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ज्योतिरादित्य सिंधिया ने हरित इस्पात हेतु टास्क फोर्स को मंजूरी प्रदान की

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नई दिल्ली (मा.स.स.). केंद्रीय इस्पात एवं नागर विमानन मंत्री ज्योतिरादित्य एम सिंधिया ने इस्पात मंत्रालय के अंतर्गत एकीकृत इस्पात संयंत्रों (आईएसपी) और माध्यमिक इस्पात उद्योग (एसएसआई) के लिए गठित दो सलाहकार समितियों की बैठकों की अध्यक्षता की। इस अवसर पर इस्पात और ग्रामीण विकास राज्य मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते, भारतीय इस्पात संघ के प्रतिनिधि, इस्पात उद्योग जगत के प्रमुख और शिक्षाविद भी शामिल हुए। इन सलाहकार समितियों का गठन अगस्त 2022 में किया गया, जो सभी हितधारकों को एक साथ लाने और इस्पात क्षेत्र से संबंधित प्रमुख मुद्दों पर विचार-विमर्श करने के लिए एक मंच के रूप में कार्य करती हैं।

एकीकृत इस्पात संयंत्र (आईएसपी) सलाहकार समिति के साथ 7वीं बैठक को संबोधित करते हुए, सिंधिया ने हरित इस्पात के रोडमैप को परिभाषित करने के लिए भागीदारी दृष्टिकोण को अपनाने पर बल दिया। उन्होंने यह भी कहा कि इस्पात मंत्रालय ने हरित इस्पात का उत्पादन करने के प्रत्येक पहलू के लिए कार्रवाई बिंदुओं की पहचान करने वाले 13 टास्क फोर्स के गठन को मंजूरी प्रदान की है। इस कदम से भारत में चिरस्थायी इस्पात निर्माण प्रथाओं और प्रौद्योगिकियों को अपनाने और विकास होने की संभावना है। यह न केवल इस्पात उद्योग के कार्बन फुटप्रिंट को कम करने में मदद करेगा बल्कि जलवायु परिवर्तन से निपटने की भारत की कोशिशों में भी अपना योगदान देगा।

सिंधिया ने दोहराया कि दुनिया के दूसरे सबसे बड़े इस्पात उत्पादक देश के रूप में भारत को हरित इस्पात अपनाकर सबसे ज्यादा जिम्मेदार बनने की आवश्यकता है और उन्होंने समिति को मिलकर काम करने के लिए कहा जिससे उद्योग के लिए आगे का रास्ता परिभाषित किया जा सके। टास्क फोर्स कच्चे माल, प्रौद्योगिकी और नीतिगत संरचना सहित हरित इस्पात उत्पादन के विभिन्न पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करेगी। उन्होंने कहा, “हम भारत में चिरस्थायी इस्पात निर्माण प्रथाओं को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इन टास्क फोर्स की स्थापना इन लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है” मंत्री ने कहा, “हमारा मानना है कि हरित इस्पात उत्पादन प्रथाओं को अपनाने से न केवल पर्यावरण को लाभ मिलेगा बल्कि रोजगार के नए अवसर और आर्थिक विकास भी सुनिश्चित होंगे।”

देश में कोकिंग कोयले की बढ़ती मांग पर बल देते हुए सिंधिया ने इस बात पर प्रकाश डाला कि इस्पात उत्पादकों को कोयला उत्पादन बढ़ाने के लिए अपनी वाशरी की क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता है और उन्होंने समूह को इस क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रेरित किया जिससे आयात पर हमारी निर्भरता कम हो सके। उन्होंने कोयले का आयात करने के लिए विविध और नए स्रोतों की खोज करने का भी सुझाव दिया। समिति ने मेड-इन-इंडिया इस्पात की ब्रांडिंग के अवसरों पर भी चर्चा की और यह आम सहमति बनी कि भारतीय इस्पात हेतु एक वैश्विक पहचान बनाने के लिए, प्रत्येक इस्पात उत्पाद के लिए सामान्य ब्रांडिंग पैरामीटर और दिशा-निर्देश तैयार करने की आवश्यकता है।

सिंधिया ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के इस्पात निर्यात बाजार में ब्रांड इंडिया को बढ़ावा देने वाले दृष्टिकाण को दोहराया। क्यूआर कोड के घटकों में उत्पाद का नाम, छह अंकों का एचएसएन कोड (जिसका उपयोग अंतर्राष्ट्रीय बेंचमार्किंग के लिए किया जाता है), इस्पात की ग्रेडिंग (भौतिक गुणों का उल्लेख), आयाम, वजन (टन में), एसकेयू और बैच आईडी, मिल मानदंड (उत्पत्ति निर्धारण नियम), निर्माण स्थल का पता, इनके ब्रांडिंग में शामिल किया जाएगा।

माध्यमिक इस्पात उद्योग (एसएसआई) समिति की चौथी बैठक में, पश्चिमी बाजारों में विशिष्ट इस्पात के निर्यात और देश में कबाड़ की उपलब्धता के ज्यादा स्रोतों की खोज करने की वकालत की गई और प्रस्तुति दी गई। इसके अलावा समिति द्वारा इस्पात के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना 2.0 की संभावना को तलाशने पर भी चर्चा की गई। पीएलआई 1.0 योजना के अंतर्गत, सरकार ने इस्पात क्षेत्र को एक नई गति प्रदान करने के लिए 6,322 करोड़ रुपये की मंजूरी प्रदान की है। इस्पात मंत्रालय ने उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के अंतर्गत विशिष्ट इस्पात के लिए 27 कंपनियों के साथ 57 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किया है। मंत्री ने समूह से आग्रह किया कि वह भारत को इस्पात विनिर्माण में वैश्विक लीडर बनाने के दृष्टिकोण के साथ पीएलआई 2.0 तैयार करने के लिए एकसाथ मिलकर काम करे।

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