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भारत-फ्रांस संबंधों में नया अध्याय: ‘स्पेशल ग्लोबल स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप’ का ऐलान, एवरेस्ट तक उड़ेगा स्वदेशी हेलीकॉप्टर

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प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों की मुंबई में द्विपक्षीय वार्ता।

मुंबई. भारत और फ्रांस ने अपने दशकों पुराने रक्षा और कूटनीतिक संबंधों को एक नई ऊंचाई देते हुए ‘स्पेशल ग्लोबल स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप’ के रूप में स्थापित करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। मुंबई में फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ द्विपक्षीय वार्ता के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साझा बयान जारी करते हुए इसे वैश्विक स्थिरता के लिए एक निर्णायक मोड़ बताया।

एवरेस्ट की ऊंचाइयों तक उड़ेगा ‘मेड इन इंडिया’ हेलीकॉप्टर

इस मुलाकात की सबसे बड़ी उपलब्धि रक्षा क्षेत्र में ‘मेक इन इंडिया’ का विस्तार रही। पीएम मोदी ने गर्व के साथ घोषणा की कि भारत और फ्रांस मिलकर दुनिया का एकमात्र ऐसा हेलीकॉप्टर भारत में बनाएंगे, जो माउंट एवरेस्ट जैसी ऊंचाइयों पर उड़ान भरने में सक्षम होगा।

  • वैश्विक केंद्र: यह हेलीकॉप्टर न केवल भारतीय सेना की दुर्गम क्षेत्रों में जरूरतों को पूरा करेगा, बल्कि इसे पूरे विश्व में निर्यात (Export) भी किया जाएगा।

2026: भारत-यूरोप संबंधों का ‘टर्निंग प्वाइंट’

प्रधानमंत्री ने वर्ष 2026 को भारत और यूरोपीय संघ (EU) के संबंधों के लिए मील का पत्थर करार दिया। हाल ही में हुए ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह समझौता भारत और फ्रांस के व्यापारिक रिश्तों को अभूतपूर्व गति प्रदान करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि आर्थिक एकीकरण के इस दौर में फ्रांस, भारत का सबसे भरोसेमंद साझेदार बनकर उभरा है।

भविष्य के लिए ‘फ्यूचर बिल्डिंग प्लेटफॉर्म’

तकनीकी सहयोग को जमीन पर उतारने के लिए तीन प्रमुख केंद्रों की स्थापना की घोषणा की गई है:

  1. इंडो-फ्रैंच सेंटर फॉर AI इन हेल्थ: स्वास्थ्य सेवाओं में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग।

  2. इंडो-फ्रैंच सेंटर फॉर डिजिटल साइंस एंड टेक्नोलॉजी: उन्नत डिजिटल अनुसंधान।

  3. नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर स्किलिंग इन एयरोनॉटिक्स: विमानन क्षेत्र में युवाओं को विश्व स्तरीय प्रशिक्षण।

“यह मात्र संस्थान नहीं हैं, बल्कि ये आने वाली पीढ़ियों के लिए फ्यूचर बिल्डिंग प्लेटफॉर्म हैं।” — पीएम मोदी

वैश्विक अस्थिरता और सुधार पर एकमत

दुनिया में जारी अनिश्चितता और संघर्षों के बीच, दोनों नेताओं ने वैश्विक संस्थानों (जैसे UNSC) में सुधार की वकालत की। पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि ‘ग्लोबल इंस्टीट्यूशन के रिफॉर्म’ के बिना वैश्विक चुनौतियों का समाधान संभव नहीं है। उन्होंने भारत-फ्रांस की साझेदारी को ‘फोर्स फॉर ग्लोबल स्टेबलिटी’ (वैश्विक स्थिरता की शक्ति) बताया।

👉 इमैनुएल मैक्रों की भारत यात्रा (17–19 फरवरी 2026): AI, रक्षा और ‘हॉरिजन 2047’ को मिलेगी नई गति

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