लोड हो रहा है...

उधमपुर में आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ में एक जवान का हुआ बलिदान

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

जम्मू. पहलगाम में हुए दुखद आतंकी हमले के कुछ ही दिन बाद, जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले के डूडू-बसंतगढ़ इलाके में गुरुवार (24 अप्रैल) सुबह सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ हुई. लेफ्टिनेंट कर्नल सुनील बर्तवाल ने बताया, “डूडू-बसंतगढ़ इलाके में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच गोलीबारी हो रही है.” उन्होंने कहा कि मुठभेड़ से जुड़ी पूरी जानकारी का इंतजार किया जा रहा है. जानकारी के मुताबिक, शुरुआती मुठभेड़ में एक जवान शहीद हो गया है.

कई आतंकियों को बनाया चूका है निशाना

माना जा रहा है कि ये आतंकी शायद उसी बड़े ग्रुप का हिस्सा हैं जो हाल ही में अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर पार कर हिरानगर सेक्टर से भारत में घुसे थे. 23 मार्च को सानियाल गांव के पास डोलका जंगल में एक कपल की सतर्कता से इस ग्रुप को पहली बार देखा गया था. इसके बाद 27 मार्च को कठुआ जिले के जाखोले गांव के पास सूफैन जंगलों में हुई मुठभेड़ में दो आतंकी मारे गए थे. इसी तरह, 11-12 अप्रैल को किश्तवाड़ जिले के चत्रू इलाके के नैडगाम जंगलों में सेना की एक खास कार्रवाई में जैश-ए-मोहम्मद के तीन आतंकियों को मार गिराया गया था.

पहलगाम में आतंकियों ने किया था हमला

जम्मू-कश्मीर के मशहूर पर्यटन स्थल पहलगाम में मंगलवार को आतंकियों ने हमला कर 26 पर्यटकों की जान ले ली थी. यह हमला पूरे देश को हिला कर रख दिया और दुनिया भर में इसकी कड़ी निंदा हुई. अब उधमपुर में आतंकियों की मौजूदगी और मुठभेड़ से यह साफ हो रहा है कि घुसपैठ और आतंकी गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं और इनका दायरा भी बड़ा हो सकता है. फिलहाल डूडू-बसंतगढ़ इलाके में अतिरिक्त सुरक्षाबलों को भेजा गया है और पूरे क्षेत्र को घेर लिया गया है. सुरक्षाबलों का सर्च ऑपरेशन जारी है और हर स्तर पर कड़ी सतर्कता बरती जा रही है. सरकार और सुरक्षाबलों की योजना अब आतंकियों के पूरे नेटवर्क को खत्म करने पर केंद्रित है.

साभार : एबीपी न्यूज

- Advertisement -

भारत : 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि) व/या भारत : 1857 से 1957 (इतिहास पर एक दृष्टि) पुस्तक अपने घर/कार्यालय पर मंगाने के लिए आप निम्न लिंक पर क्लिक कर सकते हैं

सारांश कनौजिया की पुस्तकें

ऑडियो बुक : भारत 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि)

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।