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सतना: झखौरा गांव में धर्म परिवर्तन की कोशिश का आरोप, ग्रामीणों के हंगामे के बाद पुलिस जांच शुरू

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भोपाल. मध्य प्रदेश के सतना जिले के झखौरा गांव में एक बार फिर धर्मांतरण का विवाद गर्मा गया है। आरोप है कि गांव के कुछ घरों में प्रार्थना सभा की आड़ में भोले-भले ग्रामीणों को लालच देकर धर्म परिवर्तन कराने का प्रयास किया जा रहा था। इसकी सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीणों और हिंदू संगठनों ने मौके पर पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया।

क्या है पूरा मामला?

मिली जानकारी के अनुसार, झखौरा गांव के एक निजी आवास में पिछले कुछ समय से बाहरी लोगों का आना-जाना बढ़ गया था। स्थानीय ग्रामीणों का दावा है कि रविवार को वहां एक विशेष सभा आयोजित की गई थी, जिसमें लोगों को चंगाई (बीमारी ठीक करने) और आर्थिक मदद का प्रलोभन देकर दूसरे धर्म के प्रति प्रेरित किया जा रहा था।

ग्रामीणों का भारी हंगामा

जैसे ही इस बात की खबर गांव में फैली, ग्रामीण आक्रोशित हो गए। मौके पर पहुंचे हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी शुरू कर दी और सभा को बंद करा दिया। स्थिति तनावपूर्ण होते देख स्थानीय पुलिस को सूचना दी गई, जिसके बाद पुलिस बल मौके पर पहुंचा और स्थिति को नियंत्रित किया।

पुलिस की कार्रवाई

पुलिस ने इस मामले में संदिग्धों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। कोलगवां थाना पुलिस के अनुसार:

  • शिकायत के आधार पर मामले की जांच की जा रही है।

  • सभा में मौजूद साहित्य और अन्य सामग्रियों को जब्त किया गया है।

  • मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम के तहत मामला दर्ज करने की प्रक्रिया जारी है।

प्रशासन की अपील

जिला प्रशासन और पुलिस ने ग्रामीणों से शांति बनाए रखने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी व्यक्ति को कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं है और यदि धर्मांतरण की पुष्टि होती है, तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

‘चंगाई सभा’ का स्वरूप और तरीका

ग्रामीणों के अनुसार, कथित तौर पर गांव के एक कच्चे मकान में टेंट लगाकर सभा की जा रही थी। इसमें दूर-दराज के गांवों से भी गरीब तबके के लोगों को बुलाया गया था। आरोप है कि “पवित्र जल” के छिड़काव और विशेष प्रार्थना के माध्यम से गंभीर बीमारियों (जैसे कैंसर, लकवा और मानसिक रोग) को ठीक करने का दावा किया जा रहा था।

आर्थिक प्रलोभन के आरोप

स्थानीय लोगों का दावा है कि धर्मांतरण के बदले कुछ परिवारों को निम्नलिखित प्रलोभन दिए गए:

  • बच्चों की पढ़ाई का पूरा खर्च उठाना।

  • पक्का मकान बनवाने में आर्थिक सहायता।

  • घर के एक सदस्य को रोजगार दिलाना।

पकड़े गए संदिग्धों का विवरण

बताया जा रहा है कि इस सभा का संचालन करने वाले मुख्य व्यक्ति स्थानीय नहीं थे। वे पड़ोसी जिले (जैसे रीवा या जबलपुर) या बाहरी राज्यों से आए थे। पुलिस उनके ‘फंडिंग सोर्स’ की भी जांच कर रही है कि आखिर इन सभाओं के आयोजन के लिए पैसा कहां से आ रहा है।

साक्ष्य के रूप में जब्त सामग्री

पुलिस ने मौके से कुछ संदिग्ध सामग्री बरामद की है, जिसमें शामिल हैं:

  • विशिष्ट धार्मिक साहित्य और पर्चे।

  • रजिस्टर, जिसमें सभा में आने वाले लोगों के नाम और मोबाइल नंबर दर्ज थे।

  • साउंड सिस्टम और प्रोजेक्टर, जिसका उपयोग ‘चमत्कार’ दिखाने वाले वीडियो चलाने के लिए किया जा रहा था।

स्थानीय जन प्रतिनिधियों की प्रतिक्रिया

क्षेत्र के सरपंच और अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि गांव की सामाजिक समरसता को बिगड़ने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि गांव में अनजान बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश पर सख्त निगरानी रखी जाए।

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