मुंबई । मंगलवार, 23 जून 2026
महाराष्ट्र विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code – UCC), तीन तलाक कानून के क्रियान्वयन और मुस्लिम महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सदन में भारी हंगामा और तीखी बहस देखने को मिली। इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर सरकार की ओर से एक बड़ा नीतिगत फैसला सामने आया है। चर्चा का जवाब देते हुए गृह राज्यमंत्री योगेश कदम ने घोषणा की कि राज्य सरकार महाराष्ट्र में समान नागरिक संहिता लागू करने के विभिन्न पहलुओं का व्यावहारिक और कानूनी अध्ययन करने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन करेगी। यह समिति हाई कोर्ट के एक सेवानिवृत्त (रिटायर्ड) न्यायाधीश की अध्यक्षता में काम करेगी।
नियम 105 के तहत ध्यानाकर्षण (लक्षवेधी) सूचना पर हुई चर्चा
यह पूरा मामला भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की विधायक देवयानी फरांदे द्वारा नियम 105 के तहत सदन में प्रस्तुत की गई लक्षवेधी सूचना (ध्यानाकर्षण प्रस्ताव) के बाद चर्चा में आया। विधायक फरांदे ने मुस्लिम महिलाओं की सुरक्षा और उनके अधिकारों का मुद्दा उठाते हुए वर्तमान व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े किए।
देवयानी फरांदे ने सदन को संबोधित करते हुए कहा:
“केंद्र सरकार ने महिलाओं पर होने वाले अत्याचारों को रोकने और उन्हें लैंगिक न्याय दिलाने के उद्देश्य से तीन तलाक (Talaq-e-Biddat) पर प्रतिबंध लगाने वाला ऐतिहासिक कानून लागू किया है। इसके बावजूद, जमीनी हकीकत यह है कि महाराष्ट्र में इस कानून का प्रभावी क्रियान्वयन (Effective Implementation) नहीं हो पा रहा है।”
उन्होंने आगे दावा किया कि राज्य में मुस्लिम पुरुषों द्वारा एक से अधिक विवाह करने (बहुपत्नीत्व) के मामलों और महिलाओं को प्रताड़ित करने की घटनाओं में निरंतर वृद्धि देखी जा रही है। पतियों द्वारा महिलाओं पर जानलेवा हमलों के मामलों का हवाला देते हुए उन्होंने सरकार से मुस्लिम महिलाओं की सुरक्षा के लिए तत्काल कदम उठाने और इस विषय पर अपना स्टैंड स्पष्ट करने की मांग की।
सदन में तीखी बहस और विपक्ष की आपत्तियां
इस संवेदनशील मुद्दे पर चर्चा शुरू होते ही सत्तापक्ष और विपक्ष के सदस्य आमने-सामने आ गए। सदन की कार्यवाही के दौरान दो प्रमुख आपत्तियां दर्ज कराई गईं:
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ग्राह्यता (Admissibility) पर सवाल: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद चंद्र पवार) के वरिष्ठ विधायक जयंत पाटिल ने शुरुआत में ही इस लक्षवेधी सूचना की ग्राह्यता पर तकनीकी और कानूनी आपत्ति जताई। उन्होंने तर्क दिया कि यह विषय तय नियमों के दायरे में नहीं आता है। हालांकि, विधानसभा अध्यक्ष (Speaker) ने विपक्ष की इस आपत्ति को पूरी तरह से खारिज कर दिया और चर्चा को आगे बढ़ाने की अनुमति दी।
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समुदाय को निशाना बनाने का आरोप: चर्चा के दौरान विधायक सना मलिक ने देवयानी फरांदे के दावों का पुरजोर विरोध किया। सना मलिक ने कहा कि हालांकि बहुपत्नीत्व को इस्लाम में कुछ शर्तों के तहत मान्यता प्राप्त है, लेकिन यह प्रथा अन्य धर्मों और समुदायों में भी सामाजिक रूप से देखी जाती है। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसे में कानूनी सुधारों के नाम पर केवल एक विशिष्ट समुदाय को ही निशाना क्यों बनाया जा रहा है? इस बयान के बाद सदन में कुछ समय के लिए भारी हंगामा और सदस्यों के बीच तीखी नोकझोंक हुई।
हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज की समिति करेगी अध्ययन
सदन में मचे हंगामे और दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने के बाद गृह राज्यमंत्री योगेश कदम ने सरकार की ओर से आधिकारिक जवाब दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार महिलाओं की सुरक्षा और समान अधिकारों के मामले को अत्यंत गंभीरता से ले रही है।
सरकार की कार्ययोजना को साझा करते हुए उन्होंने घोषणा की:
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एक सदस्यीय विशेषज्ञ समिति: महाराष्ट्र में समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू करने की संभावनाओं, सामाजिक प्रभावों और कानूनी बारीकियों का बारीकी से अध्ययन करने के लिए उच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश के नेतृत्व में एक सदस्यीय समिति का गठन किया जाएगा।
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रिपोर्ट के बाद अंतिम निर्णय: यह समिति समाज के विभिन्न वर्गों, कानूनी विशेषज्ञों और सरोकारों का अध्ययन कर अपनी विस्तृत रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगी। इस रिपोर्ट के निष्कर्षों के आधार पर ही सरकार राज्य में समान नागरिक संहिता को लेकर अगला कदम और अंतिम निर्णय लेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तराखंड द्वारा यूसीसी लागू किए जाने के बाद, महाराष्ट्र सरकार का यह कदम देश के अन्य बड़े राज्यों में समान नागरिक संहिता की दिशा में एक प्रशासनिक और कानूनी जमीन तैयार करने की कोशिश है।
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