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मौलाना जर्जिश अंसारी के ‘लोमड़ी’ वाले बयान पर मचा बवाल, यूपी बनाम बंगाल की बहस तेज

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लखनऊ | रविवार, 3 मई 2026

उत्तर प्रदेश के इटावा के चर्चित मौलाना जर्जिश अंसारी एक बार फिर अपनी विवादित तकरीर (भाषण) को लेकर सुर्खियों में हैं। हाल ही में वायरल हुए एक वीडियो में मौलाना को पश्चिम बंगाल के मुस्लिमों को संबोधित करते हुए सुना जा सकता है। उन्होंने बंगाल के लोगों को यूपी और बिहार के मुस्लिमों की स्थिति का हवाला देकर आगाह किया और ‘हिकमत’ (सूझबूझ) से काम लेने की सलाह दी। यह वीडियो इटावा का बताया जा रहा है।

प्रमुख बयान: “लोमड़ी बन जाओ, वरना शेर खा जाएगा”

मौलाना जर्जिश अंसारी ने अपने संबोधन में कुछ बेहद संवेदनशील शब्दों का प्रयोग किया। उनके भाषण के मुख्य अंश इस प्रकार हैं:

  • यूपी का डर: मौलाना ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में अब धार्मिक कार्यक्रमों (जलसों) के लिए अनुमति मिलना मुश्किल हो गया है और 10 बजे के बाद माइक के इस्तेमाल पर सख्त पाबंदी है।

  • अजीबोगरीब सलाह: उन्होंने बंगाल के मुस्लिमों से कहा, “बिहार और यूपी वालों का अंजाम देखकर तुम थोड़ी देर के लिए लोमड़ी बन जाओ।” उन्होंने तर्क दिया कि चालाकी से काम लेकर ही आने वाले वक्त में “शेर” के जुल्मों से बचा जा सकता है।

  • नाम लिए बिना निशाना: हालांकि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका इशारा उत्तर प्रदेश की सत्ता की ओर था। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अगर वह “शेर” का नाम लेंगे तो उन्हें जेल जाना पड़ सकता है।

यूपी में धार्मिक आयोजनों के लिए नए प्रशासनिक नियम – मातृभूमि समाचार

ताजा जानकारी (Latest Updates)

सोशल मीडिया पर चल रही खबरों के विपरीत, प्रशासन और स्थानीय लोगों ने मौलाना के दावों पर कुछ स्पष्टीकरण दिए हैं:

  1. कानून का पालन: यूपी प्रशासन का कहना है कि लाउडस्पीकर और कार्यक्रमों की अनुमति के नियम सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के दिशानिर्देशों के तहत हैं, जो सभी धर्मों पर समान रूप से लागू होते हैं।

  2. मुस्लिम समुदाय की प्रतिक्रिया: कई मुस्लिम बुद्धिजीवियों ने मौलाना के बयान से असहमति जताई है। उनका कहना है कि यूपी में नागरिक सुरक्षित हैं और “लोमड़ी” जैसे शब्दों का प्रयोग समुदाय को अपमानित करने जैसा है।

सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया

वीडियो वायरल होने के बाद ट्विटर (X) और फेसबुक पर तीखी बहस छिड़ गई है। जहाँ कुछ लोग इसे अभिव्यक्ति की आजादी और हकीकत बता रहे हैं, वहीं बड़ी संख्या में लोग इसे सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश मान रहे हैं।

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