इस्लामाबाद | शनिवार, 4 अप्रैल 2026
मध्य पूर्व (Middle East) में गहराते भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका-इजरायल बनाम ईरान के बीच युद्ध जैसी स्थितियों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के समीकरण बदल दिए हैं। इसी कड़ी में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने पाकिस्तान को दिए गए अपने $2 बिलियन (लगभग 16,500 करोड़ रुपये) के सुरक्षित जमा (Safe Deposit) को तत्काल वापस मांगने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान इस महीने के अंत तक यह बड़ी राशि UAE को लौटाने जा रहा है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब खाड़ी देश अपनी वित्तीय तरलता (Liquidity) को मजबूत करने में जुटे हैं।
सालाना ‘रोलोवर’ की परंपरा हुई खत्म
बीते कई सालों से UAE पाकिस्तान के भुगतान संतुलन (Balance of Payments) को संभालने के लिए इस कर्ज की अवधि को हर साल बढ़ाता (Rollover) आ रहा था। हालांकि, दिसंबर 2025 के बाद से UAE ने अपनी रणनीति बदल दी। पहले इस कर्ज को केवल एक महीने के लिए बढ़ाया गया और फिर इसे दो महीने का विस्तार देकर 17 अप्रैल 2026 की अंतिम समयसीमा तय की गई।
सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान ने ब्याज दरों को 6.5% से घटाकर 3% करने का अनुरोध किया था, लेकिन मौजूदा युद्धकालीन परिस्थितियों को देखते हुए UAE ने रियायत देने के बजाय अपना पैसा वापस मांगना बेहतर समझा।
अप्रैल में पाकिस्तान पर ‘कर्ज का पहाड़’
पाकिस्तान के लिए अप्रैल 2026 का महीना आर्थिक रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण रहने वाला है। उसे केवल UAE का ही नहीं, बल्कि कुल $4.8 बिलियन का भुगतान करना है:
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$2 बिलियन: UAE का मुख्य जमा धन (17 अप्रैल)।
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$1.3 बिलियन: यूरोबॉन्ड का भुगतान (8 अप्रैल)।
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$1 बिलियन: UAE का एक अन्य हिस्सा (23 अप्रैल)।
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$450 मिलियन: पुराने द्विपक्षीय कर्ज की किस्त।
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विदेशी मुद्रा भंडार पर क्या होगा असर?
स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान (SBP) के ताज़ा आंकड़ों (3 अप्रैल 2026) के अनुसार, पाकिस्तान का कुल विदेशी मुद्रा भंडार $21.78 अरब है। इसमें से $16.38 अरब केंद्रीय बैंक के पास हैं। यदि पाकिस्तान इस महीने $4.8 बिलियन का भुगतान करता है, तो उसका भंडार गिरकर $17 अरब के नीचे आ जाएगा। इससे पाकिस्तानी रुपये के मूल्य में गिरावट और महंगाई बढ़ने का खतरा मंडरा रहा है।
विशेषज्ञों की राय
आर्थिक जानकारों का मानना है कि चालू वित्त वर्ष में पाकिस्तान को कुल $12 अरब के बाहरी जमा (External Deposits) के रोलोवर की जरूरत थी, जिसमें सऊदी अरब से $5 अरब और चीन से $4 अरब शामिल हैं। UAE द्वारा अचानक पैसा वापस मांगे जाने से चीन और सऊदी अरब पर भी दबाव बढ़ सकता है।
फिलहाल, पाकिस्तान सरकार UAE से बातचीत कर रही है कि इस नकदी के बदले वह पाकिस्तान की सरकारी कंपनियों (जैसे एयरलाइंस या ऊर्जा क्षेत्र) में सीधे निवेश (FDI) करे, ताकि देश से डॉलर बाहर न जाएं।
हाइलाइट्स:
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मध्य पूर्व संकट: अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण UAE ने अपनी नकदी सुरक्षित करने का फैसला किया।
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डेडलाइन: पाकिस्तान को 17 अप्रैल 2026 तक $2 बिलियन की बड़ी किस्त हर हाल में लौटानी होगी।
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आर्थिक दबाव: अप्रैल महीने में पाकिस्तान को कुल $4.8 बिलियन का विदेशी कर्ज चुकाना है।
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ब्याज का बोझ: पाकिस्तान इन जमा राशियों पर भारी-भरकम 6.5% की दर से ब्याज दे रहा था।
Matribhumisamachar


