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रूस-ब्रिटेन ‘डिप्लोमैटिक वॉर’ तेज: जासूसी के आरोप में ब्रिटिश राजनयिक निष्कासित, लंदन ने बताया ‘सरासर झूठ’

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मॉस्को | 31 मार्च, 2026

रूस और ब्रिटेन के बीच कूटनीतिक कड़वाहट एक नए चरम पर पहुँच गई है। रूस की संघीय सुरक्षा सेवा (FSB) ने सोमवार, 30 मार्च 2026 को ब्रिटिश दूतावास के एक वरिष्ठ राजनयिक को जासूसी के गंभीर आरोपों के बाद देश छोड़ने का आदेश दिया है। इस घटना ने पहले से ही तनावपूर्ण चल रहे अंतरराष्ट्रीय संबंधों में और अधिक आग लगा दी है।

कौन हैं निष्कासित राजनयिक?

रूसी अधिकारियों ने निष्कासित राजनयिक की पहचान ब्रिटिश दूतावास के द्वितीय सचिव, अल्बर्टस गेरहार्डस जानसे वैन रेंसबर्ग (Albertus Gerhardus Janse Van Rensburg) के रूप में की है। 29 वर्षीय रेंसबर्ग को 14 दिनों के भीतर रूस छोड़ने का अल्टीमेटम दिया गया है।

रूस के संगीन आरोप: ‘अघोषित खुफिया मिशन’

FSB की काउंटर इंटेलिजेंस विंग ने इस मामले में विस्तृत आरोप पत्र जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि:

  • गलत जानकारी: रेंसबर्ग ने रूस में प्रवेश के लिए वीजा आवेदन के दौरान अपनी पहचान और मिशन के उद्देश्यों के बारे में जानबूझकर गलत जानकारी दी थी।

  • आर्थिक जासूसी: रूसी एजेंसी का दावा है कि राजनयिक “अनौपचारिक बैठकों” के बहाने रूस के आर्थिक विशेषज्ञों से संवेदनशील जानकारी जुटाने की कोशिश कर रहे थे।

  • विध्वंसकारी गतिविधियाँ: FSB के अनुसार, दूतावास की आड़ में ऐसी गतिविधियाँ संचालित की जा रही थीं जो रूस की राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता के लिए सीधा खतरा थीं।

ब्रिटेन की तीखी प्रतिक्रिया: ‘यह उत्पीड़न है’

ब्रिटिश विदेश मंत्रालय (Foreign Office) ने इन आरोपों को “पूरी तरह से निराधार” और “बकवास” करार दिया है। लंदन की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया:

“रूस हमारे राजनयिकों के खिलाफ उत्पीड़न का एक व्यवस्थित और आक्रामक अभियान चला रहा है। हम अपने दूतावास कर्मचारियों या उनके परिवारों को डराने-धमकाने की इस कार्रवाई को बर्दाश्त नहीं करेंगे।”

विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रिटेन भी जल्द ही ‘जैसे को तैसा’ (Tit-for-Tat) की नीति अपनाते हुए लंदन स्थित रूसी दूतावास से किसी अधिकारी को निष्कासित कर सकता है।

2026 में दूसरी बड़ी कार्रवाई

यह साल की पहली घटना नहीं है। इससे पहले जनवरी 2026 में भी रूस ने ब्रिटिश दूतावास के एक अन्य अधिकारी, गैरेथ सैमुअल डेविस को जासूसी के आरोप में निकाला था। रूसी मीडिया के अनुसार, पिछले दो वर्षों में निष्कासित होने वाले रेंसबर्ग 16वें ब्रिटिश राजनयिक हैं।

प्रमुख बिंदु और कूटनीतिक असर

  1. वियना संधि का हवाला: रूस ने वियना संधि (1961) के अनुच्छेद 9 के तहत रेंसबर्ग की मान्यता रद्द की है।

  2. दूत को समन: रूस के विदेश मंत्रालय ने ब्रिटिश कार्यवाहक राजदूत (Danae Dholakia) को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया है।

  3. यूक्रेन युद्ध का साया: दोनों देशों के बीच यह तनाव यूक्रेन युद्ध और रूस के ‘शैडो फ्लीट’ (Shadow Fleet) पर ब्रिटेन द्वारा लगाए गए नए प्रतिबंधों के बीच आया है।

निष्कर्ष:

विशेषज्ञों के अनुसार, रूस और ब्रिटेन के बीच संवाद के माध्यम अब लगभग समाप्त हो चुके हैं। यह घटना शीत युद्ध के दौर की याद दिलाती है जहाँ दूतावासों का उपयोग कूटनीति के बजाय शक्ति प्रदर्शन के लिए किया जा रहा है। अब दुनिया की नजरें ब्रिटेन के अगले कदम पर टिकी हैं।

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