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दलाल स्ट्रीट पर ‘ब्लैक फ्राइडे’: सेंसेक्स 1690 अंक टूटा, एक ही दिन में निवेशकों के 9 लाख करोड़ रुपये डूबे

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
4 Min Read

नई दिल्ली | शुक्रवार, 27 मार्च 2026

भारतीय शेयर बाजार के लिए आज का दिन किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा। वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग ने दलाल स्ट्रीट पर हाहाकार मचा दिया। सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन चौतरफा बिकवाली के कारण बीएसई (BSE) और एनएसई (NSE) के प्रमुख सूचकांक ताश के पत्तों की तरह ढह गए।

? बाजार का लेखा-जोखा: रिकॉर्ड गिरावट

शुक्रवार को कारोबार खत्म होने तक बाजार की स्थिति बेहद नाजुक रही:

  • सेंसेक्स: करीब 1,690 अंकों की भारी गिरावट के साथ 73,583 के स्तर पर बंद हुआ।

  • निफ्टी 50: लगभग 487 अंकों की गोता लगाकर 22,820 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसल गया।

  • नुकसान: इस सुनामी में निवेशकों की संपत्ति (Market Cap) में एक ही दिन में ₹9 लाख करोड़ की भारी कमी आई।

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? गिरावट के 5 बड़े ‘विलेन’

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आज की गिरावट केवल एक कारण से नहीं, बल्कि कई वैश्विक संकटों के एक साथ आने का परिणाम है:

  1. अमेरिका-ईरान युद्ध की आहट: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने निवेशकों को डरा दिया है। युद्ध की आशंका के चलते निवेशक जोखिम वाली संपत्तियों (शेयर्स) से पैसा निकालकर सुरक्षित विकल्पों जैसे सोना (Gold) में लगा रहे हैं।

  2. क्रूड ऑयल $100 के पार: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल $100 प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया है। भारत अपनी जरूरत का 80% तेल आयात करता है, जिससे व्यापार घाटा बढ़ने का डर है।

  3. रुपये का ऐतिहासिक पतन: डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया ₹94.15 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है। कमजोर रुपया विदेशी निवेशकों (FII) के लिए भारत से पैसा निकालने का सबसे बड़ा कारण बन रहा है।

  4. FII की आक्रामक बिकवाली: पिछले कुछ सत्रों से विदेशी संस्थागत निवेशक लगातार भारतीय बाजार से अपना निवेश कम कर रहे हैं, जिससे बाजार को कोई सपोर्ट नहीं मिल पा रहा है।

  5. विंडफॉल टैक्स का डर: रिफाइनरी कंपनियों पर सरकार द्वारा निर्यात शुल्क (Windfall Tax) बढ़ाए जाने की खबरों ने रिलायंस और ओएनजीसी जैसे बड़े शेयरों को धराशायी कर दिया।

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? किन सेक्टरों पर पड़ी सबसे ज्यादा मार?

आज के कारोबार में सबसे ज्यादा मार बैंकिंग, ऑटो और आईटी (IT) सेक्टर पर पड़ी। बैंकिंग सेक्टर में अनिश्चितता के चलते निवेशकों ने भारी मुनाफावसूली की। वहीं, कच्चे तेल की कीमतों ने ऑटो और पेंट कंपनियों के शेयरों को लाल निशान में धकेल दिया।

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? निवेशकों के लिए सलाह

बाजार के जानकारों का कहना है कि जब तक वैश्विक तनाव कम नहीं होता, बाजार में अस्थिरता बनी रहेगी। इस समय नए निवेशकों को ‘लंप-सम’ निवेश से बचना चाहिए और केवल मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों में SIP के जरिए निवेश पर विचार करना चाहिए।

आगे क्या? सोमवार को बाजार की चाल इस बात पर निर्भर करेगी कि सप्ताहांत में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम होता है या नहीं। यदि तनाव बढ़ता है, तो निफ्टी 22,500 के स्तर का परीक्षण कर सकता है।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।