नई दिल्ली. भारत का ‘आधार’ (Aadhaar) आज केवल एक पहचान पत्र नहीं, बल्कि दुनिया की सबसे शक्तिशाली और सुरक्षित बायोमेट्रिक प्रणाली बन चुका है। हाल ही में संसद में पेश किए गए आंकड़ों ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। देश में आधार के सक्रिय उपयोगकर्ताओं की संख्या 134 करोड़ को पार कर गई है, जो इसे वैश्विक स्तर पर सबसे व्यापक डिजिटल पहचान नेटवर्क बनाती है।
📱 17,000 करोड़ ऑथेंटिकेशन: सरकारी और निजी सेवाओं की लाइफलाइन
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने लोकसभा में एक लिखित जवाब के दौरान बताया कि आधार अब भारतीयों की दैनिक जरूरतों का हिस्सा बन चुका है। अब तक आधार के जरिए 17,000 करोड़ से अधिक ऑथेंटिकेशन ट्रांजैक्शन किए जा चुके हैं। इसका सीधा मतलब है कि बैंक खाता खोलने से लेकर राशन लेने और सिम कार्ड खरीदने तक, हर जगह आधार ने प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बना दिया है।
🤖 अब AI और मशीन लर्निंग से होगी पहचान: ‘फेस ऑथेंटिकेशन’ का जादू
आधार को और अधिक सुरक्षित बनाने के लिए सरकार अब इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) का बड़े पैमाने पर उपयोग कर रही है।
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फेस ऑथेंटिकेशन: अब आपको फिंगरप्रिंट देने की भी जरूरत नहीं होगी। AI आधारित फेस ऑथेंटिकेशन से बुजुर्गों और उन लोगों को बड़ी राहत मिलेगी जिनके फिंगरप्रिंट समय के साथ घिस जाते हैं।
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सटीकता: तकनीक के इस्तेमाल से फ्रॉड और डुप्लीकेट पहचान की गुंजाइश खत्म हो गई है।
🔐 सुरक्षा का ‘डबल लेयर’ कवच: AUA और KUA
आपकी जानकारी सुरक्षित रहे, इसके लिए सरकार ने कड़े नियम बनाए हैं। आधार सेवाओं का उपयोग करने वाली किसी भी संस्था को Authentication User Agency (AUA) या KYC User Agency (KUA) के रूप में UIDAI के पास पंजीकरण कराना अनिवार्य है। बिना अनुमति के कोई भी संस्था आपका आधार डेटा एक्सेस नहीं कर सकती।
📊 आधार 2.0: मुख्य आकर्षण (Key Highlights)
| श्रेणी | ताज़ा आंकड़े / जानकारी |
| सक्रिय उपयोगकर्ता | 134 करोड़+ |
| कुल ट्रांजैक्शन | 17,000 करोड़ से अधिक |
| प्रमुख तकनीक | AI और ML आधारित फेस ऑथेंटिकेशन |
| सत्यापन के तरीके | OTP, फिंगरप्रिंट, आइरिस और फेस स्कैन |
| अनिवार्यता | संस्थाओं के लिए AUA/KUA रजिस्ट्रेशन जरूरी |
💡 आम जनता को क्या होगा फायदा?
आधार के इस विस्तार से ‘डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर’ (DBT) में तेजी आई है, जिससे बिचौलियों का खात्मा हुआ है। इसके साथ ही, सरकारी योजनाओं का लाभ अब बिना किसी देरी के सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में पहुंच रहा है। आधार का यह सफर ‘डिजिटल इंडिया’ के सपने को सच करने की दिशा में सबसे बड़ा कदम है।
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