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महबूबा मुफ्ती ने की हमले रोक पाकिस्तान से बातचीत की अपील

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

जम्मू. पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने एक बार फिर पाकिस्तान के समर्थन में राग आलापना शुरू कर दिया है। भारतीय सेना ने एक तरफ पहलगाम आतंकी हमले की जवाबी कार्रवाई करते हुए ऑपरेशन सिंदूर चलाकर पाकिस्तान में आतंकियों के 9 ठिकानों को ध्वस्त कर दिया। वहीं दूसरी तरफ जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री दोनों देशों को संयम बरतने की सलाह दे रही हैं। यहां तक कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से शत्रुता समाप्त करने के लिए बातचीत का विकल्प चुनने की अपील की। एक्स पर मुफ्ती ने कहा कि 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए विनाशकारी हमले ने भारत-पाकिस्तान संबंधों को खतरनाक रूप से तबाही के कगार पर पहुंचा दिया है। दोनों ही देशों में महिलाओं और बच्चों को काफी नुकसान हुआ है। बढ़ते तनाव के साथ-साथ लोगों की जान भी जोखिम में है।

बातचीत करने की अपील

उन्होंने कहा, ‘मैं विशेष रूप से भारत के प्रधानमंत्री से शत्रुता समाप्त करने के लिए बातचीत का विकल्प चुनने की अपील करती हूं। अब, पहले से कहीं अधिक शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और सहभागिता ही हमारा एकमात्र साधन होना चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल ईमानदार और निरंतर प्रयासों के माध्यम से ही हम तनाव को कम कर सकते हैं और शांति बहाल करने का कठिन काम शुरू कर सकते हैं।

इससे पहले भी अलापा था पाकिस्तान का राग

ऐसा पहली बार नहीं है जब महबूबा मुफ्ती ने पाकिस्तान की सराहना की है। इससे पहले अपने पिता दिवंगत मुफ्ती मोहम्मद सईद की पुण्यतिथि पर भी उन्होंने पाकिस्तान की सराहना की थी। उन्होंने 8 जनवरी को कहा था कि पीडीपी जम्मू-कश्मीर और गुलाम जम्मू-कश्मीर के बीच के सभी रास्ते खोलने, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और सभी विवादास्पद मुद्दों के शांतिपूर्ण समाधान की पक्षधर है। महबूबा के नेतृत्व में पीडीपी नेताओं व कार्यकर्ताओं ने मुफ्ती के कश्मीर मिशन को आगे बढ़ाने का संकल्प भी दोहराया था।

साभार : दैनिक जागरण

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।