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एलन मस्क का बड़ा धमाका: अंतरिक्ष में 10 लाख उपग्रह भेजने की तैयारी, क्या गायब हो जाएंगे तारे?

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पृथ्वी की कक्षा में चक्कर काटते हुए स्टारलिंक उपग्रहों का चित्रण।

वाशिंगटन | 24 मार्च, 2026

दुनिया के सबसे अमीर कारोबारी एलोन मस्क की कंपनी SpaceX ने अंतरिक्ष विज्ञान के इतिहास की सबसे महत्वाकांक्षी और विवादास्पद योजना पेश की है। स्पेसएक्स ने पृथ्वी की निचली कक्षा (LEO) में करीब 10 लाख नए उपग्रह भेजने का प्रस्ताव अमेरिकी नियामक संस्था FCC (Federal Communications Commission) को सौंपा है। इस योजना का उद्देश्य केवल इंटरनेट ही नहीं, बल्कि अंतरिक्ष में AI-पावर्ड डेटा सेंटर्स का एक विशाल जाल बिछाना है।

वैज्ञानिकों और खगोलविदों ने चेतावनी दी है कि यदि यह योजना हकीकत बनती है, तो आने वाले समय में रात का आकाश हमेशा के लिए बदल जाएगा और हमें तारों से ज्यादा कृत्रिम उपग्रह दिखाई देंगे।

प्रमुख अपडेट: 10,000 का आंकड़ा पार कर चुका है Starlink

ताजा आंकड़ों के अनुसार, स्पेसएक्स का स्टारलिंक नेटवर्क पहले ही 10,000 से अधिक सक्रिय उपग्रह अंतरिक्ष में स्थापित कर चुका है। कंपनी अब इस संख्या को 100 गुना तक बढ़ाने की तैयारी में है। मार्च 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में अंतरिक्ष में मौजूद कुल सक्रिय उपग्रहों में से लगभग 65% हिस्सा अकेले स्टारलिंक का है।

खगोलविदों की चिंता: “मानवता की विरासत पर हमला”

कनाडा के शोधकर्ताओं और रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी (RAS) ने इस प्रस्ताव को “असहनीय” बताया है।

  • दिखने वाले तारे vs उपग्रह: सामान्यतः साफ आसमान में हमें करीब 4,500 तारे दिखते हैं। सिमुलेशन बताते हैं कि 10 लाख उपग्रहों के बाद, रात के किसी भी समय हजारों उपग्रह नंगी आंखों से चलते हुए दिखाई देंगे।

  • आधी रात को भी चमक: ये नए उपग्रह ऊँची कक्षाओं में होंगे और सूरज की रोशनी को इस तरह परावर्तित करेंगे कि वे आधी रात को भी सितारों की तरह चमकते रहेंगे। इससे ब्रह्मांड का अध्ययन करने वाली विशाल दूरबीनों (जैसे Vera Rubin Observatory) का 10% से 30% डेटा खराब हो सकता है।

अंतरिक्ष मलबे और पर्यावरण पर गंभीर संकट

विशेषज्ञों ने इस मेगा-कॉन्स्टेलेशन से होने वाले ‘केसलर सिंड्रोम’ (Kessler Syndrome) की चेतावनी दी है, जहाँ उपग्रहों के आपस में टकराने से मलबे की ऐसी चेन-रिएक्शन शुरू हो सकती है जो भविष्य के सभी अंतरिक्ष मिशनों को रोक देगी।

  • धात्विक प्रदूषण: हर दिन सैकड़ों पुराने उपग्रह वायुमंडल में प्रवेश कर जलेंगे। इससे निकलने वाले एल्युमीनियम ऑक्साइड के कण ओजोन परत को नुकसान पहुँचा सकते हैं और पृथ्वी के वातावरण की केमिस्ट्री बदल सकते हैं।

  • स्पेस डेटा सेंटर: मस्क की योजना इन उपग्रहों को “फ्लोटिंग डेटा सेंटर्स” के रूप में इस्तेमाल करने की है, जो पृथ्वी पर बिजली की खपत और गर्मी को कम करने का तर्क देती है, लेकिन वैज्ञानिक इसे अंतरिक्ष में ऊष्मा प्रदूषण (Heat Pollution) बढ़ाने वाला कदम मान रहे हैं।

वैश्विक नियमों की कमी और विरोध

स्पेसएक्स ने तर्क दिया है कि वे इस योजना को चरणों में लागू करेंगे ताकि वायुमंडलीय प्रभावों की निगरानी की जा सके। हालांकि, अमेज़न (Amazon) जैसी प्रतिद्वंदी कंपनियों और अंतरराष्ट्रीय खगोल संघ (IAU) ने FCC से इस प्रस्ताव को खारिज करने की मांग की है। विशेषज्ञों का कहना है कि “अंतरिक्ष एक सीमित संसाधन है” और एक अकेली कंपनी को पूरी मानवता के साझा आकाश को प्रभावित करने का अधिकार नहीं मिलना चाहिए।

निष्कर्ष: स्पेसएक्स की यह योजना तकनीक और प्रकृति के बीच एक निर्णायक युद्ध की तरह है। क्या हमें हाई-स्पीड AI और इंटरनेट के लिए अपने पूर्वजों की विरासत यानी ‘तारों भरे आकाश’ का त्याग करना होगा? यह सवाल अब वैश्विक बहस का केंद्र बन गया है।

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