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हम पहले मौजूदा संकट देखें, फिर सरकार से जवाबदेही की मांग करें : शशि थरूर

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

नई दिल्ली. जम्मू कश्मीर में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कड़े फैसले लिए हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी साफ कर चुके हैं कि पहलगाम हमले के गुनहगारों को उनकी कल्पना से भी बड़ी सजा दी जाएगी. पहलगाम आतंकी हमले को लेकर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी समेत तमाम विपक्षी दल इंटेलिजेंस फेलियर पर सवाल उठा रहे हैं. इन सवालों के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद शशि थरूर ने बड़ा बयान दिया है.

100 प्रतिशत पुख्ता खुफिया जानकारी किसी के पास नहीं हो सकती

शशि थरूर ने कहा कि किसी भी देश के पास कभी भी 100 प्रतिशत पुख्ता खुफिया जानकारी नहीं हो सकती. हम कभी भी उन कई आतंकी हमलों के बारे में नहीं जान पाएंगे जिन्हें सफलतापूर्वक विफल कर दिया गया था. हमें केवल उन हमलों के बारे में पता चलता है, जिन्हें हम विफल करने में असफल रहे. यह किसी भी देश में सामान्य बात है. मैं सहमत हूं कि विफलताएं थीं, लेकिन अभी हमारा मुख्य ध्यान उन पर नहीं होना चाहिए. कांग्रेस सांसद का मानना है कि हमें अभी सवाल नहीं उठाने चाहिए.

हमारे पास इजरायल का उदाहरण

तिरुवनंतपुरम में उन्होंने रविवार (27 अप्रैल, 2025) को पहलगाम हमले को लेकर कहा कि जाहिर है पूरी तरह से पुख्ता खुफिया जानकारी नहीं थी. जरूर कुछ फेलियर हुआ है. उन्होंने आगे कहा कि लेकिन हमारे पास इजरायल का भी उदाहरण है, जिसकी इंटेलिजेंस एजेंसी को दुनिया में सबसे पावरफुल माना जाता है और ये सभी मानते हैं कि उनके पास सबसे आधुनिक तकनीक है. उन्होंने आगे कहा कि इन सबके बावजदू इजरायल में 2 साल पहले 7 अक्टूबर को आश्चर्यजनक रूप से हमला हुआ. मुझे लगता है कि जिस तरह इजरायल युद्ध के अंत तक जवाबदेही की मांग करने का इंतजार कर रहा है, उसी तरह मुझे लगता है कि हमें भी मौजूदा संकट को देखना चाहिए और फिर सरकार से जवाबदेही की मांग करनी चाहिए.

साभार : एबीपी न्यूज

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।