शनिवार, जुलाई 18 2026 | 04:44:40 PM
Breaking News
Home / अंतर्राष्ट्रीय / ईरान-पाकिस्तान सीमा पर फिर बढ़ा तनाव: IRGC का ‘जैश अल-जुल्म’ पर बड़ा एक्शन

ईरान-पाकिस्तान सीमा पर फिर बढ़ा तनाव: IRGC का ‘जैश अल-जुल्म’ पर बड़ा एक्शन

Follow us on:

इस्लामाबाद । गुरुवार, 23 अप्रैल 2026

ईरान और पाकिस्तान के बीच की 900 किलोमीटर लंबी सीमा एक बार फिर सुलग रही है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत के रास्क (Rask) इलाके में एक बड़े सैन्य ऑपरेशन को अंजाम दिया है। इस कार्रवाई में आतंकी संगठन ‘जैश अल-जुल्म’ (जिसे जैश अल-अदल भी कहा जाता है) की एक पूरी ऑपरेशनल टीम को खत्म करने का दावा किया गया है।

प्रमुख जानकारी 

अक्सर मीडिया में इन झड़पों को केवल ‘सीमा विवाद’ कहा जाता है, लेकिन इसकी जड़ें अधिक गहरी हैं:

  • लक्ष्य: IRGC का मुख्य उद्देश्य उस टीम को रोकना था जो हालिया हफ्तों में ईरानी सुरक्षा बलों पर हुए घात लगाकर किए गए हमलों के लिए जिम्मेदार थी।

  • हथियारों की बरामदगी: कार्रवाई के बाद भारी मात्रा में आधुनिक संचार उपकरण और विस्फोटक बरामद किए गए हैं, जो सीमा पार से आने वाले संगठित समर्थन की ओर इशारा करते हैं।

  • कूटनीतिक स्थिति: हालांकि तनाव बढ़ा है, लेकिन 2024 की मिसाइल स्ट्राइक के विपरीत, इस बार दोनों देश पर्दे के पीछे से बातचीत (Back-channel diplomacy) भी कर रहे हैं ताकि स्थिति पूर्ण युद्ध में न बदले।

मध्य पूर्व में बढ़ता सैन्य हस्तक्षेप और भारत पर प्रभाव

जैश अल-जुल्म: क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती

यह संगठन ईरान के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में सक्रिय एक सुन्नी चरमपंथी समूह है। ईरान इसे ‘जैश अल-जुल्म’ (अन्याय की सेना) कहता है क्योंकि यह निर्दोष नागरिकों और सुरक्षा कर्मियों को निशाना बनाता है। यह समूह बलूच राष्ट्रवाद और धार्मिक अतिवाद का मिश्रण है, जो सीमा के दोनों ओर अस्थिरता पैदा करता है।

क्षेत्रीय सुरक्षा पर इसके मायने

विशेषज्ञों के अनुसार, यह झड़प केवल दो देशों का मामला नहीं है। इसके परिणाम निम्नलिखित हो सकते हैं:

  1. चाबहार बंदरगाह की सुरक्षा: ईरान का चाबहार पोर्ट इस अशांत क्षेत्र के करीब है। यहाँ अस्थिरता भारत-ईरान व्यापारिक हितों को प्रभावित कर सकती है।

  2. शरणार्थी संकट: लगातार सैन्य कार्रवाई से सीमावर्ती गांवों से पलायन बढ़ सकता है।

  3. आतंकवाद पर दोहरा रुख: ईरान का दावा है कि पाकिस्तान अपनी धरती का इस्तेमाल रोकने में नाकाम रहा है, जबकि पाकिस्तान इन आरोपों को खारिज करता रहा है।

मित्रों,
मातृभूमि समाचार का उद्देश्य मीडिया जगत का ऐसा उपकरण बनाना है, जिसके माध्यम से हम व्यवसायिक मीडिया जगत और पत्रकारिता के सिद्धांतों में समन्वय स्थापित कर सकें। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए हमें आपका सहयोग चाहिए है। कृपया इस हेतु हमें दान देकर सहयोग प्रदान करने की कृपा करें। हमें दान करने के लिए निम्न लिंक पर क्लिक करें -- Click Here


* 1 माह के लिए Rs 1000.00 / 1 वर्ष के लिए Rs 10,000.00

Contact us

Check Also

होर्मुज जलडमरूमध्य का नक्शा और वहां से गुजरते तेल के टैंकर जहाज।

मिडिल ईस्ट में फिर भड़का युद्ध: अमेरिका के हवाई हमलों और ईरानी नाकाबंदी से दुनिया भर में संकट, भारत पर पड़ेगा भारी असर

वाशिंगटन । बुधवार, 15 जुलाई 2026 पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) एक बार फिर बारूद के …