शनिवार, मार्च 28 2026 | 12:09:39 AM
Breaking News
Home / राज्य / उत्तरप्रदेश / बांदा में केन नदी का जल स्तर गिरने से हाहाकार: 1.5 लाख आबादी बूंद-बूंद को तरसी

बांदा में केन नदी का जल स्तर गिरने से हाहाकार: 1.5 लाख आबादी बूंद-बूंद को तरसी

Follow us on:

बांदा की केन नदी का सूखता हुआ किनारा और जल स्तर में गिरावट।

लखनऊ. उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में गर्मी की शुरुआत होते ही पानी की किल्लत ने विकराल रूप लेना शुरू कर दिया है। बांदा जिले की जीवनरेखा मानी जाने वाली केन नदी का जल स्तर तेजी से गिरने के कारण शहर की जलापूर्ति व्यवस्था चरमरा गई है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, नदी के जल स्तर में 10.94 मीटर की भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे जल संस्थान को प्रतिदिन 2 MLD (मिलियन लीटर) पानी कम मिल रहा है।

केन नदी के सूखने से बढ़ा संकट: आंकड़ों की जुबानी

मानसून के दौरान केन नदी का जल स्तर 104.80 मीटर के करीब रहता है, जो मार्च 2026 की शुरुआत तक घटकर महज 93.86 मीटर रह गया है। पानी की इस कमी का सीधा असर शहर के भूरागढ़ और बांबेश्वर पहाड़ स्थित जल शोधन संयंत्रों (Water Treatment Plants) पर पड़ा है।

  • शहर की कुल जरूरत: 26.3 MLD

  • वर्तमान आपूर्ति: 24.3 MLD

  • प्रभावित इलाके: शहर के 31 मुख्य मुहल्ले

  • प्रभावित आबादी: लगभग 20,000 नल कनेक्शन धारक (करीब 1.5 लाख लोग)

एक घंटे की सप्लाई और लो-प्रेशर की मार

शहरवासियों का कहना है कि जल संस्थान द्वारा सुबह 6 से 7 बजे तक केवल एक घंटे की आपूर्ति की जा रही है। नदी का बहाव कम होने से पाइपलाइनों में पानी का दबाव (Pressure) इतना कम है कि बिना टुल्लू पंप के पानी भरना नामुमकिन हो गया है। खुटला, छोटीबाजार, खिन्नी नाका और मढ़िया नाका जैसे इलाकों में स्थिति और भी खराब है, जहाँ बिजली कटौती होते ही लोग बूंद-बूंद पानी को तरस जाते हैं।

प्रशासनिक तैयारी और केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट की उम्मीद

जल संस्थान ने पिछले साल संकट से निपटने के लिए नदी के बीच में अस्थाई दीवार (sand bund) बनाकर जलधारा को इंटेकवेल की तरफ मोड़ने का प्रयास किया था। इस वर्ष भी चैनल की सफाई के निर्देश दिए गए हैं।

वहीं, दीर्घकालिक समाधान के रूप में केन-बेतवा लिंक परियोजना पर काम चल रहा है, जिसका उद्देश्य बुंदेलखंड के सूखाग्रस्त इलाकों में पानी की कमी को दूर करना है। हालांकि, स्थानीय जानकारों का मानना है कि जब तक नदी में अवैध बालू खनन पर पूरी तरह लगाम नहीं लगती, तब तक केन का जल धारण स्तर नहीं सुधरेगा।

जनता की मांग: दिन में दो बार मिले पानी

बढ़ती तपिश को देखते हुए बांदा के नागरिकों ने जिला प्रशासन और जल संस्थान से मांग की है कि:

  1. दो समय आपूर्ति: सुबह के साथ-साथ शाम को भी कम से कम 45 मिनट पानी दिया जाए।

  2. टैंकर सुविधा: जिन इलाकों में पानी बिल्कुल नहीं पहुंच रहा, वहां टैंकरों की संख्या बढ़ाई जाए।

  3. रोस्टर सुधार: जलापूर्ति के समय बिजली कटौती न की जाए।

विशेषज्ञ की राय: “मई और जून के महीनों में तापमान 45°C पार कर जाता है। यदि अभी मार्च में ही 2 MLD की कमी है, तो आने वाले दो महीनों में संकट और गहरा सकता है। जल संचयन और संयमित उपयोग ही फिलहाल एकमात्र विकल्प है।”

निष्कर्ष: बांदा का जल संकट केवल एक मौसमी समस्या नहीं, बल्कि पर्यावरण और नदी संरक्षण के प्रति हमारी अनदेखी का परिणाम है।

संबंधित खबर: बांदा: केन नदी में अवैध खनन ने बिगाड़ा जल स्तर – मातृभूमि समाचार

मित्रों,
मातृभूमि समाचार का उद्देश्य मीडिया जगत का ऐसा उपकरण बनाना है, जिसके माध्यम से हम व्यवसायिक मीडिया जगत और पत्रकारिता के सिद्धांतों में समन्वय स्थापित कर सकें। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए हमें आपका सहयोग चाहिए है। कृपया इस हेतु हमें दान देकर सहयोग प्रदान करने की कृपा करें। हमें दान करने के लिए निम्न लिंक पर क्लिक करें -- Click Here


* 1 माह के लिए Rs 1000.00 / 1 वर्ष के लिए Rs 10,000.00

Contact us

Check Also

GST Scam: 200 करोड़ की टैक्स चोरी का ‘मास्टरमाइंड’ अहमदाबाद से गिरफ्तार, UP STF ने ऐसे बिछाया जाल

लखनऊ | 27 मार्च, 2026 उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (UP STF) ने एक बड़ी …