सोमवार, मई 25 2026 | 04:17:29 PM
Breaking News
Home / व्यापार / नासिक TCS उत्पीड़न मामला: SIT ने कोर्ट में पेश की 1500 पन्नों की चार्जशीट, AIMIM पार्षद को समन जारी

नासिक TCS उत्पीड़न मामला: SIT ने कोर्ट में पेश की 1500 पन्नों की चार्जशीट, AIMIM पार्षद को समन जारी

Follow us on:

टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) नासिक कार्यालय की इमारत की सांकेतिक तस्वीर

नासिक सोमवार, 25 मई 2026

महाराष्ट्र के नासिक में स्थित टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) की बीपीओ (BPO) इकाई से जुड़ा कथित कार्यस्थल उत्पीड़न और जबरन धर्म परिवर्तन का हाईप्रोफाइल मामला इन दिनों पूरे राज्य में चर्चा का विषय बना हुआ है। नासिक पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) ने इस संवेदनशील मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए अदालत में अपनी पहली विस्तृत चार्जशीट दाखिल कर दी है। इसी के साथ, राजनीतिक गलियारों और पुलिस महकमे में हलचल तब और बढ़ गई जब छत्रपति संभाजीनगर से एआईएमआईएम (AIMIM) पार्षद मतीन पटेल को भी इस मामले में समन जारी किया गया।

आइए इस पूरे मामले के मुख्य घटनाक्रमों, पुलिस द्वारा जुटाए गए साक्ष्यों और कानूनी धाराओं के विस्तृत विवरण को निष्पक्ष रूप से समझते हैं।

1,500 पन्नों की चार्जशीट में गंभीर खुलासे

नासिक पुलिस की एसआईटी ने 22 मई को नासिक रोड स्थित अतिरिक्त सत्र एवं विशेष न्यायालय (विशेष सत्र न्यायाधीश केदार जोशी की अदालत) में 1,500 पन्नों का प्रारंभिक आरोपपत्र (Chargesheet) दाखिल किया।

यह चार्जशीट मूल रूप से 26 मार्च को नासिक के देवलाली कैंप पुलिस स्टेशन में एक महिला कर्मचारी की शिकायत पर दर्ज की गई पहली प्राथमिक (FIR) के आधार पर तैयार की गई है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए नासिक पुलिस आयुक्त संदीप कर्णिक ने सहायक पुलिस आयुक्त (अपराध) संदीप मिटके के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया था। इसके अलावा, मुंबई नाका पुलिस स्टेशन में टीसीएस कर्मचारियों द्वारा 8 अन्य एफआईआर भी दर्ज कराई गई हैं, जिनकी जांच अभी जारी है।

डिजिटल साक्ष्य और जबरन धर्म परिवर्तन का कट

पुलिस आयुक्त कार्यालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, एसआईटी ने इस मामले में पुख्ता तकनीकी और फोरेंसिक सबूत जुटाए हैं:

  • दस्तावेजों की जब्ती: पुलिस ने उन मूल सरकारी व निजी दस्तावेजों को जब्त कर लिया है, जिनका इस्तेमाल आरोपियों द्वारा कथित रूप से पीड़िता का नाम और धार्मिक पहचान बदलने के लिए किया जा रहा था।

  • डिजिटल सबूत: पीड़िता और आरोपियों के मोबाइल फोन से व्हाट्सएप चैट्स (WhatsApp Chats) के स्क्रीनशॉट और ईमेल ट्रेल्स बरामद किए गए हैं, जो कथित तौर पर सुनियोजित उत्पीड़न को दर्शाते हैं।

  • मजिस्ट्रेट के सामने बयान: मामले की मजबूती के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 183 के तहत 17 प्रमुख गवाहों के बयान सीधे न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज कराए गए हैं, जिनका कानूनी रूप से बहुत अधिक महत्व होता है।

AIMIM पार्षद मतीन पटेल को समन क्यों?

