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गुरुग्राम में ऐसे स्थान पर दी चर्च बनाने की अनुमति, जहाँ नहीं है एक भी ईसाई परिवार

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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गुरुग्राम. अरावली की गोद में बसे गांव टीकली में चर्च बनाए जाने के मामले ने गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) को कटघरे में खड़ा कर दिया है। इलाके में एक भी ईसाई परिवार नहीं होने के बाद भी किस आधार पर चर्च बनाने के लिए सीएलयू दे दिया गया। ग्रामीण से लेकर विश्व हिंदू परिषद के सदस्य तक यह जवाब सोमवार को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर मांगेंगे। सभी यह मान रहे हैं कि यदि चर्च बनाने की अनुमति नहीं दी जाती तो विवाद ही नहीं होता।

जानकारी के अनुसार, दिल्ली बाइबिल फेलोशिप (डीबीएफ) सेंट्रल द्वारा गांव टीकली मेंं चर्च का निर्माण किया जा रहा है। इसके लिए पांच साल पहले लगभग दो एकड़ जमीन खरीद गई थी। इसके बाद कृषि जोन की भूमि पर धार्मिक गतिविधियों के लिए संस्था ने जीएमडीए से सीएलयू हासिल किया।

एक भी ईसाई परिवार नहीं

बिल्डिंग प्लान स्वीकृत होने के बाद चर्च का निर्माण दो महीने पहले शुरू किया गया है। चर्च बनाए जाने की जानकारी सामने आने के बाद ग्रामीण विरोध कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उनके गांव में ही नहीं बल्कि आस-पास के इलाके में भी एक भी ईसाई परिवार नहीं। ऐसे में चर्च बनाना साजिश का हिस्सा है। जैसे देश के कई इलाकों में मतांतरण कराया जा रहा है, उसी तरह आशंका है कि इस इलाके में भी कराया जाएगा।

जीएमडीए ने किया था सीएलयू देने से इनकार

सूत्र बताते हैं कि जीएमडीए ने एक बार कृषि जोन भूमि पर चर्च बनाने के लिए सीएलयू देने से मना कर दिया था। जीएमडीए ने यहां तक कहा था कि आसपास के इलाके में ईसाई समुदाय के लोग नहीं हैं, ऐसे में चर्च बनाने की आवश्यकता क्यों? यही नहीं जीएमडीए ने कहा था कि चर्च बनने से इलाके में ट्रैफिक का दबाव बढ़ेगा। ग्रामीणों को यह समझ में नहीं आ रहा है कि बाद में फिर किस आधार पर सीएलयू दे दिया गया।

गांव के पूर्व सरपंच ब्रह़मदेव कहते हैं कि मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन के माध्यम से न केवल चर्च बनाने पर रोक लगाने की मांग की जाएगी बल्कि सीएलयू दिए जाने को लेकर भी सवाल किए जाएंगे। चर्च बनाए जाने पर मतांतरण कराए जाने की आशंका है। इससे माहौल खराब होगा। इस बारे में जीएमडीए के सीईओ पीसी मीणा से कई बार संपर्क करने का प्रयास किया गया लेकिन संपर्क नहीं हो सका।

“जिस इलाके में एक भी ईसाई परिवार नहीं, वहां पर चर्च बनाना कहीं से भी उचित नहीं है। यह सोची समझी साजिश का हिस्सा है। प्रशासन तत्काल प्रभाव से सीएलयू रद करे। सीएलयू रद होते ही चर्च बनाने का काम रुक जाएगा। इलाके के लोगों में रोष है। उन्हें चिंता है कि आगे मतांतरण कराया जाएगा। सीएलयू दिए जाने की भी जांच होनी चाहिए। एक बार सीएलयू देने से इनकार करने के बाद फिर किस आधार पर सीएलयू दिया गया।”

-यशवंत शेखावत, जिला मंत्री, विश्व हिंदू परिषद गुरुग्राम

साभार : दैनिक जागरण

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।