लोड हो रहा है...

कश्मीर में अयातुल्ला खामेनेई की हत्या पर भारी विरोध: स्कूल 7 मार्च तक बंद, इंटरनेट पर पाबंदी

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
2 Min Read

जम्मू. ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के विरोध में कश्मीर घाटी में उपजा आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है। मंगलवार को लगातार तीसरे दिन भी जनजीवन पूरी तरह प्रभावित रहा। प्रशासन ने बिगड़ते हालातों को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था और सख्त कर दी है।

प्रमुख घटनाक्रम और प्रशासनिक कड़े कदम:

  • स्कूलों की बंदी बढ़ी: कश्मीर संभाग के सभी स्कूलों को अब 7 मार्च 2026 तक बंद रखने का आदेश जारी किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि छात्रों की सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह निर्णय आवश्यक था।

  • इंटरनेट पर पाबंदी: अफवाहों को फैलने से रोकने के लिए पूरी घाटी में मोबाइल इंटरनेट की स्पीड कम (2G) कर दी गई है। सोशल मीडिया पर भी कड़ी निगरानी रखी जा रही है।

  • लाल चौक सील: श्रीनगर का ऐतिहासिक लाल चौक और घंटा घर पूरी तरह से बैरिकेड्स और कँटीले तारों (कॉन्सर्टिना वायर) से ढका हुआ है। शहर के प्रवेश और निकास द्वारों पर CRPF और जम्मू-कश्मीर पुलिस की भारी तैनाती की गई है।

  • सैन्य आवाजाही पर रोक: सुरक्षा कारणों से मंगलवार को सुरक्षा बलों के काफिलों की आवाजाही रद्द कर दी गई ताकि किसी भी प्रकार के टकराव की स्थिति से बचा जा सके।

हिंसक झड़पें और घायल:

सोमवार को हुए व्यापक प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़पों में 6 सुरक्षाकर्मियों सहित 14 लोग घायल हुए हैं। प्रशासन के मुताबिक घाटी के विभिन्न हिस्सों में अब तक करीब 75 रैलियां निकाली जा चुकी हैं।

2019 के बाद का सबसे बड़ा प्रदर्शन:

जानकारों का मानना है कि अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 हटने के बाद कश्मीर में यह पहली बार है जब इतने बड़े पैमाने पर और लगातार कई दिनों तक विरोध प्रदर्शन देखे जा रहे हैं।

प्रशासन की अपील: > कश्मीर डिवीजन प्रशासन ने जनता से शांति बनाए रखने और किसी भी भड़काऊ गतिविधि का हिस्सा न बनने की अपील की है।

आपातकालीन हेल्पलाइन: 0194-2740003

? matribhumisamachar.com/ – जम्मू-कश्मीर ताज़ा खबरें

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।