वाराणसी. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती एक बार फिर विवादों के केंद्र में हैं। बटुकों के साथ कथित कुकर्म के मामले में मुकदमे के वादी आशुतोष ब्रह्मचारी ने बुधवार को लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) के निरीक्षण भवन में एक प्रेस वार्ता आयोजित कर आरोपों की झड़ी लगा दी। इस दौरान उन्होंने न केवल स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद बल्कि आश्रम के उच्चाधिकारियों और सफेदपोश नेताओं पर भी गंभीर उंगली उठाई है।
आश्रम के CEO और VIP नेताओं की भूमिका संदिग्ध
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आशुतोष ब्रह्मचारी ने दावा किया कि यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कथित कुकर्म कांड में एक पूरा सिंडिकेट शामिल हो सकता है। वादी ने सीधे तौर पर निम्नलिखित नामों को संदिग्ध बताया:
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प्रकाश उपाध्याय (आश्रम के सीईओ)
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बालमुकुंदानंद
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स्वामी के गुरुभाई अरविंद
इसके अलावा, उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ शक्तिशाली राजनीतिक दलों के नेता और अन्य वीआईपी व्यक्ति भी इस प्रकरण में पर्दे के पीछे से शामिल हैं। वादी के अनुसार, उनके पास ऐसे ‘डिजिटल और भौतिक साक्ष्य’ मौजूद हैं, जो जांच में इन सभी की संलिप्तता सिद्ध कर सकते हैं।
विदेशी फंडिंग और राजनीतिक संरक्षण के आरोप
आशुतोष ब्रह्मचारी ने इस मामले में एक नया मोड़ देते हुए विदेशी फंडिंग का मुद्दा उठाया। उन्होंने मांग की कि केंद्रीय जांच एजेंसियों को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खातों और विदेशों से आने वाले धन की जांच करनी चाहिए।
सबसे चौंकाने वाला दावा उत्तर प्रदेश की राजनीति से जुड़ा रहा। वादी ने कहा, “मुझे जानकारी मिली है कि उत्तर प्रदेश के एक उप मुख्यमंत्री द्वारा इस मामले में आरोपियों को संरक्षण और सहयोग दिया जा रहा है।” हालांकि, नाम पूछे जाने पर उन्होंने फिलहाल चुप्पी साध ली, लेकिन यह जरूर कहा कि समय आने पर वह नाम का खुलासा भी करेंगे।
विद्यामठ (नरसिंहपुर) पर भी गंभीर आरोप
यह विवाद केवल वाराणसी तक सीमित नहीं है। आशुतोष ने मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर स्थित विद्यामठ में होने वाली गतिविधियों पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने मांग की है कि जांच का दायरा बढ़ाकर मध्य प्रदेश के ठिकानों पर भी छापेमारी की जानी चाहिए।
अब तक की कानूनी कार्रवाई और पक्ष
वर्तमान में, पुलिस इस मामले की जांच कर रही है। हालांकि, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थकों ने इन सभी आरोपों को ‘षड्यंत्र’ करार दिया है। आश्रम से जुड़े सूत्रों का कहना है कि यह स्वामी जी की छवि को धूमिल करने का एक सुनियोजित प्रयास है क्योंकि वह हिंदू धर्म और गौ-रक्षा जैसे मुद्दों पर प्रखर होकर बोलते रहे हैं।
मुख्य बिंदु जो जांच के घेरे में हैं:
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बटुकों द्वारा लगाए गए आरोपों की मेडिकल और फोरेंसिक पुष्टि।
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आश्रम के वित्तीय लेनदेन और विदेशी कनेक्शन।
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कथित रूप से प्रभावशाली लोगों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (CDR)।
अस्वीकरण: ये आरोप वादी द्वारा प्रेस वार्ता में लगाए गए हैं। इनकी आधिकारिक पुष्टि अभी लंबित है और मामला न्यायालय के अधीन है।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े इस प्रकरण ने धार्मिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। यदि आशुतोष ब्रह्मचारी के दावों में सच्चाई पाई जाती है, तो यह देश के सबसे बड़े धार्मिक संस्थानों में से एक के लिए बड़ा झटका होगा। फिलहाल, सभी की निगाहें पुलिस की स्टेटस रिपोर्ट और कोर्ट की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
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