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भारत गजवा-ए-हिंद नहीं भगवा-ए हिन्द-बनेगा : पंडित धीरेन्द्र शास्त्री

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पटना. बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर आचार्य धीरेंद्र शास्त्री ने अपने संबोधन में बिहार को सनातन धर्म का मजबूत आधार बताते हुए कहा कि बिहार में वैसे ही बहार है। अगर भारत हिंदू राष्ट्र बनेगा, तो पहला राज्य बिहार होगा। उन्होंने कुछ ताकतों पर निशाना साधते हुए कहा कि वे देश को ‘गजवा-ए-हिंद’ बनाना चाहती हैं, लेकिन उनका एकमात्र सपना ‘भगवा-ए-हिंद’ है। भारत गजवा नहीं भगवा-ए-हिंद बनेगा।

शास्त्री ने हिंदुओं से एकजुट रहने की अपील करते हुए कहा कि हिंदुओं को भाषा, क्षेत्रवाद या जात-पात के नाम पर बंटने नहीं देना है। हमें उन हिंदुओं से दिक्कत है जो जाति के नाम पर लड़ाते हैं। हम किसी एक पंथ के नहीं, बल्कि हर उस हिंदू के साथ हैं जो सनातन धर्म का सम्मान करता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी किसी धर्म विशेष से कोई शिकायत नहीं है। उन्होंने कहा कि हमें मुसलमानों या ईसाइयों से कोई दिक्कत नहीं, लेकिन अगर सनातन धर्म पर कोई आघात करेगा, तो हम प्रतिघात करेंगे।

तिरंगे का सम्मान करते हुए उन्होंने कहा कि कुछ लोग तिरंगे पर चांद चाहते हैं, लेकिन हम चांद पर तिरंगा फहराने वाले हैं। शास्त्री ने सनातन धर्म को विश्व गुरु बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि सनातन का मतलब है पूरे विश्व का नेतृत्व।

बिहार में पदयात्रा की घोषणा

धीरेंद्र शास्त्री ने सनातन धर्म को और मजबूत करने के लिए बिहार में पदयात्रा करने का एलान किया। उन्होंने कहा कि हम हिंदुओं को जोड़कर रखेंगे। बिहार में विधानसभा चुनाव के बाद पदयात्रा करेंगे ताकि इसे राजनीति से न जोड़ा जाए। उन्होंने बताया कि हिंदू राष्ट्र के लिए 7 नवंबर से दिल्ली से वृंदावन तक एक अन्य पदयात्रा का आयोजन होगा, जिसके बाद बिहार में पदयात्रा की जाएगी। शास्त्री ने अपने पिछले पटना दौरे का जिक्र करते हुए कहा कि पिछली बार सुरक्षा कारणों से अनुमति नहीं मिली थी, लेकिन अब हम बार-बार आएंगे और सनातन का झंडा बुलंद करेंगे।

सनातन महाकुंभ का आयोजन सुबह 10 बजे हनुमान चालीसा और परशुराम चालीसा के पाठ के साथ शुरू हुआ और शाम 4 बजे समापन हुआ। कार्यक्रम का उद्घाटन बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खां ने किया। राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि राम सनातन परंपरा के प्रतीक हैं। राज्यपाल ने गीता का स्लोक यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत। अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम् ॥ परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्। धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे का उदाहरण देते हुए भगवान राम को इसका प्रतीक बताया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जगतगुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य ने किया। वहीं, मंच संचालन श्रीराम कर्मभूमि न्यास के अध्यक्ष कृष्णकांत ओझा ने किया।

बक्सर में भगवान राम की प्रतिमा निर्माण का संकल्प

स्वामी कुमार सुशांत ने विषय प्रवेश कराया। उन्होंने चार प्रस्ताव चर्चा के लिए लोगों के समक्ष रखा।जिसमें सिद्धाश्रम बक्सर में भगवान श्री राम के पराक्रमी रूप का विशालतम प्रतिमा स्थापित करना, माता सीता के प्राकट्य क्षेत्र सीतामढ़ी के निकट प्राचीन श्री राम जानकी मंदिर का जीर्णोद्धार सहित मां सीता का गर्भगृह निर्माण एवं जानकी सर्किट की स्थापना है। वहीं, मंदार पर्वत बांका की चोटी पर स्थित स्वयंभू श्रीमंदारेश्वर काशी विश्वनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार कार्य व सिद्धाश्रम तीर्थ क्षेत्र बक्सर में महर्षि विश्वामित्र वैदिक विश्वविद्यालय व यज्ञशाला, रामयण आधारित प्रकाश ध्वनि, चित्रण आदि सांस्कृतिक आयाम स्थापित करने का प्रस्ताव शामिल है।

साभार : दैनिक जागरण

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