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केन्या के पूर्व प्रधानमंत्री रैला ओडिंगा का हार्ट अटैक से भारत में निधन

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

नई दिल्ली. केन्या के पूर्व प्रधानमंत्री रैला ओडिंगा की बुधवार 15 अक्टूबर 2025 की सुबह केरल के कूथाट्टुकुलम में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया. 80 साल के रैला ओडिंगा आयुर्वेदिक उपचार के लिए केरल आए थे. अचानक तबीयत बिगड़ने पर  उन्हें श्रीधरेयम आयुर्वेदिक नेत्र चिकित्सालय और अनुसंधान केंद्र ले जाया गया, हालांकि उन्हें बचाया नहीं जा सका. पूर्व पीएम के पार्थिव शरीर को कूथाट्टुकुलम के देवा मठ अस्पताल में रखा गया है.

कैसे हुआ निधन?

बता दें कि ओडिंगा 6 दिन पहले अपनी बेटी और करीबी परिवार के सदस्यों के साथ कूथाट्टुकुलम पहुंचे थे. वह अस्पताल में अपना रेगुलर चेकअप करवाने के साथ ही नियमित सुबह की सैर वाली दिनचर्या का पालन कर रहे थे. स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक सुबह लगभग 6 बजकर 30 मिनट पर सैर के दौरान उन्हें दिल का दौरा पड़ा. उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया. बता दें कि ओडिंगा 4 दशकों से भी ज्यादा समय तक केन्याई राजनीति में प्रमुख चेहरा रहे थे.

केन्याई राजनीति का प्रमुख चेहरा रहे ओडिंगा

केन्याई राजनीति में एक प्रमुख चेहरा रहे ओडिंगा ने साल 2008-2013 तक देश के प्रधानमंत्री के रूप में काम किया. वे अपने जोशीले भाषणों और जमीनी स्तर पर जुड़ाव के लिए जाने जाते थे. मॉडर्न केन्याई डेमोक्रोसी को आकार देने में उनका बड़ा योगदान था. ओडिंगा ने साल 2007-2008 के चुनाव के दौरान पावर शेयरिंग एग्रीमेंट में मुख्य भूमिका निभाई थी, जिससे केन्या में हिंसा समाप्त हुई थी. वह ऐसे राष्ट्रीय नेता के रूप में उभरे, जिन्होंने संवाद और सुधार की वकालत की.

दूतावास को दी जानकारी

बता दें कि ओडिंगा लंबे समय तक विपक्षी नेता और ऑरेंज डेमोक्रेटिक मूवमेंट के प्रमुख भी रहे हैं. उन्होंने कई राष्ट्रपति चुनाव लड़े थे. वह केन्या के सबसे प्रमुख राजनीतिक हस्तियों में से एक माने जाते हैं. ओडिंगा का करियर भीषण राजनीतिक संघर्षों और एक अधिक समावेशी राजनीतिक व्यवस्था के निर्माण के प्रयासों से भरा रहा. नई दिल्ली स्थित केन्याई दूतावास के अधिकारियों को ओरिंगा के निधन की सूचना दे दी गई है. पार्थिव शरीर को केन्या भेजने के लिए केरल सरकार और अस्पताल के अधिकारी दूतावास के साथ कॉर्डिनेट कर रहे हैं. स्थानीय नेताओं और केन्याई प्रवासी समुदाय के सदस्यों ने उनके निधन पर शोक और शोक व्यक्त किया है.

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साभार : जी न्यूज  

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।