नई दिल्ली. हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में शुभ कार्यों के लिए ‘मुहूर्त’ का विशेष महत्व है। यदि आप भी साल 2026 में शादी, मुंडन या गृह प्रवेश जैसी किसी मांगलिक योजना पर काम कर रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। 14 मार्च 2026 की रात से ‘खरमास’ शुरू होने जा रहा है, जिसके साथ ही एक महीने तक शहनाइयों की गूंज शांत हो जाएगी।
ज्योतिषाचार्य पंडित अमरेंद्र कुमार मिश्र (साहेब पंडित) के अनुसार, खरमास के दौरान सूर्य देव मीन राशि में प्रवेश करते हैं, जिसे मांगलिक कार्यों के लिए शुभ नहीं माना जाता।
🗓️ 14 मार्च की रात से थमेंगे शुभ कार्य
पंडित अमरेंद्र के अनुसार, 14 मार्च 2026 की शेष रात्रि 3:07 बजे से खरमास का प्रारंभ हो जाएगा। इस अवधि में विवाह, यज्ञोपवीत, मुंडन और गृह प्रवेश जैसे संस्कारों को वर्जित माना गया है।
विशेष नोट: खरमास का समापन 14 अप्रैल 2026 को मेष संक्रांति (सतुआन) के साथ होगा। इस दिन सूर्य मेष राशि में प्रवेश करेंगे, जिससे स्नान-दान का विशेष पुण्य काल शुरू होगा।
धर्म-कर्म सेक्शन: matribhumisamachar.com/dharm-karam
🔱 पापमोचनी एकादशी का संयोग
इस बीच पापमोचनी एकादशी का व्रत रविवार, 15 मार्च को रखा जाएगा। चूंकि एकादशी तिथि शनिवार को लगेगी और रविवार सुबह 6:58 बजे तक रहेगी, इसलिए सूर्योदय कालीन तिथि के अनुसार रविवार का व्रत करना ही श्रेष्ठ फलदायी होगा।
💍 अप्रैल से जुलाई तक 36 वैवाहिक मुहूर्त: अक्षय तृतीया का खास योग
खरमास समाप्त होने के तुरंत बाद शादियां शुरू नहीं होंगी। ग्रह-नक्षत्रों की गणना के अनुसार, पहला बड़ा वैवाहिक मुहूर्त 20 अप्रैल 2026 को पड़ेगा।
अक्षय तृतीया का शुभ संयोग: 20 अप्रैल को ही अक्षय तृतीया है, जिसे ‘अबूझ मुहूर्त’ माना जाता है। इस दिन बिना किसी विशेष मुहूर्त देखे भी विवाह संपन्न किए जा सकते हैं। वाराणसी पंचांग के अनुसार अप्रैल से जुलाई के बीच कुल 36 मुहूर्त उपलब्ध हैं:
| महीना | विवाह की शुभ तिथियां |
| अप्रैल | 20, 21, 25, 26, 27, 28, 29, 30 |
| मई | 1, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 12, 13, 14 |
| जून | 19, 20, 21, 22, 23, 24, 25, 26, 27, 28, 29 |
| जुलाई | 1, 2, 6, 7, 8, 11, 12 |
आज का पंचांग: matribhumisamachar.com/panchang
⚠️ सावधान! बीच में आएगा ‘मलमास’ (पुरुषोत्तम मास)
शादियों के सीजन के बीच में एक बार फिर विराम लगेगा। 17 मई से 15 जून 2026 तक ज्येष्ठ अधिक मास (मलमास) रहेगा।
-
क्या न करें: इस दौरान विवाह जैसे भौतिक संस्कार वर्जित रहेंगे।
-
क्या करें: चूंकि इसे ‘पुरुषोत्तम मास’ कहा जाता है, इसलिए दान-पुण्य, भजन-कीर्तन, यज्ञ और भागवत कथा श्रवण के लिए यह समय सर्वोत्तम है।
राशिफल और ज्योतिष: matribhumisamachar.com/astrology
निष्कर्ष
यदि आप 2026 की छमाही में बड़े आयोजन की योजना बना रहे हैं, तो 20 अप्रैल से 14 मई और फिर 19 जून से 12 जुलाई तक का समय सबसे अनुकूल है। 12 जुलाई के बाद देवशयनी एकादशी के साथ ही फिर से चतुर्मास का प्रारंभ हो जाएगा और मांगलिक कार्य कुछ महीनों के लिए रुक जाएंगे।
अधिक जानकारी के लिए आप ज्योतिषाचार्य श्याम जी शुक्ल (मो. : 8808797111) से संपर्क कर सकते हैं.
Matribhumisamachar


