नई दिल्ली. मुंबई के बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) ग्राउंड पर दिल्ली के खिलाफ खेले जा रहे रणजी ट्रॉफी मैच के दौरान एक असामान्य लेकिन गंभीर दृश्य सामने आया, जब मुंबई टीम के खिलाड़ियों को प्रदूषण और धूल के कारण मैदान पर फेस मास्क पहनकर खेलना पड़ा। यह घटना केवल क्रिकेट तक सीमित नहीं रही, बल्कि स्वास्थ्य, पर्यावरण और खेल प्रशासन से जुड़ा एक बड़ा मुद्दा बनकर सामने आई है।
🌫️ निर्माण कार्य बना प्रदूषण की मुख्य वजह
BKC ग्राउंड के ठीक बगल में बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य चल रहा है, जिससे लगातार धूल और प्रदूषित कण हवा में घुल रहे हैं। निर्माण स्थल की नज़दीकी के कारण मैदान का वातावरण अत्यधिक प्रभावित हुआ और खिलाड़ियों को सांस लेने में कठिनाई होने लगी।
📊 AQI 160: “अस्वस्थ” श्रेणी की हवा
मैच के दिन मैदान का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) लगभग 160 रिकॉर्ड किया गया, जो कि “Unhealthy (अस्वस्थ)” श्रेणी में आता है। इस स्तर की वायु गुणवत्ता में लंबे समय तक शारीरिक गतिविधि करना स्वास्थ्य के लिए जोखिमपूर्ण माना जाता है, खासकर खिलाड़ियों के लिए जो लगातार दौड़-भाग और शारीरिक श्रम करते हैं।
😷 खिलाड़ियों ने क्यों पहना मास्क?
प्रदूषण और सांस लेने में हो रही परेशानी को देखते हुए खिलाड़ियों ने स्वयं की सुरक्षा के लिए फेस मास्क पहनने का फैसला लिया। मैच के तीसरे सत्र के दौरान कई खिलाड़ी मास्क पहने हुए नजर आए।
मास्क पहने दिखे प्रमुख खिलाड़ी:
- सरफराज खान
- मुशीर खान
- स्पिनर हिमांशु सिंह
मुंबई के तेज गेंदबाज मोहित अवस्थी ने भी पुष्टि की कि निर्माण कार्य से फैल रही धूल और प्रदूषण के कारण खिलाड़ियों को परेशानी हो रही थी, इसी वजह से मास्क का इस्तेमाल किया गया।
🏏 खेल पर भी पड़ा असर
प्रदूषण का असर सिर्फ स्वास्थ्य तक सीमित नहीं रहा, बल्कि खेल की परिस्थितियों पर भी प्रभाव पड़ा। खिलाड़ियों की सांस लेने की क्षमता, फोकस और फील्डिंग परफॉर्मेंस पर इसका सीधा असर देखा गया। कुछ सपोर्ट स्टाफ को भी ड्रेसिंग रूम में मास्क पहनने की जरूरत महसूस हुई।
🏙️ बड़ा सवाल: खेल बनाम पर्यावरण
यह घटना कई गंभीर सवाल खड़े करती है:
- क्या खेल मैदानों के आसपास निर्माण कार्य के लिए पर्यावरणीय मानक तय होने चाहिए?
- क्या मैच से पहले AQI आधारित स्वास्थ्य मूल्यांकन अनिवार्य किया जाना चाहिए?
- क्या खिलाड़ियों की सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय स्तर की पर्यावरण-स्वास्थ्य गाइडलाइन बनाई जानी चाहिए?
🧠 विशेषज्ञों की राय
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि:
- खेल आयोजनों के लिए रियल-टाइम एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम जरूरी है
- निर्माण कार्यों के दौरान डस्ट कंट्रोल मैकेनिज्म (स्प्रे, बैरिकेडिंग, कवरिंग) अनिवार्य होना चाहिए
- खिलाड़ियों के लिए प्रोटेक्टिव हेल्थ प्रोटोकॉल तय किए जाने चाहिए
📌 निष्कर्ष
रणजी ट्रॉफी जैसे प्रतिष्ठित घरेलू टूर्नामेंट में खिलाड़ियों का मास्क पहनकर मैदान पर उतरना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि प्रदूषण अब खेल जगत के लिए भी एक गंभीर स्वास्थ्य संकट बन चुका है। यह सिर्फ मुंबई बनाम दिल्ली मैच की घटना नहीं, बल्कि पूरे देश में खेल इंफ्रास्ट्रक्चर और पर्यावरण प्रबंधन पर पुनर्विचार की आवश्यकता का संकेत है।
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