नई दिल्ली. साल 2026 की पहली बड़ी खगोलीय घटना आज होने जा रही है। आज चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी के बीच इस तरह आएगा कि आसमान में एक चमकदार सुनहरी अंगूठी जैसा नजारा दिखेगा, जिसे वैज्ञानिक भाषा में ‘वलयाकार सूर्य ग्रहण’ (Annular Solar Eclipse) और आम बोलचाल में ‘रिंग ऑफ फायर’ कहा जाता है।
⏰ ग्रहण का समय (भारतीय समयानुसार – IST)
खगोलशास्त्रियों के अनुसार, ग्रहण की कुल अवधि लगभग 4 घंटे 31 मिनट की होगी:
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ग्रहण की शुरुआत: दोपहर 03:26 बजे
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चरम सीमा (अधिकतम प्रभाव): शाम 05:42 बजे
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ग्रहण की समाप्ति: रात 07:57 बजे
🌍 किन देशों में दिखेगा नजारा?
यह दुर्लभ नजारा दुनिया के हर हिस्से से दिखाई नहीं देगा। इसकी मुख्य दृश्यता अंटार्कटिका, दक्षिण अफ्रीका के कुछ हिस्से, अर्जेंटीना और चिली के दक्षिणी इलाकों में रहेगी।
🇮🇳 भारत में स्थिति और सूतक काल
भारतीय दर्शकों के लिए यह खबर थोड़ी निराशाजनक हो सकती है क्योंकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा।
धार्मिक मान्यता: चूंकि यह ग्रहण भारत में दृश्य नहीं है, इसलिए यहाँ सूतक काल मान्य नहीं होगा। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि देश में मंदिरों के कपाट खुले रहेंगे और सभी शुभ व मांगलिक कार्य बिना किसी बाधा के सामान्य रूप से किए जा सकेंगे।
🔭 क्या होता है ‘रिंग ऑफ फायर’?
वलयाकार ग्रहण तब लगता है जब चंद्रमा पृथ्वी से काफी दूर होता है। दूर होने के कारण चंद्रमा का आकार छोटा दिखता है और वह सूर्य को पूरी तरह नहीं ढक पाता। नतीजतन, सूर्य का बाहरी हिस्सा एक चमकते छल्ले की तरह दिखाई देता है।
सावधानी: जहाँ यह ग्रहण दिखाई दे रहा है, वहां के लोगों को सलाह दी गई है कि वे इसे सीधी नग्न आंखों से न देखें। इसके लिए विशेष सोलर चश्मों का ही प्रयोग करें।
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