो।

4. समुद्री व्यापार और शिपिंग रूट्स (Trade Routes)

लाल सागर और ओमान की खाड़ी में बढ़ते तनाव का सीधा असर भारतीय निर्यात पर पड़ेगा। सरकार जल्द ही निर्यातकों और शिपिंग कंपनियों के साथ एक बड़ी बैठक करने वाली है ताकि समुद्री व्यापार को सुरक्षित रखा जा सके।

5. देश की आंतरिक सुरक्षा और खुफिया इनपुट

NSA अजीत डोभाल ने पश्चिम एशिया के हालात का भारत की आंतरिक सुरक्षा पर पड़ने वाले असर के बारे में प्रस्तुति दी। देश के भीतर संभावित विरोध-प्रदर्शनों और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कड़े निर्देश जारी किए गए हैं।

ईरान-इजरायल तनाव: दुनिया के लिए क्यों है खतरनाक?

ईरान पर अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों के बाद ‘मिडिल ईस्ट’ का नक्शा बदलता नजर आ रहा है। अयातुल्लाह अली खामेनेई की मृत्यु (यदि पुष्टि होती है) ईरान के लिए एक बड़ा वैक्यूम पैदा करेगी, जिससे क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ सकती है। भारत के लिए यह स्थिति न केवल आर्थिक रूप से बल्कि सामरिक रूप से भी बेहद संवेदनशील है।

भारत की ‘वेट एंड वॉच’ की नीति

फिलहाल, भारत सरकार ने “इंतजार करो और देखो” (Wait and Watch) के साथ-साथ “तैयार रहो” की नीति अपनाई है। विदेश मंत्रालय वैश्विक स्तर पर शांति बहाली के लिए डिप्लोमैटिक चैनलों का भी उपयोग कर रहा है।

महत्वपूर्ण नोट: नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे ईरान और इजरायल की गैर-जरूरी यात्रा से बचें और भारतीय दूतावास द्वारा जारी आधिकारिक एडवाइजरी का पालन करें।

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