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बांग्लादेश में हिंदू संत चिन्मय दास को 5 महीने बाद मिली जमानत

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

ढाका. बांग्लादेश के हाई कोर्ट ने जेल में बंद हिंदू हिंदू संत चिन्मय कृष्ण दास को जमानत दे दी है. चिन्मय के वकील अपूर्व कुमार भट्टाचार्य ने 23 अप्रैल को हाई कोर्ट में जमानत याचिका दायर की थी. चिन्मय कृष्ण दास इस्कॉन के पुजारी और बांग्लादेश सम्मिलित सनातनी जागरण जोत के प्रवक्ता हैं.

चिन्मय दास पर लगाया गया ये आरोप

उन्हें 25 नवंबर 2024 के ढाका हवाई अड्डे पर गिरफ़्तार किया गया था. गिरफ्तारी के बाद चिन्मय दास को दक्षिण-पूर्वी बंदरगाह शहर चटगांव की अदालत में ले जाया गया था, जिसने अगले दिन उनकी जमानत याचिका खारिज करते हुए उन्हें जेल भेज दिया था. उन पर बांग्लादेश के राष्ट्रीय ध्वज का अपमान करने का आरोप लगाया गया था. चटगांव की निचली अदालत ने 2 जनवरी 2025 को उनकी याचिका को खारिज कर दिया था, जिसके बाद उन्होंने हाई कोर्ट में जमानत के लिए याचिका दायर किया था. हाई कोर्ट ने फरवरी 2025 में बांग्लादेश सरकार से यह बताने के लिए कहा था कि चिन्मय कृष्ण दास को जमानत क्यों नहीं दी जानी चाहिए.

चिन्मय दास ने वकील ने क्या कहा?

द डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक चिन्मय कृष्ण दास के वकील प्रोलाद देब नाथ ने बताया कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद उनके जेल से रिहा होने की उम्मीद है. अगर सुप्रीम कोर्ट इस फैसले पर रोक नहीं लगाता है तो चिन्मय दास को रिहा कर दिया जाएगा. जस्टिस मोहम्मद अताउर रहमान और जस्टिस मोहम्मद अली रजा की पीठ ने चिन्मय की ओर से दायर जमानत याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश पारित किया. रिपोर्ट के मुताबिक 23 अप्रैल को चिन्मय दास के वकील अपूर्व कुमार भट्टाचार्य ने हाई कोर्ट की पीठ से अपने मुवक्किल को जमानत देने की प्रार्थना करते हुए कहा कि चिन्मय बीमार हैं और बिना सुनवाई के जेल में कष्ट झेल रहे हैं. पिछले साल 31 अक्टूबर को चटगांव के मोहोरा वार्ड बीएनपी के पूर्व महासचिव फिरोज खान ने कोतवाली पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज कराया था.

साभार : एबीपी न्यूज

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।