लखनऊ | गुरुवार, 9 अप्रैल 2026
उत्तर प्रदेश में सुरक्षा एजेंसियों ने एक बार फिर आतंकी साजिशों के बड़े नेटवर्क को नेस्तनाबूद करने की दिशा में बड़ी कामयाबी हासिल की है। एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) ने गुरुवार को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शामली जिले से 6 संदिग्ध युवकों को हिरासत में लिया है। प्राथमिक जांच में सामने आया है कि ये सभी युवक सीधे तौर पर पाकिस्तानी हैंडलर्स के संपर्क में थे और सीमा पार से मिल रहे निर्देशों पर देश विरोधी गतिविधियों को अंजाम देने की योजना बना रहे थे।
चारबाग रेलवे स्टेशन साजिश से जुड़े तार
एटीएस की यह कार्रवाई हाल ही में लखनऊ के चारबाग रेलवे स्टेशन पर धमाके और रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचाने की साजिश के खुलासे के बाद हुई है। 2 अप्रैल 2026 को लखनऊ से गिरफ्तार किए गए चार मुख्य आरोपियों—साकिब उर्फ ‘डेविल’ (मेरठ), अरबाब (मेरठ), लोकेश और विकास (गौतमबुद्धनगर)—से हुई कड़ी पूछताछ में शामली के इस नए मॉड्यूल का पता चला।
गिरफ्तार आरोपियों ने स्वीकार किया था कि वे टेलीग्राम, सिग्नल और इंस्टाग्राम जैसे एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म के जरिए पाकिस्तानी आकाओं से जुड़े थे और उन्हें संवेदनशील सैन्य ठिकानों व रेलवे सिग्नल सिस्टम की रेकी कर वीडियो भेज रहे थे।
सोशल मीडिया बना ‘हथियार’
एजेंसियों के मुताबिक, हिरासत में लिए गए शामली के युवकों को सोशल मीडिया के जरिए रेडिकलाइज (कट्टरपंथी) किया गया था। जांच में पाया गया है कि:
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भर्ती प्रक्रिया: पाकिस्तानी हैंडलर्स ने धार्मिक भावनाओं को भड़काने वाले वीडियो और कंटेंट के जरिए इन युवाओं को प्रभावित किया।
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फंडिंग का खेल: सूत्रों के अनुसार, इस मॉड्यूल को विदेशों से फंडिंग मिलने के भी सबूत मिले हैं, जिसका इस्तेमाल साजो-सामान जुटाने और रेकी करने में किया जाना था।
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डिजिटल साक्ष्य: एटीएस ने हिरासत में लिए गए युवकों के मोबाइल और लैपटॉप जब्त कर लिए हैं, जिनकी फॉरेंसिक जांच जारी है।
पश्चिमी यूपी में हाई अलर्ट
शामली में हुई इस छापेमारी के बाद मेरठ, बागपत, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर जैसे जिलों में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। एटीएस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया:
“शामली से हिरासत में लिए गए युवकों से पूछताछ जारी है। यदि उनके खिलाफ पुख्ता सबूत मिलते हैं, तो उन्हें गिरफ्तार कर लखनऊ कोर्ट में पेश किया जाएगा। हमारा मुख्य उद्देश्य इस पूरे स्लीपर सेल नेटवर्क को जड़ से खत्म करना है।”
क्या थी बड़ी साजिश?
अब तक की जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि यह मॉड्यूल केवल धमाके ही नहीं, बल्कि आर्थिक नुकसान पहुंचाने की भी फिराक में था। इनके निशाने पर थे:
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रेलवे सिग्नलिंग सिस्टम: ताकि रेल यातायात बाधित कर बड़ी दुर्घटना को अंजाम दिया जा सके।
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गैस सिलेंडर लदे ट्रक: भीड़भाड़ वाले इलाकों में आगजनी कर दहशत फैलाना।
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महत्वपूर्ण प्रतिष्ठान: प्रमुख सैन्य और पुलिस संस्थानों की रेकी करना।
इस कार्रवाई ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि सोशल मीडिया की निगरानी कितनी अनिवार्य हो गई है। पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि या सोशल मीडिया पर संदिग्ध ग्रुप्स की जानकारी तुरंत अधिकारियों को दें।
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