लखनऊ । शनिवार, 2 मई 2026
उत्तर प्रदेश के शिक्षा तंत्र में शुचिता लाने के लिए लागू की गई बायोमेट्रिक अटेंडेंस प्रणाली में एक बड़े भ्रष्टाचार का पर्दाफाश हुआ है। जौनपुर और बाराबंकी के मदरसों में जिस तरह से तकनीक का दुरुपयोग कर सरकारी धन की लूट की गई, उसने प्रशासन के होश उड़ा दिए हैं।
जौनपुर: बेटों के अंगूठे और शिक्षकों का वेतन
जौनपुर के मझगवा स्थित मदरसा अबरे रहमत में जालसाजी का एक अनोखा तरीका सामने आया। यहाँ के प्रबंधक ने अपने ही चार बेटों के अंगूठों के निशान बायोमेट्रिक मशीन में शिक्षकों के नाम पर रजिस्टर कर दिए थे। जब शिक्षक स्कूल नहीं आते थे, तो प्रबंधक के बेटे मशीन पर अंगूठा लगाकर उनकी उपस्थिति दर्ज कर देते थे। इस तरह महीनों तक बिना स्कूल आए शिक्षकों के खातों में सैलरी जाती रही।
बाराबंकी: 10 साल सात समंदर पार, फिर भी सरकारी ‘मलाई’ जारी
सबसे हैरान करने वाला मामला बाराबंकी के मदरसा इस्लामिया स्कूल मैलारेगंज का है। यहाँ शमशुद हूला खान नामक एक शिक्षक पिछले 10 वर्षों से ब्रिटेन (लंदन) में रह रहे थे।
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फर्जी हाजिरी: हैरानी की बात यह है कि उनकी बायोमेट्रिक उपस्थिति हर दिन दर्ज हो रही थी।
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पेंशन का खेल: आरोपी ने विदेश में रहते हुए ही कागजी कार्यवाही पूरी कर वीआरएस (VRS) ले लिया और अब वह सरकारी पेंशन भी डकार रहा था।
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प्रशासनिक कदम
इस खुलासे के बाद उत्तर प्रदेश मदरसा बोर्ड अब अपनी कार्यप्रणाली में बड़े बदलाव की तैयारी कर रहा है:
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आधार सीडिंग अनिवार्य: अब केवल अंगूठे के निशान नहीं, बल्कि आधार से जुड़े बायोमेट्रिक डेटा का मिलान रैंडम आधार पर किया जाएगा।
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फेस रिकॉग्निशन (Face Recognition): प्रशासन अब थंब इंप्रेशन के बजाय ‘फेस रिकॉग्निशन’ सिस्टम लाने पर विचार कर रहा है ताकि क्लोनिंग या फर्जीवाड़े की गुंजाइश न रहे।
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रिकवरी के आदेश: दोषी पाए गए शिक्षकों और प्रबंधकों से अब तक लिए गए वेतन की ‘ब्याज सहित वसूली’ के निर्देश दिए गए हैं।
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