इस मामले में चार मुख्य आरोपियों—दानिश एजाज शेख, तौसीफ बिलाल अत्तार, निदा एजाज खान और मतीन माजिद पटेल के नाम शामिल हैं। अदालत ने इन सभी की जमानत याचिकाएं पहले ही खारिज कर दी हैं।

एआईएमआईएम नेता व पार्षद मतीन पटेल पर आरोप है कि जब महिला सह-आरोपी निदा खान एफआईआर दर्ज होने के बाद करीब 40 दिनों से फरार चल रही थी, तब मतीन पटेल ने उसे छत्रपति संभाजीनगर में कथित रूप से पनाह दी और पुलिस से छिपने में मदद की। इसी सिलसिले में तथ्यों की जांच के लिए एसआईटी ने मतीन पटेल को सोमवार को पूछताछ के लिए तलब किया है।

भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कड़क धाराएं

जांच के बाद एसआईटी ने चार्जशीट में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम (SC/ST Act) की कई गंभीर धाराओं को जोड़ा है:

बीएनएस (BNS) धारा अपराध का विवरण
धारा 64 बलात्कार (Rape)
धारा 68 कार्यस्थल या अधिकार प्राप्त व्यक्ति द्वारा यौन संबंध बनाना
धारा 69 धोखे से या शादी का झूठा वादा करके यौन संबंध बनाना
धारा 75 कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न (Sexual Harassment)
धारा 299 धार्मिक भावनाओं को आहत करने के इरादे से जानबूझकर किया गया दुर्भावनापूर्ण कार्य
धारा 61(2) आपराधिक साजिश (Criminal Conspiracy) में शामिल होना
धारा 238 और 249 अपराध के सबूत मिटाना और अपराधी को पनाह देना

विशेष नोट: नासिक पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह व्यक्तिगत कर्मचारियों के स्तर पर की गई कथित सुनियोजित आपराधिक साजिश का मामला है, इसके लिए टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) कंपनी को संस्थागत रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराया गया है। हालांकि, कार्यस्थल पर सुरक्षा व्यवस्था और आंतरिक शिकायतों (POSH) को लेकर इस घटना के बाद कई तरह के सवाल जरूर खड़े हुए हैं।

महत्वपूर्ण तथ्य

  • शुरुआती मीडिया रिपोर्ट्स में केवल यौन उत्पीड़न और छेड़छाड़ की बात कही जा रही थी, लेकिन एसआईटी द्वारा कोर्ट में दाखिल चार्जशीट में अब स्पष्ट रूप से बलात्कार (BNS धारा 64) और अधिकार क्षेत्र का गलत इस्तेमाल कर यौन शोषण (BNS धारा 68) जैसी संगीन धाराएं जोड़ी गई हैं।

  • अगला कदम: एसआईटी प्रमुख के अनुसार, यह देवलाली कैंप मामले की पहली चार्जशीट है। अन्य 8 मामलों में सबूतों के आधार पर आने वाले समय में पूरक चार्जशीट (Supplementary Chargesheet) भी दाखिल की जाएगी।

मित्रों,
मातृभूमि समाचार का उद्देश्य मीडिया जगत का ऐसा उपकरण बनाना है, जिसके माध्यम से हम व्यवसायिक मीडिया जगत और पत्रकारिता के सिद्धांतों में समन्वय स्थापित कर सकें। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए हमें आपका सहयोग चाहिए है। कृपया इस हेतु हमें दान देकर सहयोग प्रदान करने की कृपा करें। हमें दान करने के लिए निम्न लिंक पर क्लिक करें -- Click Here


* 1 माह के लिए Rs 1000.00 / 1 वर्ष के लिए Rs 10,000.00

Contact us

Check Also

कानपुर अनाज मंडी में गेहूं MSP के पार, दालों और तिलहन में उछाल: जानें क्या हैं आज के ताजा भाव

कानपुर । शनिवार, 23 मई 2026 उत्तर प्रदेश की प्रमुख व्यापारिक मंडियों में से एक …