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बिहार में गोशाला के नाम पर गोवंश की तस्करी का भंडाफोड़? वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने लिया संज्ञान

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बिहार के औरंगाबाद में खुले मैदान में बिना शेड और पानी के रखे गए गोवंश, जो अवैध तस्करी के आरोपों के घेरे में है।

पटना । रविवार, 17 मई 2026

बिहार के औरंगाबाद जिले से पशु क्रूरता और अवैध रूप से गोवंश को जमा कर उनकी खरीद-बिक्री करने का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर कुछ वीडियो और तस्वीरें तेजी से वायरल हो रही हैं, जिसमें एक बड़े खुले मैदान में सैकड़ों की संख्या में गोवंश को बेहद दयनीय स्थिति में देखा जा सकता है।

दावा किया जा रहा है कि इस जगह का इस्तेमाल गोवंश की अवैध तस्करी और अनधिकृत खरीद-बिक्री के लिए किया जा रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और पुलिस अब जांच में जुट गई है।

गोशाला के नाम पर छलावा: न शेड, न चारा, न पानी

पशु कल्याण और गोसेवा के लिए काम करने वाली प्रतिष्ठित संस्था ‘गो ग्यान फाउंडेशन’ ने इन वीडियो को जारी कर स्थानीय प्रशासन के दावों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। फाउंडेशन के अनुसार, स्थानीय प्रशासन इस जगह को ‘गोशाला’ बता रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है।

विजुअल्स में साफ देखा जा सकता है कि:

  • भीषण गर्मी और खुले आसमान के नीचे सैकड़ों गोवंश बिना किसी उचित शेड (छाया) के खड़े हैं।

  • मवेशियों के लिए चारे और पीने के साफ पानी की कोई व्यवस्था नजर नहीं आ रही है।

  • मौके पर कई बड़े ट्रकों की आवाजाही देखी गई है, जिसका इस्तेमाल कथित तौर पर इन पशुओं को अमानवीय तरीके से लाने और ले जाने के लिए किया जा रहा है।

‘गो ग्यान फाउंडेशन’ का बयान: “अगर यह प्रशासन की स्वीकृत गोशाला है, तो यहाँ बुनियादी सुविधाओं का इतना घोर अभाव क्यों है? पशुओं को इस तरह रखना सीधे तौर पर पशु क्रूरता निवारण अधिनियम का उल्लंघन है।”

अवैध पशु मेलों की आड़ में चल रहा है तस्करी का खेल!

स्थानीय सूत्रों और गो-रक्षकों का आरोप है कि औरंगाबाद के कुछ क्षेत्रों (जैसे संडा, शिवगंज और बारूण) में बिना वैध लाइसेंस के पूरे साल अवैध पशु मेले और बाजार संचालित किए जा रहे हैं।

संभावित सुधार और कानूनी बिंदु:

  • नियमानुसार किसी भी पशु मेले या बाजार को चलाने के लिए पशुपालन विभाग और स्थानीय निकाय से पूरे साल का वैध लाइसेंस होना अनिवार्य है।

  • मेला संचालकों के पास वर्तमान में कोई वैध कागजात नहीं हैं, इसके बावजूद रोजाना सैकड़ों गोवंश यहाँ पहुँच रहे हैं और उनकी धड़ल्ले से खरीद-बिक्री जारी है।

  • स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह पूरा नेटवर्क अंततः झारखंड और पश्चिम बंगाल के रास्ते अवैध कत्लखानों तक गोवंश की तस्करी करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।

जनता में आक्रोश, पुलिस ने कहा- “होगी सख्त कार्रवाई”

इतनी बड़ी गतिविधि खुलेआम होने के बावजूद स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की चुप्पी पर जनता ने गहरे सवाल उठाए थे। लोगों ने सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री और बिहार पुलिस को टैग करते हुए तत्काल छापेमारी करने, लाइसेंस की सत्यता जांचने और बेजुबान गोवंश को प्राधिकृत सुरक्षित स्थानों पर भेजने की मांग की थी।

मामले के तूल पकड़ने के बाद औरंगाबाद पुलिस ने आधिकारिक तौर पर संज्ञान लिया है। पुलिस प्रशासन की ओर से जारी बयान में कहा गया:

“सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और प्राप्त शिकायतों को गंभीरता से लिया गया है। मामले की विस्तृत जानकारी संबंधित विभाग के अधिकारियों को भेज दी गई है। अवैध गतिविधियों और पशु क्रूरता में संलिप्त पाए जाने वालों के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”

आगे की राह

औरंगाबाद जिला पिछले काफी समय से पशु तस्करों और गो-रक्षकों के बीच टकराव का केंद्र रहा है। इस मामले में निष्पक्षता के साथ निम्नलिखित सुधारात्मक कदमों की आवश्यकता है:

  1. त्वरित भौतिक सत्यापन: प्रशासन को तुरंत मजिस्ट्रेट स्तर की टीम भेजकर मौके पर मौजूद पशुओं का स्वास्थ्य परीक्षण कराना चाहिए।

  2. लाइसेंस की स्क्रूटनी: यदि संचालकों के पास पूरे साल का वैध लाइसेंस नहीं है, तो तत्काल प्रभाव से इस स्थल को सील किया जाना चाहिए।

  3. सुरक्षित पुनर्वास: जब्त किए गए सभी गोवंश को सरकारी अनुदान प्राप्त वास्तविक गोशालाओं में शिफ्ट किया जाए, जहाँ उनके भोजन और चिकित्सा की उचित व्यवस्था हो।

बेजुबान जानवरों के अधिकारों की रक्षा करना और कानून व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।

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