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भारत के 82% हाइपरटेंशन रोगियों का मानना है कि उनका हाई बीपी तनाव की वजह से है, डाइट के कारण नहीं: नया अध्ययन

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– देश भर में किए गए एक अध्ययन में हाई ब्‍लड प्रेशर से पीडि़त भारतीयों पर किए गए सर्वे से पता चला है कि चिकित्सा लेबल के पीछे एक तनाव-संचालित संकट छिपा हुआ है। अध्ययन में यह भी पता चला है कि 60% मरीज आयुर्वेदिक उपचार को लेकर राज़ी हैं

बेंगलुरु, कर्नाटक, भारत

कांतार द्वारा कराए गए सर्वे पर आधारित कपिवा के एक नए अध्ययन ने खुलासा किया है कि तनाव और नींद में बाधा उच्च रक्तचाप से पीड़ित भारतीयों के बीच प्रमुख चिंताओं के रूप में उभर रही हैं।

इंफोग्राफिक – उच्च रक्तचाप के 5 सबसे संभावित कारण

अध्ययन से पता चलता है कि भारत की सबसे आम पुरानी बीमारियों में से एक होने के बावजूद ज्यादातर मरीजों में यह लगातार नियंत्रण से बाहर बना हुआ है। यह अध्ययन 2026 में शहरी भारतीय उच्च रक्तचाप के साथ कैसे जी रहे हैं और वास्तव में क्या इसे बढ़ावा दे रहा है, उसकी स्पष्ट तस्वीर पेश करता है।

निष्कर्ष पारंपरिक मान्यताओं को चुनौती देते हैं। टियर-1 और टियर-2 शहरों के मरीजों से जब उनके हाई बीपी का कारण पूछा गया, तो 82% ने तनाव को मुख्य अनुभूत कारण बताया, जो आहार, आनुवंशिकी और उम्र को मिलाकर भी ऊपर रहा। वहीं, 10 लोगों में से लगभग 6 ने कहा कि खराब नींद रक्तचाप में उतार-चढ़ाव को ट्रिगर कर सकती है।

25 से 44 साल के युवा मरीजों में 43% ने अपने कार्यस्थल के तनाव को बहुत अधिक बताया। खराब नींद और ज्‍यादा तनाव, रक्तचाप के नियंत्रण से बाहर जाने के प्रमुख ट्रिगर्स के रूप में बराबर रहे, जिसका उल्लेख 59% लोगों ने किया। दस में से सात मरीज जो रक्तचाप के उतार-चढ़ाव का अनुभव करते हैं, वे इसे हर हफ्ते महसूस करते हैं।

शारीरिक प्रभाव भी काफी गंभीर है। 43% मरीजों को बार-बार सिरदर्द की शिकायत है, 29% चिंता और बेचैनी महसूस करते हैं, जबकि 18% को दिल की धड़कन तेज होने की समस्या है, जिनमें से लगभग आधे इसे असहनीय बताते हैं। ज्यादातर मरीजों के लिए उच्च रक्तचाप कोई ऐसी स्थिति नहीं है जो साल में दो बार डॉक्टर के पास जाकर प्रबंधित की जा सके। यह उनके दैनिक जीवन का हिस्‍सा बन चुका है।

इस बारे में कपिवा के फाउंडर और सीईओ अमीव शर्मा ने कहा, “अध्ययन एक बार फिर यह दिखाता है कि भारत में उच्च रक्तचाप केवल दिल से जुड़ी समस्या नहीं रह गई है, बल्कि इसका संबंध बढ़ते तनाव और बिगड़ती जीवनशैली से भी है। आंकड़े बताते हैं कि दवाइयों के साथ तनाव कम करना, बेहतर आदतें अपनाना और जीवनशैली में लगातार सुधार करना भी बेहद जरूरी हो गया है। कपिवा का मानना है कि किसी भी समाधान से पहले लोगों की वास्तविक समस्याओं को समझना जरूरी है। इसी सोच के साथ कंपनी अपने उत्पाद तैयार करती है, जो केवल बीमारी के नाम पर नहीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों और जीवनशैली को ध्यान में रखकर बनाए जाते हैं।”

अध्ययन में यह भी सामने आया कि प्रिस्क्रिप्शन दवाओं के साथ-साथ लोग प्राकृतिक और घरेलू उपायों का सहारा भी ले रहे हैं। करीब 35% उच्च रक्तचाप के मरीज अपनी नियमित दवाओं के साथ नींबू पानी, आंवला, लहसुन और अर्जुन छाल जैसे घरेलू उपायों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इनमें सबसे ज्यादा लोग नींबू पानी (71%), आंवला (57%), लहसुन (53%) और अर्जुन छाल (39%) को अपनाते हैं। हालांकि यह रुझान बढ़ रहा है, लेकिन इसे नियमित रूप से अपनाने में कई व्यावहारिक दिक्कतें भी सामने आई हैं। 34 प्रतिशत लोगों ने असुविधा और नियमितता बनाए रखने में परेशानी को बड़ी चुनौती बताया, जबकि 25 प्रतिशत लोगों ने माना कि वे इन आदतों को रोजाना जारी नहीं रख पाते।

सबसे अहम बात यह सामने आई कि 60% उच्च रक्तचाप के मरीज रक्तचाप नियंत्रित रखने के लिए आयुर्वेदिक जूस को आजमाने के इच्छुक हैं। युवा वर्ग में यह रुझान और भी मजबूत दिखा, जहां 25 से 44 वर्ष के 73% मरीजों ने ऐसे विकल्प अपनाने में रुचि दिखाई।

कपिवा के चीफ इनोवेशन ऑफिसर डॉ. आर. गोविंदराजन ने कहा, “आज हाइपरटेंशन सिर्फ उम्र से जुड़ी जीवनशैली की स्थिति नहीं रह गया है। हम तेजी से युवा भारतीयों में क्रॉनिक तनाव, खराब नींद, मानसिक थकान और हमेशा-ऑन लाइफस्टाइल के हृदय स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव को देख रहे हैं। अध्ययन के निष्कर्ष इस बात पर भी जोर देते हैं कि ब्‍लड प्रेशर को मैनेज करने के लिए एक समग्र दृष्टिकोण की जरूरत है, जिसमें तनाव प्रबंधन, पोषण, नींद की गुणवत्ता और दीर्घकालिक निरंतरता को इलाज के साथ-साथ उतना ही महत्व दिया जाए। कपिवा में हमारा फोकस पारंपरिक आयुर्वेदिक ज्ञान को मानकीकृत, रिसर्च-आधारित फॉर्मूलेशन्स के साथ जोड़ने पर रहा है, ताकि आधुनिक वेलनेस जरूरतों को अधिक सुलभ और अच्‍छे तरीके से पूरा किया जा सके।”

यह अध्ययन टियर-1 और टियर-2 शहरों — मुंबई, दिल्ली एनसीआर, बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई, कोलकाता, पुणे और अहमदाबाद — में फरवरी 2026 में किया गया। सर्वे में 303 के सैंपल साइज़ के साथ 25 से 65 वर्ष और उससे अधिक उम्र के पुरुषों तथा महिलाओं को बराबर प्रतिनिधित्व दिया गया।

नोट : मातृभूमि समाचार उपरोक्त दावों की पुष्टि या खंडन नहीं करता है. कृपया समस्या होने पर चिकित्सकीय सलाह लें.

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