देहरादून | शनिवार, 2 मई 2026
नैनीताल जिले के लालकुआँ क्षेत्र से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ तकनीक (Artificial Intelligence) का इस्तेमाल अपराध के औजार के रूप में किया गया। पुलिस के अनुसार, करीब दो महीने पहले इंस्टाग्राम पर एक फर्जी आईडी के माध्यम से पीड़िता से संपर्क किया गया था। आरोपी ने लड़की की फोटो वाली आईडी का सहारा लेकर किशोरी का भरोसा जीता और धीरे-धीरे उसकी निजी जानकारी और मोबाइल नंबर हासिल कर लिया।
एआई (AI) तकनीक और धर्मांतरण का दबाव
मामले में मोड़ तब आया जब आरोपी ने किशोरी के साथ छेड़छाड़ शुरू की और उस पर धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाया। विरोध करने पर आरोपी ने आधुनिक तकनीक का सहारा लिया। उसने पीड़िता के फोटो का उपयोग कर एआई (AI) टूल्स के जरिए अश्लील वीडियो बनाने और उसे सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी दी।
स्पष्टीकरण: वर्तमान में एआई के माध्यम से किसी के चेहरे को दूसरे वीडियो पर लगाना ‘डीपफेक’ (Deepfake) कहलाता है, जो आईटी एक्ट के तहत एक गंभीर दंडनीय अपराध है।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई और गिरफ्तारी
एसएसपी नैनीताल डॉ. मंजुनाथ टीसी के कड़े रुख के बाद, लालकुआँ पुलिस ने सर्विलांस की मदद से आरोपी की लोकेशन ट्रैक की। आरोपी की पहचान इब्राहिम (27 वर्ष), निवासी ग्राम सरकरा, बाजपुर (ऊधमसिंह नगर) के रूप में हुई है।
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ निम्नलिखित धाराओं में मामला दर्ज किया है:
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POCSO एक्ट: नाबालिग से छेड़छाड़ और मानसिक उत्पीड़न के लिए।
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भारतीय न्याय संहिता (BNS): विभिन्न आपराधिक धाराओं के तहत।
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उत्तराखंड धर्म स्वतंत्रता (संशोधन) अधिनियम-2022: जबरन धर्मांतरण के दबाव के विरुद्ध।
साइबर अपराध और जागरूकता – matribhumisamachar.com
सावधानी ही बचाव है: साइबर सुरक्षा टिप्स
इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि एआई का युग जितने अवसर लाया है, उतने ही खतरे भी। नागरिकों को निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए:
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अनजान मित्रता से बचें: सोशल मीडिया पर किसी भी अजनबी पर भरोसा न करें, भले ही प्रोफाइल फोटो विश्वसनीय लगे।
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निजी डेटा साझा न करें: अपना फोन नंबर या निजी तस्वीरें सार्वजनिक प्लेटफॉर्म पर न डालें।
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रिपोर्ट करें: यदि कोई एआई वीडियो या फोटो के जरिए ब्लैकमेल करे, तो डरे नहीं। तत्काल साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें।
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