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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पाकिस्तान को नहीं मिली कोई सफलता

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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वाशिंगटन. भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव (India-Pakistan Tensions) के बीच, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने बंद कमरे में एक बैठक की. यहां सदस्य देशों ने भारत और पाकिस्तान को संयम बरतने और बातचीत से रास्ता निकालने का आह्वान किया. स्थानीय समयानुसार सोमवार, 5 मई की दोपहर 15 देशों (5 स्थाई देश) की सुरक्षा परिषद का परामर्श (कंस्लटेशन) करीब डेढ़ घंटे तक चला लेकिन बैठक के बाद परिषद की ओर से कोई बयान जारी नहीं किया गया. पाकिस्तान अभी वर्तमान में इस शक्तिशाली परिषद का एक अस्थायी सदस्य है और उसने ही अपने परमाणु हथियार संपन्न पड़ोसी, यानी भारत से तनाव के बीच स्थिति पर “बंद कमरे में परामर्श” का अनुरोध किया था.

बैठक में क्या हुआ?

संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत असीम इफ्तिखार अहमद ने बैठक के बाद मीडिया को इससे जुड़ी जानकारी दी. उन्होंने कहा कि इस बैठक का उद्देश्य यह था कि परिषद के सदस्यों को बिगड़ते सुरक्षा माहौल और भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव पर चर्चा करने और स्थिति से निपटने के तरीकों पर विचारों का आदान-प्रदान करने में सक्षम बनाया जा सके. इसमें टकराव से बचना भी शामिल है जिसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं. मई महीने के लिए परिषद की अध्यक्षता ग्रीस कर रहा है. उसने सोमवार दोपहर (स्थानीय समयानुसार) के लिए बैठक निर्धारित की थी. बंद दरवाजे की बैठक यूएनएससी चैंबर में नहीं हुई, बल्कि चैंबर के बगल में एक परामर्श कक्ष (कंस्लटेशन रूम) में हुई.

संयुक्त राष्ट्र में ग्रीस के स्थायी प्रतिनिधि और मई महीने के लिए सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष राजदूत इवेंजेलोस सेकेरिस ने बैठक को “उत्पादक/ प्रोडक्टिव बैठक, मददगार” बताया. तनाव कम करने में परिषद की भूमिका पर सवालों के जवाब में सेकेरिस ने कहा कि सुरक्षा परिषद ऐसे प्रयासों में हमेशा मददगार रहती है. बैठक से बाहर आते हुए एक रूसी राजनयिक ने कहा, “हमें तनाव कम होने की उम्मीद है.”

बैठक पर भारत ने क्या कहा है?

सुरक्षा परिषद की बैठक से पहले, संयुक्त राष्ट्र में भारत के पूर्व स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने न्यूज एजेंसी पीटीआई से कहा था कि ऐसी चर्चा से किसी परिणाम की उम्मीद नहीं की जा सकती है, जहां संघर्ष का एक पक्ष (यानी पाकिस्तान) परिषद की अपनी सदस्यता का उपयोग करके धारणाओं (परसेप्शन) को आकार देना चाहता है. भारत ऐसे पाकिस्तानी प्रयासों की अनदेखी करेगा.” बैठक के बाद उन्होंने कहा, “अतीत की तरह आज भी पाकिस्तान की दादागीरी फिर से विफल हो गई है. जैसा कि अपेक्षित था, परिषद द्वारा कोई सार्थक प्रतिक्रिया नहीं दी गई. भारतीय कूटनीति ने सुरक्षा परिषद के हस्तक्षेप की मांग करने के पाकिस्तानी प्रयासों को एक बार फिर सफलतापूर्वक विफल कर दिया है.”

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UN महासचिव ने पहलगाम हमले की फिर निंदा की

दूसरी तरफ बंद कमरे में विचार-विमर्श से कुछ ही घंटे पहले संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटरेस ने भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव “सालों में सबसे ऊंचे स्तर” पर होने पर चिंता व्यक्त की. उन्होंने कहा कि वह पहलगाम में “भयानक आतंकवादी हमले” के बाद “रॉ फिलिंग” को समझते हैं और उस हमले की अपनी कड़ी निंदा दोहराई. उन्होंने कहा, “नागरिकों को निशाना बनाना अस्वीकार्य है – और जिम्मेदार लोगों को विश्वसनीय और वैध तरीकों से न्याय के कटघरे में लाया जाना चाहिए.” गुटेरेस ने जोर देकर कहा कि यह आवश्यक है – विशेष रूप से इस महत्वपूर्ण समय में – कि एक सैन्य टकराव से बचा जाए जो आसानी से नियंत्रण से बाहर हो सकता है.

साभार : एनडीटीवी

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।