नई दिल्ली | सोमवार, 30 मार्च 2026
भारत के आंतरिक सुरक्षा इतिहास में आज का दिन एक निर्णायक मोड़ के रूप में दर्ज किया गया। लोकसभा में “नक्सलवाद मुक्त भारत” पर हुई विशेष चर्चा का जवाब देते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने घोषणा की कि देश अब लगभग पूरी तरह से नक्सलवाद के अभिशाप से मुक्त हो चुका है। सरकार द्वारा तय की गई 31 मार्च 2026 की समयसीमा से एक दिन पहले ही सुरक्षाबलों ने इस लक्ष्य को जमीन पर उतार दिया है।
प्रमुख बिंदु: जो आपको जानना जरूरी है
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समय से पहले लक्ष्य: गृह मंत्री ने दावा किया कि देश के “रेड कॉरिडोर” को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया है।
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बस्तर का कायाकल्प: कभी नक्सलियों का अभेद्य किला रहा छत्तीसगढ़ का ‘बस्तर’ अब विकास का नया मॉडल बन रहा है।
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विचारधारा पर प्रहार: शाह ने स्पष्ट किया कि नक्सलवाद का अंत केवल हथियारों से नहीं, बल्कि विकास और शिक्षा से संभव हुआ है।
🛡️ ‘गोली का जवाब गोली से’ – दोहरी नीति का दिखा असर
सदन को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि मोदी सरकार की नीति बहुत स्पष्ट थी। उन्होंने कहा, “हमने बातचीत के दरवाजे हमेशा खुले रखे, लेकिन जो हथियार उठाकर निर्दोष आदिवासियों और जवानों का खून बहाते रहे, उन्हें सुरक्षाबलों ने उन्हीं की भाषा में जवाब दिया।” आंकड़ों के अनुसार, पिछले दो वर्षों में 300 से अधिक शीर्ष नक्सली कैडरों को ढेर किया गया है और 2,000 से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा को चुना है।
🌿 दंडकारण्य में अब गूंजता है ‘विकास’ का नारा
बस्तर और दंडकारण्य क्षेत्र की बदलती तस्वीर का जिक्र करते हुए गृह मंत्री ने बताया कि अब वहां स्कूल, बैंक और अस्पताल केवल कागजों पर नहीं, बल्कि गांवों के बीच स्थित हैं। उन्होंने कहा कि पहले नक्सली विकास के इन केंद्रों को बम से उड़ा देते थे ताकि जनता को गुमराह रखा जा सके, लेकिन अब स्थानीय आदिवासियों के सहयोग से सुरक्षाबलों ने उनके बुनियादी ढांचे को उखाड़ फेंका है।
🏛️ इतिहास और भविष्य की रूपरेखा
शाह ने 1970 के दशक के ‘नक्सलबाड़ी’ आंदोलन से लेकर 2004 के CPI (माओवादी) के गठन तक का उल्लेख किया। उन्होंने पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि इच्छाशक्ति की कमी के कारण यह समस्या 12 राज्यों में फैल गई थी।
“आज गर्व के साथ कह सकता हूँ कि कल (31 मार्च) के बाद भारत को आधिकारिक तौर पर नक्सल मुक्त घोषित करने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।” – अमित शाह (लोकसभा में)
🎖️ सुरक्षाबलों को सर्वोच्च सम्मान
गृह मंत्री ने इस ऐतिहासिक सफलता का श्रेय सीधे तौर पर CAPF, कोबरा कमांडो, राज्य पुलिस और DRG (डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड) के जवानों को दिया। उन्होंने उन शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की जिन्होंने तिरुपति से पशुपतिनाथ तक के इस ‘रेड कॉरिडोर’ को खत्म करने के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।
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