तेहरान | शनिवार, 28 मार्च 2026
मध्य पूर्व में दशकों से जारी तनाव अब एक पूर्ण युद्ध (Full-scale War) में बदल गया है। 27 मार्च की देर रात इजरायली वायुसेना (IAF) ने ‘ऑपरेशन रोरिंग लायन’ के तहत ईरान के परमाणु बुनियादी ढांचे पर अब तक का सबसे बड़ा हमला किया। सूत्रों के अनुसार, इस ऑपरेशन को अमेरिका के सामरिक समर्थन से अंजाम दिया गया है।
हमले का मुख्य केंद्र यज्द प्रांत का अर्दकन यूयूरेनियम प्रसंस्करण संयंत्र और खोंडाब स्थित अराक भारी पानी रिएक्टर रहे। इजरायली रक्षा बलों (IDF) का दावा है कि इन हमलों ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को कई साल पीछे धकेल दिया है।
ईरान का पलटवार: इजरायल और अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल वर्षा
इस हमले के कुछ ही घंटों बाद ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने ‘प्रलयंकारी’ जवाबी कार्रवाई शुरू की। ईरान ने तेल अवीव और वेस्ट बैंक के रिहायशी व सैन्य इलाकों पर बैलिस्टिक मिसाइलों और क्लस्टर बमों से हमला किया।
सबसे खतरनाक मोड़ तब आया जब ईरान ने अपनी मिसाइलों का रुख सऊदी अरब की ओर मोड़ा। यहाँ स्थित प्रंस सुल्तान एयरबेस पर हुए हमले में कम से कम 10 अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं और कई लड़ाकू विमान नष्ट हो गए हैं। इस घटना ने वाशिंगटन को सीधे तौर पर इस युद्ध की अग्रिम पंक्ति में खड़ा कर दिया है।
युद्ध का विश्लेषण: इजरायल-ईरान युद्ध: क्या है ‘ऑपरेशन रोरिंग लायन’ और इसका प्रभाव?
UAE में भारतीय घायल: क्षेत्रीय अस्थिरता का संकेत
युद्ध की आग अब पड़ोसी देशों तक भी फैल गई है। ईरान द्वारा दागी गई मिसाइलों को इंटरसेप्ट किए जाने के बाद उनका मलबा अबू धाबी (UAE) के रिहायशी इलाकों में गिरा। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना में 5 भारतीय नागरिक गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। भारत के विदेश मंत्रालय ने स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए खाड़ी देशों में रह रहे अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है।
IAEA की चेतावनी: “परमाणु सुरक्षा पर बड़ा खतरा”
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी ने एक आपातकालीन बयान जारी किया है। उन्होंने कहा:
“स्थिति अब नियंत्रण से बाहर होती दिख रही है। हालांकि ईरान ने अभी तक रेडियोधर्मी रिसाव की पुष्टि नहीं की है, लेकिन परमाणु ठिकानों पर सीधे हमले वैश्विक सुरक्षा के लिए एक ‘डार्क मिसाइल’ की तरह हैं।”
वैश्विक प्रभाव: तेल की कीमतों में उछाल और बाजार में गिरावट
इस युद्ध की आहट से वैश्विक शेयर बाजार धड़ाम हो गए हैं। जानकारों का मानना है कि यदि हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) बंद होता है, तो कच्चे तेल की कीमतें $150 प्रति बैरल को पार कर सकती हैं। यह न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका होगा।
क्या यह तीसरे विश्व युद्ध की शुरुआत है?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच सीधी भिड़ंत बढ़ती है, तो यह संघर्ष एक वैश्विक युद्ध का रूप ले सकता है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की आपात बैठक पर टिकी हैं।
मुख्य बिंदु:
-
इजरायली वायुसेना ने ईरान के अर्दकन और अराक परमाणु संयंत्रों को निशाना बनाया।
-
जवाबी कार्रवाई में ईरान ने तेल अवीव और सऊदी अरब स्थित अमेरिकी बेस पर दागीं मिसाइलें।
-
अबू धाबी में मिसाइल मलबे की चपेट में आने से 5 भारतीय नागरिक घायल।
-
IAEA प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने परमाणु सुरक्षा को लेकर जारी की ‘रेड अलर्ट’ चेतावनी।
Matribhumisamachar


