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हिमानी पुरी मानहानि मामला: दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, जेफरी एपस्टीन से जुड़े ‘फेक’ कंटेंट पर लगा बैन

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दिल्ली उच्च न्यायालय की बिल्डिंग

नई दिल्ली. दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी की बेटी, हिमानी पुरी की प्रतिष्ठा को सुरक्षित रखने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। अदालत ने हिमानी पुरी को कुख्यात अमेरिकी अपराधी जेफरी एपस्टीन (Jeffrey Epstein) से जोड़ने वाली कथित मानहानिकारक ऑनलाइन सामग्री को भारत में ब्लॉक करने का अंतरिम आदेश जारी किया है।

जस्टिस शालिंदर कौर की पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए स्पष्ट किया कि यह आदेश फिलहाल केवल भारत की भौगोलिक सीमा तक ही सीमित रहेगा।

क्या है पूरा मामला?

सोशल मीडिया और कुछ डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर हिमानी पुरी को लेकर कुछ ऐसी रिपोर्ट्स साझा की जा रही थीं, जिनमें उनका नाम जेफरी एपस्टीन प्रकरण से जोड़ा गया था। हिमानी पुरी ने इसे अपनी छवि को खराब करने की एक सोची-समझी साजिश बताते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया था।

सुनवाई के दौरान अदालत ने माना कि बिना किसी ठोस आधार के किसी व्यक्ति को इतने विवादित मामले से जोड़ना उसकी प्रतिष्ठा को ‘अपूरणीय क्षति’ पहुँचा सकता है।

अदालत की सख्त टिप्पणी: ‘पत्रकार जांच एजेंसी नहीं हैं’

सुनवाई के दौरान प्रतिवादी पक्ष (पत्रकारों) ने तर्क दिया कि उन पर प्रतिबंध लगाना ‘प्रेस की स्वतंत्रता’ का हनन होगा। हालांकि, अदालत ने इस दलील को खारिज करते हुए कुछ महत्वपूर्ण बातें कहीं:

  • तथ्यों का सत्यापन: अदालत ने कहा कि किसी भी आरोप की सत्यता की जांच करना जांच एजेंसियों का काम है, न कि मीडिया का।

  • मीडिया रिपोर्ट्स पर निर्भरता: जज ने स्पष्ट किया कि आधिकारिक जांच एजेंसियां अपनी कार्रवाई के लिए केवल मीडिया की खबरों पर निर्भर नहीं रहतीं; उन्हें ठोस साक्ष्यों की आवश्यकता होती है।

  • संतुलन का सिद्धांत: कोर्ट ने कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी का मतलब किसी की निजी गरिमा को बिना सबूत ठेस पहुँचाना नहीं है।

पत्रकारों का पक्ष

पत्रकारों की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को सूचित किया कि उनके मुवक्किलों ने विवादित सामग्री को पहले ही हटा दिया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि जो बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, वे वास्तव में उनके मुवक्किलों द्वारा दिए ही नहीं गए थे।

‘ग्लोबल’ नहीं, केवल ‘लोकल’ प्रतिबंध

दिल्ली हाईकोर्ट का यह आदेश ‘जियो-ब्लॉकिंग’ (Geo-blocking) के सिद्धांत पर आधारित है। इसका मतलब है कि:

  1. भारत में स्थित इंटरनेट उपयोगकर्ता इन लिंक या वीडियो को नहीं देख पाएंगे।

  2. तकनीकी रूप से यह सामग्री विदेशों में अभी भी उपलब्ध हो सकती है, क्योंकि अदालत ने इसे ‘वैश्विक ब्लॉक’ (Global Block) बनाने से इनकार कर दिया है।

आगे की राह और अगली सुनवाई

अदालत ने गूगल, एक्स (पूर्व में ट्विटर) और अन्य सोशल मीडिया दिग्गजों को निर्देश दिया है कि वे उन यूआरएल (URLs) को हटा दें या ब्लॉक करें जो इस मानहानिकारक सामग्री को प्रसारित कर रहे हैं। इस मामले की अगली विस्तृत सुनवाई 7 अगस्त को तय की गई है, जहाँ कोर्ट इस प्रतिबंध को स्थायी करने या हटाने पर विचार करेगा।

नोट: जेफरी एपस्टीन का मामला एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का हाई-प्रोफाइल सेक्स ट्रैफिकिंग केस रहा है, जिससे दुनिया भर की कई बड़ी हस्तियों के नाम जुड़े थे। हिमानी पुरी के मामले में कोर्ट ने प्रथम दृष्टया माना है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप निराधार हैं।

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