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ईरान पर हमले को लेकर ट्रंप और स्टार्मर में ठनी: क्या खत्म हो रहा है अमेरिका-ब्रिटेन का ‘स्पेशल रिलेशनशिप’?

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डोनाल्ड ट्रंप और कीर स्टार्मर की हाथ मिलाते हुए पुरानी तस्वीर।

वॉशिंगटन. ईरान के खिलाफ हालिया अमेरिकी सैन्य कार्रवाई ने दुनिया के दो सबसे करीबी सहयोगियों—अमेरिका और ब्रिटेन—के बीच कूटनीतिक तनाव पैदा कर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की आलोचना करते हुए कहा है कि दोनों देशों के ऐतिहासिक ‘स्पेशल रिलेशनशिप’ का कमजोर होना “बेहद दुखद” है।

स्टार्मर की ‘हिचकिचाहट’ पर ट्रंप का कड़ा प्रहार

एक हालिया साक्षात्कार में राष्ट्रपति ट्रंप ने ब्रिटेन के रुख पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि ईरान पर हमलों के दौरान ब्रिटेन की शुरुआती हिचकिचाहट निराशाजनक थी। ट्रंप ने संकेत दिया कि प्रधानमंत्री स्टार्मर का निर्णय सैन्य रणनीति के बजाय घरेलू राजनीति और ब्रिटेन के मुस्लिम मतदाताओं को खुश करने की कोशिशों से प्रेरित हो सकता है।

ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा:

“अमेरिका को इस मिशन के लिए ब्रिटेन की सहायता की आवश्यकता नहीं थी, लेकिन एक पुराने और भरोसेमंद साथी का इस तरह दूरी बनाना अप्रत्याशित था। फिलहाल हमारे संबंध फ्रांस और जर्मनी जैसे यूरोपीय देशों के साथ अधिक मजबूत दिख रहे हैं।”

ब्रिटेन का पक्ष: ‘कानूनी आधार और स्पष्ट योजना’ अनिवार्य

प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि ब्रिटेन ने अमेरिका और इजरायल द्वारा तेहरान पर किए गए हमलों में प्रत्यक्ष रूप से हिस्सा नहीं लिया। स्टार्मर ने जोर देकर कहा कि किसी भी सैन्य कार्रवाई के लिए ठोस योजना और स्पष्ट कानूनी आधार होना जरूरी है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह बाहरी हस्तक्षेप के माध्यम से किसी देश में ‘शासन परिवर्तन’ (Regime Change) के पक्ष में नहीं हैं।

हालांकि, कूटनीतिक संतुलन बनाने की कोशिश में ब्रिटेन ने बाद में अमेरिकी सेना को अपने सैन्य ठिकानों के उपयोग की अनुमति दे दी, लेकिन इसे “सीमित और रक्षात्मक” उद्देश्यों तक ही सीमित रखा गया है।

व्हाइट हाउस संवाददाता रात्रिभोज में शामिल होंगे ट्रंप

अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच, घरेलू मोर्चे पर राष्ट्रपति ट्रंप ने एक बड़ा ऐलान किया है। वह 25 अप्रैल को आयोजित होने वाले White House Correspondents’ Dinner में बतौर ‘सम्मानित अतिथि’ शामिल होंगे।

यह ट्रंप के कार्यकाल का एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है, क्योंकि अपने पिछले कार्यकाल के दौरान उन्होंने लगातार इस कार्यक्रम का बहिष्कार किया था। 1924 में राष्ट्रपति केल्विन कूलिज द्वारा शुरू की गई इस परंपरा में ट्रंप का शामिल होना मीडिया के साथ उनके बदलते समीकरणों की ओर इशारा करता है।

विश्लेषकों की राय

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह तनाव बढ़ता है, तो इसका असर न केवल मध्य-पूर्व की सुरक्षा पर पड़ेगा, बल्कि नाटो (NATO) के भीतर पश्चिमी देशों के सामरिक तालमेल पर भी पड़ सकता है। ब्रिटेन के भीतर भी स्टार्मर के फैसले को लेकर राय बंटी हुई है; जहाँ कुछ इसे ‘संतुलित कूटनीति’ कह रहे हैं, वहीं विपक्ष इसे अमेरिका से दूरी बनाने की एक ‘रणनीतिक चूक’ मान रहा है।

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