मुंबई. भारतीय इस्पात उद्योग (Steel Industry) की दिग्गज कंपनियों—टाटा स्टील (Tata Steel), जेएसडब्ल्यू स्टील (JSW Steel) और सरकारी कंपनी सेल (SAIL)—की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) की एक गोपनीय जांच रिपोर्ट में इन कंपनियों सहित कुल 28 फर्मों को स्टील की कीमतें तय करने के लिए आपस में मिलीभगत (Cartelization) करने का दोषी पाया गया है।
प्रमुख बिंदु: जांच में क्या आया सामने?
मिलीभगत का आरोप: रिपोर्ट के अनुसार, इन कंपनियों ने साल 2015 से 2023 के बीच आपस में साठगांठ कर स्टील की कीमतें कृत्रिम रूप से बढ़ाईं और उत्पादन पर नियंत्रण रखा।
दिग्गज अधिकारियों पर गाज: सीसीआई ने जेएसडब्ल्यू के प्रबंध निदेशक सज्जन जिंदल, टाटा स्टील के सीईओ टी.वी. नरेंद्रन और सेल के चार पूर्व चेयरपर्शन सहित कुल 56 वरिष्ठ अधिकारियों को इस सांठगांठ के लिए जिम्मेदार ठहराया है।
व्हाट्सएप चैट बने सबूत: जांच में क्षेत्रीय उद्योग समूहों के बीच आदान-प्रदान किए गए व्हाट्सएप संदेशों को महत्वपूर्ण सबूत माना गया है, जो कीमतों में हेरफेर और उत्पादन में कटौती की ओर इशारा करते हैं।
भारी जुर्माना संभव: नियमों के मुताबिक, दोषी पाए जाने पर सीसीआई कंपनी के कुल मुनाफे का 3 गुना या सालाना टर्नओवर का 10% तक जुर्माना लगा सकता है।
कैसे शुरू हुई जांच?
यह पूरा मामला 2021 में तब शुरू हुआ जब ‘कोयंबटूर कॉर्पोरेशन कॉन्ट्रैक्टर्स वेलफेयर एसोसिएशन’ ने आरोप लगाया कि स्टील कंपनियों ने महज छह महीने में कीमतों में 55% की बढ़ोतरी कर दी थी। बिल्डरों का आरोप था कि कंपनियां जानबूझकर आपूर्ति रोककर कीमतें बढ़ा रही हैं, जिससे बुनियादी ढांचे और निर्माण की लागत बढ़ रही है।
कंपनियों का रुख
वर्तमान में जेएसडब्ल्यू और सेल ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है और सीसीआई के समक्ष अपना जवाब दाखिल किया है। टाटा स्टील और अन्य अधिकारियों की ओर से अभी आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।
आगे क्या होगा?
सीसीआई ने इन कंपनियों से पिछले 8 वर्षों (2015-2023) का वित्तीय विवरण मांगा है ताकि संभावित जुर्माने की गणना की जा सके। वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा रिपोर्ट की समीक्षा के बाद और कंपनियों के पक्ष सुनने के बाद आयोग अपना अंतिम आदेश जारी करेगा।
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