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अमेठी: डिजिटल युग में ‘देवभाषा’ का पुनरुत्थान, संस्कृत में छपा शादी का कार्ड बना चर्चा का विषय

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
2 Min Read

लखनऊ । गुरुवार, 30 अप्रैल 2026

उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले में एक अनोखी शादी की चर्चा हर जुबान पर है। सराय भागमानी गाँव के निवासी और पेशे से संस्कृत शिक्षक संदीप ने अपनी शादी के निमंत्रण पत्र को संस्कृत भाषा में छपवाकर न केवल अपनी परंपराओं के प्रति प्रेम दिखाया है, बल्कि समाज को अपनी जड़ों की ओर लौटने का एक मूक संदेश भी दिया है। धनी जलालपुर गांव में आयोजित होने वाले इस विवाह का कार्ड अपनी भाषाई शुद्धता और सांस्कृतिक गरिमा के कारण सोशल मीडिया पर भी खूब वायरल हो रहा है।

परंपरा और आधुनिकता का संगम

संदीप का यह निमंत्रण पत्र सादगी और पारंपरिक शैली का उत्कृष्ट उदाहरण है। आमतौर पर जहाँ लोग अंग्रेजी या आधुनिक हिंदी के चमक-धमक वाले कार्ड पसंद करते हैं, वहीं संदीप ने ‘देवभाषा’ को चुना। इस कार्ड में विवाह की तिथि, मुहूर्त, वेदी पूजा और विवाह स्थल का पूरा विवरण संस्कृत के श्लोकों के माध्यम से दिया गया है।

ग्रामीणों और युवाओं में उत्साह

जब यह निमंत्रण पत्र रिश्तेदारों और ग्रामीणों तक पहुँचा, तो शुरू में इसे पढ़ने को लेकर लोगों में भारी उत्सुकता देखी गई। जिन लोगों को संस्कृत का ज्ञान नहीं था, उन्होंने संस्कृत विद्वानों की मदद ली और कार्ड का अर्थ समझा। युवाओं ने इस पहल को “कूल” और “स्वदेशी” बताते हुए इसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर साझा किया है।

संस्कृति के प्रति सम्मान और प्रेरणा

ग्रामीणों का कहना है कि संदीप की यह पहल नई पीढ़ी के लिए एक बड़ी प्रेरणा है। यह कदम दर्शाता है कि हम आधुनिक दुनिया का हिस्सा रहते हुए भी अपनी प्राचीन धरोहर और भाषा का सम्मान कर सकते हैं। यह निमंत्रण पत्र केवल एक सूचना मात्र नहीं, बल्कि संस्कृत भाषा के संरक्षण की दिशा में एक छोटा मगर प्रभावी कदम है।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।