कानपुर. उत्तर प्रदेश का औद्योगिक केंद्र कानपुर इस समय एक बड़े शिक्षा घोटाले की गूंज से थर्रा उठा है। पुलिस ने शहर के किदवई नगर थाना क्षेत्र में संचालित “शैल ग्रुप ऑफ एजुकेशन” के कार्यालय पर छापा मारकर एक ऐसे संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो देश के 9 राज्यों में फर्जी डिग्रियों और मार्कशीट का अवैध व्यापार कर रहा था।
📄 900+ फर्जी डिग्रियां और CSJMU का कनेक्शन
पुलिस की छापेमारी में जो दस्तावेज बरामद हुए हैं, वे हैरान करने वाले हैं। गिरोह के पास से 14 विभिन्न विश्वविद्यालयों की 900 से अधिक फर्जी डिग्रियां बरामद की गई हैं।
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CSJMU का सबसे ज्यादा दुरुपयोग: बरामद दस्तावेजों में अकेले कानपुर के छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU) की 357 फर्जी डिग्रियां शामिल हैं।
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अन्य विश्वविद्यालय: अलीगढ़ के मंगलायतन विश्वविद्यालय, फिरोजाबाद के जेएस विश्वविद्यालय और मणिपुर के एशियन विश्वविद्यालय समेत कई संस्थानों के जाली माइग्रेशन, प्रोविजनल सर्टिफिकेट और मुहरें मिली हैं।
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ऑनलाइन वेरिफिकेशन का खेल: जांच में सामने आया है कि गिरोह के तार विश्वविद्यालयों के कुछ बाबुओं से जुड़े थे, जो इन फर्जी डिग्रियों को यूनिवर्सिटी की वेबसाइट पर भी ‘वेरीफाई’ करवा देते थे ताकि किसी को शक न हो।
🕵️ SIT का गठन और 10 वकीलों पर शिकंजा
मामले की गंभीरता और इसके अंतर्राज्यीय (Inter-state) नेटवर्क को देखते हुए कानपुर पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने 14 सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है।
बड़ी कार्रवाई: SIT उन सभी ‘लाभार्थियों’ की सूची तैयार कर रही है जिन्होंने इन डिग्रियों के आधार पर नौकरियां पाईं। विशेष रूप से कानपुर के 10 वकीलों को चिह्नित किया गया है, जो कथित तौर पर इस गिरोह से खरीदी गई फर्जी LLB डिग्री के सहारे कोर्ट में वकालत कर रहे थे।
💰 रेट कार्ड: लाखों में बिक रही थी ‘सफलता’
यह गिरोह किसी प्रोफेशनल कंपनी की तरह रेट कार्ड चलाता था। बिना परीक्षा दिए डिग्री पाने की कीमत कुछ इस तरह तय थी:
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हाईस्कूल व इंटरमीडिएट: ₹50,000
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ग्रेजुएशन (BA/B.Com): ₹75,000
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B.Tech व LLB: ₹1.5 लाख से ₹2.5 लाख
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फार्मेसी (B.Pharma/D.Pharma): ₹2.5 लाख तक
🔴 मास्टरमाइंड और ‘मौत’ का रहस्यमयी कनेक्शन
गिरोह का सरगना शैलेंद्र कुमार ओझा, जो खुद को एक गणित शिक्षक बताता है, फिलहाल पुलिस की गिरफ्त में है। लेकिन इस कहानी में एक डरावना मोड़ तब आया जब 19 फरवरी 2026 को शहर के एक होटल में एजुकेशनल काउंसलर आनंद श्रीवास्तव का शव मिला।
पुलिस को आनंद के पास से एक सुसाइड नोट मिला है, जिसमें इस गिरोह के साथ उसके संबंधों और दबाव की बात सामने आ रही है। जांच में पता चला है कि आनंद मध्य प्रदेश के श्री कृष्णा विश्वविद्यालय से फर्जी मार्कशीट सेटल करने का काम देखता था।
🚩 फरार आरोपियों की तलाश और वित्तीय जांच
पुलिस ने मौके से 2 कारें और ₹50 से ₹60 लाख के पोस्ट-डेटेड चेक भी जब्त किए हैं। फरार चल रहे 5 मुख्य आरोपियों (जिनमें मयंक भारद्वाज, मनीष उर्फ रवि, विनीत, शेखू और शुभम दुबे शामिल हैं) की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें मध्य प्रदेश, हैदराबाद और दिल्ली में छापेमारी कर रही हैं।
निष्कर्ष: युवाओं के भविष्य से खिलवाड़
यह घोटाला साबित करता है कि ‘डिग्री माफिया’ ने सिस्टम में किस कदर सेंध लगा रखी है। फर्जी डिग्रियों के सहारे सिस्टम में घुसे अयोग्य लोग समाज के लिए बड़ा खतरा हैं। कानपुर पुलिस अब इन सभी डिग्रियों को रद्द कराने और इनके आधार पर नौकरी पाने वालों को जेल भेजने की तैयारी में है।
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