इस्लामाबाद. पाकिस्तान इस समय अपने इतिहास के सबसे भीषण ऊर्जा और आर्थिक संकट से गुजर रहा है। मार्च 2026 की शुरुआत से ही ईंधन की कीमतों में जो आग लगी है, उसने आम आदमी की कमर तोड़ दी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की अस्थिरता और मध्य पूर्व (Middle East) में बढ़ते युद्ध के तनाव ने आग में घी डालने का काम किया है।
पेट्रोल-डीजल में 55 रुपये की ऐतिहासिक वृद्धि
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 17 मार्च 2026 तक पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत 321.17 रुपये प्रति लीटर के खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है। गौर करने वाली बात यह है कि महज 10 दिन पहले, 7 मार्च को सरकार ने एक झटके में 55 रुपये प्रति लीटर की रिकॉर्ड बढ़ोतरी की थी।
यही हाल डीजल का भी है:
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हाई-स्पीड डीजल (HSD): 335.86 रुपये प्रति लीटर।
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लाइट डीजल ऑयल (LDO): 302.52 रुपये प्रति लीटर।
डीजल की कीमतों में इस भारी उछाल का सीधा असर माल ढुलाई और सार्वजनिक परिवहन पर पड़ा है, जिससे खाने-पीने की चीजों के दाम भी आसमान छूने लगे हैं।
एलएनजी (LNG) संकट: केवल 9 दिन का स्टॉक बचा
ईंधन से भी ज्यादा डरावनी स्थिति गैस सेक्टर में देखने को मिल रही है। पाकिस्तान के पास अब केवल 9 दिनों का एलएनजी भंडार शेष है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि नई खेप का प्रबंध नहीं हुआ, तो 14 अप्रैल 2026 के बाद देश में गैस की आपूर्ति पूरी तरह ठप हो सकती है।
रसोई गैस (LPG) और घरों पर असर:
एलपीजी की कीमतें अब 270 से 330 रुपये प्रति किलोग्राम के बीच झूल रही हैं। इसका मतलब है कि एक घरेलू गैस सिलेंडर अब आम जनता को 3,200 से 3,900 रुपये में मिल रहा है।
खेती पर संकट: गैस की भारी कमी के चलते सरकार ने उर्वरक संयंत्रों (Fertilizer Plants) की गैस आपूर्ति में 50% की कटौती कर दी है। इससे यूरिया उत्पादन प्रभावित होगा, जिसका सीधा असर पाकिस्तान की आगामी फसलों और खाद्य सुरक्षा पर पड़ना तय है।
कितने दिनों का राशन (ईंधन) बचा है?
आंकड़ों के मुताबिक, पाकिस्तान के पास वर्तमान में रणनीतिक भंडार के रूप में:
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पेट्रोल: लगभग 27 दिन।
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डीजल: लगभग 21 दिन।
मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण सप्लाई चेन बाधित होने का खतरा मंडरा रहा है, जिससे इन भंडारों के खत्म होने के बाद देश में ब्लैकआउट जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।
क्या ‘सब्सिडी स्कीम’ बचा पाएगी सरकार को?
बढ़ते जन-आक्रोश और विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय मोटरसाइकिल और रिक्शा चालकों के लिए एक विशेष सब्सिडी योजना पर विचार कर रहा है। इसके तहत कम आय वाले समूहों को सस्ते दामों पर पेट्रोल उपलब्ध कराने की योजना है। हालांकि, विदेशी मुद्रा भंडार की कमी और IMF (अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष) की कड़ी शर्तों के बीच यह योजना कितनी सफल होगी, इस पर सवालिया निशान बना हुआ है।
निष्कर्ष
पाकिस्तान के लिए आने वाले 30 दिन बेहद चुनौतीपूर्ण हैं। यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के दाम कम नहीं होते या कोई बड़ा वित्तीय पैकेज नहीं मिलता, तो देश का परिवहन और उद्योग क्षेत्र पूरी तरह ठप हो सकता है।
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