नई दिल्ली | गुरुवार, 16 अप्रैल 2026
महाराष्ट्र के नासिक स्थित टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के बीपीओ यूनिट में कथित यौन शोषण और सुनियोजित धर्मांतरण का मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) पहुंच गया है। इस मामले में विदेशी फंडिंग और राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट में याचिका: कड़े कानून की मांग
गुरुवार (16 अप्रैल 2026) को सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल की गई, जिसमें नासिक की घटना को आधार बनाते हुए देशभर में चल रहे कथित धर्मांतरण सिंडिकेट के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। याचिका की प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:
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सख्त केंद्रीय कानून: जबरन और धोखाधड़ी से होने वाले धर्मांतरण को रोकने के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय कानून बनाया जाए।
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आतंकवादी कृत्य का दर्जा: याचिका में दलील दी गई है कि संगठित तरीके से जनसांख्यिकी (Demography) बदलने की कोशिशों को “आतंकवादी कृत्य” की श्रेणी में रखा जाना चाहिए।
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विदेशी फंडिंग की जांच: आशंका जताई गई है कि इस नेटवर्क को विदेशों से आर्थिक मदद मिल रही है, जो भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है।
न्यायालय ने इस याचिका को पहले से लंबित एक स्वतः संज्ञान (Suo Motu) मामले के साथ संबद्ध कर दिया है, जिससे इस मुद्दे की गंभीरता और बढ़ गई है।
SIT की जांच में चौंकाने वाले खुलासे
नासिक पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT), जिसका नेतृत्व एसीपी संदीप मिटके कर रहे हैं, ने इस मामले में अब तक की सबसे विस्तृत जांच की है। ताजा अपडेट के अनुसार:
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पीड़ितों की संख्या बढ़ी: अब तक कुल 9 FIR दर्ज की जा चुकी हैं और पीड़ितों की संख्या बढ़कर 12 हो गई है।
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सुनियोजित नेटवर्क: जांच में सामने आया है कि महिला कर्मचारियों को पहले दोस्ती के जाल में फंसाया जाता था, फिर उन पर इस्लाम अपनाने, नमाज पढ़ने और बुर्का पहनने का दबाव बनाया जाता था।
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POSH अधिकारी की गिरफ्तारी: चौंकाने वाली बात यह है कि कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न रोकने के लिए जिम्मेदार POSH कमेटी के ऑपरेशंस मैनेजर अश्विन चैनानी को भी लापरवाही और कथित मिलीभगत के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।
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मास्टरमाइंड: पुलिस के अनुसार, फरार चल रही एचआर मैनेजर निदा खान और गिरफ्तार अभियुक्त रजा मेमन व शाहरुख कुरैशी इस पूरे नेटवर्क के मुख्य सूत्रधार माने जा रहे हैं।
TCS और टाटा संस की कार्रवाई
मामला बढ़ने के बाद टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने इसे “बेहद चिंताजनक और पीड़ादायक” बताया है। कंपनी ने निम्नलिखित कदम उठाए हैं:
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ऑपरेशन सस्पेंड: नासिक बीपीओ यूनिट के फिजिकल ऑपरेशन को फिलहाल बंद कर दिया गया है और कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम (WFH) पर भेज दिया गया है।
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आंतरिक जांच: कंपनी की चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (COO) आरती सुब्रमण्यम के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी गठित की गई है।
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निलंबन: मामले में नामजद सभी 8-10 कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है।
क्या है पूरा विवाद? (पृष्ठभूमि)
यह मामला तब उजागर हुआ जब नासिक यूनिट की कुछ महिला कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि उन्हें कार्यस्थल पर न केवल यौन रूप से प्रताड़ित किया गया, बल्कि हिंदू देवी-देवताओं का अपमान कर उन्हें मांसाहार करने और धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किया गया। पुलिस ने सबूत जुटाने के लिए 40 दिनों तक अंडरकवर ऑपरेशन चलाया, जिसमें महिला पुलिसकर्मी हाउसकीपिंग स्टाफ बनकर कंपनी के अंदर रहीं।
| आरोपी के नाम (प्रमुख) | स्थिति |
| शाहरुख कुरैशी, रजा मेमन | गिरफ्तार |
| आसिफ अंसारी, तौसीफ अत्तर | गिरफ्तार |
| शफी शेख, दानिश शेख | गिरफ्तार |
| अश्विन चैनानी (POSH Manager) | गिरफ्तार |
| निदा खान (HR Manager) | फरार (तलाश जारी) |
निष्कर्ष: सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप और SIT की बढ़ती जांच यह संकेत दे रही है कि आने वाले दिनों में कॉरपोरेट जगत में धार्मिक स्वतंत्रता और सुरक्षा मानकों को लेकर बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
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