नई दिल्ली | शनिवार, 16 मई 2026
डिजिटल क्रांति के इस दौर में जहाँ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) हमारे कामों को आसान बना रहा है, वहीं इसका एक खतरनाक चेहरा भी सामने आ रहा है। हाल ही में सोशल मीडिया पर एक ऐसा ही मामला सामने आया है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों और आम जनता को चिंता में डाल दिया है। भारतीय सेना के पश्चिमी कमान के पूर्व जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ (GOC-in-C) लेफ्टिनेंट जनरल मनोज कुमार कटियार का एक कथित वीडियो इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है, जो पूरी तरह से फर्जी (Fake) है।
क्या है वायरल वीडियो का सच?
वायरल हो रहे इस वीडियो में बेहद संवेदनशील और भ्रामक दावा किया गया है। वीडियो में दिखाया गया है कि लेफ्टिनेंट जनरल कटियार कथित तौर पर यह कह रहे हैं कि “अफगान तालिबान को पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई के लिए भुगतान किया गया था और वे भारत की ओर से पाकिस्तान के खिलाफ लड़ रहे हैं।”
जैसे ही यह वीडियो सामने आया, इसकी संवेदनशीलता को देखते हुए तुरंत जांच शुरू की गई। फैक्ट-चेक और तकनीकी विशेषज्ञों की जांच में यह साफ हो गया है कि यह वीडियो पूरी तरह से एआई-जनरेटेड डीपफेक (AI-Generated Deepfake) है। रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल मनोज कुमार कटियार ने ऐसा कोई भी बयान नहीं दिया है। उनके पुराने वीडियो और ऑडियो में डिजिटल रूप से हेरफेर (Manipulate) करके इस फर्जी सामग्री को तैयार किया गया है।
डीपफेक वीडियो को कैसे पहचानें?
विशेषज्ञों के अनुसार, एआई द्वारा बनाए गए वीडियो या डीपफेक सामग्री कितनी भी सटीक क्यों न दिखे, उनमें कुछ तकनीकी खामियां रह जाती हैं जिन्हें ध्यान से देखने पर पकड़ा जा सकता है:
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चेहरे के हाव-भाव (Facial Expressions): असली इंसान की तुलना में डीपफेक वीडियो में चेहरे के भाव थोड़े अजीब या स्थिर लग सकते हैं।
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लिप-सिंक की कमी (Audio-Video Synchronization): वीडियो में व्यक्ति जो बोल रहा है, उसके होठों की हलचल और आवाज के बीच तालमेल (Sync) नहीं बैठता।
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पलकें झपकाना (Blinking Rate): कई बार डीपफेक वीडियो में एआई मॉडल पलकों के झपकने की स्वाभाविक गति को कॉपी नहीं कर पाते।
बढ़ते खतरे और हमारी जिम्मेदारी
यह कोई पहला मामला नहीं है जब किसी बड़ी हस्ती या सैन्य अधिकारी के नाम पर भ्रम फैलाने की कोशिश की गई हो। आज के समय में देश विरोधी तत्व और साइबर अपराधी समाज में अशांति और गलतफहमी पैदा करने के लिए ऐसी तकनीकों का सहारा ले रहे हैं।
ऐसी स्थिति में डिजिटल जागरूकता ही हमारा सबसे बड़ा हथियार है। अधिकारियों ने आम जनता से अपील की है कि:
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किसी भी वायरल वीडियो या सनसनीखेज दावे पर आंख मूंदकर भरोसा न करें।
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हमेशा आधिकारिक सरकारी स्रोतों या स्थापित समाचार माध्यमों से जानकारी की पुष्टि करें।
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बिना जांचे-परखे किसी भी संदिग्ध पोस्ट या वीडियो को आगे शेयर (Forward) न करें, क्योंकि ऐसा करना अनजाने में अफवाह फैलाने में मदद करना है।
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सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ऐसी भ्रामक पोस्ट दिखने पर तुरंत ‘Report’ करें।
Matribhumisamachar


