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मुझे दिया उद्धव ठाकरे का प्रस्ताव अपरिपक्व और हास्यास्पद : नितिन गडकरी

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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मुंबई. देश में लोकसभा चुनाव को लेकर सरगर्मियां बढ़ी हुई हैं। इस बीच, केंद्रीय गृहमंत्री नितिन गडकरी ने शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे के न्योते को हास्यास्पद बताते हुए ठुकरा दिया है। उन्होंने राज्य के पूर्व सीएम पर पलटवार करते हुए कहा कि उन्हें इस बात की चिंता करने की जरूरत नहीं है कि भाजपा किसे मैदान में उतारती है। इससे पहले, उद्धव ठाकरे ने गडकरी को महा विकास अघाड़ी में शामिल होने और विपक्ष के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ने की पेशकश की थी।

उद्धव का बयान अपरिपक्व और हास्यास्पद

उद्धव ठाकरे के बयान को अपरिपक्व और हास्यास्पद बताते हुए मंगलवार को नितिन गडकरी ने कहा कि भाजपा ने चुनावों के लिए उम्मीदवारों के चयन को लेकर एक प्रणाली बना रखी है और उसी के अनुसार काम होता है। इस दौरान नितिन गडकरी ने भरोसा जताया कि आगामी लोकसभा चुनावों में भाजपा नीत राजग को 400 से अधिक सीटें मिलेंगी। उन्होंने द्वारका एक्सप्रेसवे के 19 किलोमीटर लंबे हरियाणा खंड के उद्घाटन के बारे बात करते हुए ये टिप्पणी की।

द्वारका एक्सप्रेसवे अत्याधुनिक परियोजना

इस दौरान केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने द्वारका एक्सप्रेसवे के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ये एक अत्याधुनिक परियोजना है। सरकार ने इसमें अनुबंध देने में अनुमान के मुकाबले निर्माण लागत में 20 प्रतिशत की बचत की है। उन्होंने यह भी कहा कि  दिल्ली और इसके आसपास के इलाकों में सड़कों, राजमार्गों और एक्सप्रेसवे के निर्माण के लिए 65,000 करोड़ रुपये की परियोजनाएं हैं। इनमें से 35,000 करोड़ रुपये की परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं और बाकी दिसंबर तक पूरी हो जाएंगी।

 उद्धव ने दिया था ये न्योता

इससे पहले शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने गडकरी को महा विकास अघाड़ी में शामिल होने और विपक्ष के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ने की पेशकश की थी। बीते सप्ताह एक रैली में बोलते हुए ठाकरे ने कहा था कि गडकरी को ‘महाराष्ट्र की ताकत’ दिखानी चाहिए। उन्हें दिल्ली के सामने झुकने के बजाय इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा था कि ऐसे में हम उन्हें एमवीए से उम्मीदवार बनाएंगे।

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साभार : अमर उजाला

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।