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झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: ISIS से जुड़े ‘साइबर मॉड्यूल’ के आरोपी उमर बहादुर की जमानत याचिका खारिज

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रांची | सोमवार, 20 अप्रैल 2026

झारखंड की राजधानी रांची से एक बड़ी न्यायिक खबर सामने आई है। झारखंड हाईकोर्ट ने वैश्विक आतंकवादी संगठन आईएसआईएस (ISIS) के साथ कथित संबंधों और देश विरोधी गतिविधियों में संलिप्तता के आरोपी उमर बहादुर उर्फ राहुल सेन को राहत देने से साफ इनकार कर दिया है। जस्टिस आर मुखोपाध्याय और जस्टिस पीके श्रीवास्तव की खंडपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उसकी जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया।

NIA के चौंकाने वाले खुलासे

मामले की जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने अदालत में अपनी दलीलें पेश करते हुए बताया कि उमर बहादुर केवल एक समर्थक नहीं, बल्कि आईएसआईएस के वैचारिक प्रसार का एक डिजिटल मोहरा था।

  • साइबर प्रोपेगेंडा: जांच में पाया गया कि आरोपी सोशल मीडिया पर कई गुप्त समूह (Cyber Groups) चला रहा था।

  • भड़काऊ सामग्री: छापेमारी के दौरान उसके पास से डिजिटल साक्ष्य और ऐसी सामग्री मिली थी, जिसका इस्तेमाल युवाओं के ‘ब्रेनवाश’ (Brainwashing) के लिए किया जाता था।

  • हिंसक उकसावा: वह युवाओं को आईएसआईएस के ट्रेनिंग वीडियो दिखाकर उन्हें देश के खिलाफ हिंसक गतिविधियों के लिए तैयार कर रहा था।

कैसे पकड़ा गया उमर बहादुर?

उमर बहादुर की गिरफ्तारी की कहानी मुख्य आरोपी फैजान अंसारी से जुड़ी है। फैजान अंसारी, जो अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) का छात्र था, जुलाई 2023 में NIA के हत्थे चढ़ा था। फैजान ने ही पूछताछ में उमर बहादुर का नाम उगला था।

इसके बाद, 14 सितंबर 2023 को एक गुप्त ऑपरेशन के दौरान NIA ने मध्य प्रदेश के रतलाम जिले के खजुरी दावड़ा गांव से उमर बहादुर को धर दबोचा। फैजान और उमर दोनों ही डार्क नेट के जरिए सीमा पार बैठे अपने आकाओं के संपर्क में थे।

फैजान अंसारी की याचिका भी पहले हो चुकी है खारिज

गौरतलब है कि इस मॉड्यूल के मास्टरमाइंड माने जाने वाले फैजान अंसारी की जमानत याचिका को भी झारखंड हाईकोर्ट ने पहले ही खारिज कर दिया था। जांच एजेंसियों के मुताबिक, फैजान डार्क नेट का उपयोग कर भारत और पाकिस्तान स्थित संपर्कों के साथ मिलकर भारत में आईएसआईएस का नेटवर्क फैलाने की योजना बना रहा था।

मुख्य बिंदु:

  • उमर बहादुर उर्फ राहुल सेन की जमानत याचिका पर झारखंड हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया।

  • NIA ने आरोपी को ISIS के ‘साइबर विंग’ का मुख्य संचालक बताया।

  • डार्क नेट और सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को कट्टरपंथी बनाने का था आरोप।

निष्कर्ष

अदालत के इस फैसले ने स्पष्ट कर दिया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी। वर्तमान में दोनों आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं और NIA इस नेटवर्क के अन्य संभावित लिंक खंगाल रही है।

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