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Chaitra Navratri Day 5: ममता की प्रतिमूर्ति मां स्कंदमाता की पूजा आज, जानें शुभ मुहूर्त और विधि

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कमल पर विराजमान चार भुजाधारी मां स्कंदमाता का दिव्य स्वरूप।

चैत्र नवरात्रि के पावन पर्व का उत्साह चरम पर है। रविवार, 22 मार्च को मां कुष्मांडा की आराधना के बाद, अब सोमवार, 23 मार्च 2026 को नवरात्रि का पांचवां दिन मां स्कंदमाता को समर्पित होगा। भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माता होने के कारण इन्हें स्कंदमाता कहा जाता है। मान्यता है कि इनकी पूजा से भक्तों को मोक्ष के साथ-साथ संतान सुख और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

🌸 मां स्कंदमाता का स्वरूप और महत्व

मां स्कंदमाता को ममता और वात्सल्य की प्रतिमूर्ति माना जाता है। देवी का यह स्वरूप कमल के आसन पर विराजमान रहता है, इसलिए इन्हें ‘पद्मासना’ भी कहा जाता है। इनकी चार भुजाएं हैं और ये अपनी गोद में भगवान कार्तिकेय को धारण किए हुए हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो भक्त निष्कपट भाव से मां की शरण में आता है, उसके जीवन के सभी कष्ट और दुख दूर हो जाते हैं।

🕒 पूजा का शुभ मुहूर्त (23 मार्च 2026)

सोमवार को पंचमी तिथि पर मां स्कंदमाता की पूजा के लिए निम्नलिखित मुहूर्त विशेष फलदायी रहेंगे:

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:47 से 05:34 तक।

  • अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:03 से 12:52 तक (यह समय सबसे शुभ माना जाता है)।

  • विजय मुहूर्त: दोपहर 02:30 से 03:19 तक।

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🛕 ऐसे करें मां स्कंदमाता की पूजा (पूजा विधि)

धार्मिक विशेषज्ञों के अनुसार, इस दिन पूजा में शुद्धता का विशेष ध्यान रखना चाहिए:

  1. वस्त्र: भक्तों को इस दिन सफेद या पीले वस्त्र धारण करने चाहिए। सफेद रंग शांति और पीला रंग सकारात्मकता का प्रतीक है।

  2. शुद्धिकरण: सुबह जल्दी स्नान कर पूरे घर और पूजा स्थल पर गंगाजल छिड़कें।

  3. अर्पण: मां को पीले फूल (खासकर गेंदा या पीला गुलाब), फल, धूप और दीप अर्पित करें।

  4. मंत्र जाप: पूजा के दौरान “ॐ देवी स्कंदमातायै नमः” मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें।

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🍌 मां का पसंदीदा भोग और रंग

मां स्कंदमाता को केले का भोग अति प्रिय है। मान्यता है कि केले का प्रसाद चढ़ाने से शारीरिक कष्ट दूर होते हैं और आरोग्य की प्राप्ति होती है। कई श्रद्धालु इस दिन केले का हलवा भी माता को अर्पित करते हैं।

विशेष टिप: यदि आपकी कुंडली में बुध ग्रह कमजोर है, तो मां स्कंदमाता की विशेष पूजा से उसे मजबूती दी जा सकती है, जिससे बौद्धिक क्षमता और निर्णय लेने की शक्ति बढ़ती है।

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📅 चैत्र नवरात्रि 2026 का कैलेंडर

यह पर्व 19 मार्च से शुरू हुआ है और 27 मार्च 2026 तक चलेगा:

  • 24 मार्च (मंगलवार): मां कात्यायनी की पूजा (छठा दिन)

  • 25 मार्च (बुधवार): मां कालरात्रि की पूजा (सातवां दिन)

  • 26 मार्च (गुरुवार): मां महागौरी की पूजा (अष्टमी – कन्या पूजन)

  • 27 मार्च (शुक्रवार): मां सिद्धिदात्री की पूजा और राम नवमी

चैत्र नवरात्रि का समापन 27 मार्च को मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के जन्मोत्सव यानी राम नवमी के साथ होगा। मंदिरों में भक्तों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए विशेष सुरक्षा और दर्शन की व्यवस्था की गई है।

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